PM सूर्य घर योजना: भारत में सौर ऊर्जा (Solar Energy) के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। उत्तर प्रदेश ने इस क्षेत्र में एक ऐसी लंबी छलांग लगाई है, जिसने पूरे देश को चौंका दिया है।
नई दिल्ली में आयोजित ‘पीएम सूर्य घर पुरस्कार समारोह’ में उत्तर प्रदेश ने अलग-अलग श्रेणियों में कई टॉप अवॉर्ड्स अपने नाम किए हैं।
इस पूरी कामयाबी में सबसे बड़ी और हैरान करने वाली खबर राज्य की राजधानी लखनऊ से आई है।
PM सूर्य घर योजना के तहत घरों की छतों पर सोलर पैनल (Rooftop Solar) लगाने के मामले में लखनऊ ने पूरे देश में पहला स्थान हासिल कर लिया है।
लखनऊ ने कभी देश की सोलर कैपिटल कहे जाने वाले गुजरात के सूरत और महाराष्ट्र के नागपुर जैसे बड़े औद्योगिक शहरों को पीछे छोड़ते हुए देश का नंबर वन सोलर डिस्ट्रिक्ट होने का गौरव हासिल किया है।
आंकड़ों की जुबानी: कैसे नंबर-1 बना लखनऊ?
PM सूर्य घर योजना: लंबे समय से गुजरात का सूरत शहर शहरी सौर ऊर्जा के मामले में देश का सबसे बड़ा मॉडल माना जाता था।
लेकिन आधिकारिक पोर्टल के ताजे आंकड़े बताते हैं कि लखनऊ ने बहुत कम समय में इस पूरे समीकरण को बदल कर रख दिया।
लखनऊ के शानदार आंकड़े:
कुल आए आवेदन: 1,52,041
पूरे हो चुके सोलर इंस्टॉलेशन: 1,07,755
स्थापित कुल सोलर क्षमता: 381.87 MW
जनता को मिली कुल सब्सिडी: लगभग ₹72,794.87 लाख
इस रेस में महाराष्ट्र का नागपुर 92,483 इंस्टॉलेशन के साथ दूसरे नंबर पर रहा।
वहीं, तीसरे पायदान पर खिसके गुजरात के सूरत शहर में 1,26,491 आवेदनों में से केवल 87,748 घरों पर ही सोलर पैनल लग पाए, जिसकी क्षमता 334.93 MW दर्ज की गई है।
लखनऊ में यह रफ्तार अप्रैल और मई 2026 के महीनों में सबसे तेज देखी गई।
अकेले मई 2026 के महीने में ही लखनऊ में 9,667 नए सोलर सिस्टम जोड़े गए।
रिकॉर्ड तो तब बना जब 31 मई को एक ही दिन में शहर के भीतर 333 यूनिट्स स्थापित की गईं, जो पूरे देश के किसी भी जिले में एक दिन का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
कई श्रेणियों में उत्तर प्रदेश ने मारी बाजी
PM सूर्य घर योजना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतारने में उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर कई बड़े पुरस्कार जीते हैं।
राज्यवार ‘वेरी हाई कंज्यूमर बेस‘ (Very High Consumer Base) श्रेणी में उत्तर प्रदेश को देश भर में पहला स्थान मिला है।
इसके अलावा यूपी ने इन महत्वपूर्ण श्रेणियों में भी पहला पायदान कब्जाया है:
सबसे ज्यादा उपभोक्ता आवेदन (Maximum Consumer Applications)
सबसे ज्यादा चालू सोलर इंस्टॉलेशन
अधिकतम वेंडर रजिस्ट्रेशन (Maximum Vendor Registration)
एक जरूरी बात: भले ही उत्तर प्रदेश नए आवेदनों और हर महीने होने वाले इंस्टॉलेशन की रफ्तार में देश में सबसे आगे चल रहा है, लेकिन योजना की शुरुआत (फरवरी 2024) से लेकर अब तक के कुल संचयी (Cumulative) इंस्टॉलेशन के मामले में यूपी देश में तीसरे नंबर पर है। इस सूची में गुजरात और महाराष्ट्र अभी भी क्रमश: पहले और दूसरे स्थान पर बने हुए हैं।
जमीन पर दिख रहा है बदलाव: झुग्गी से लेकर आलीशान कोठियों तक सोलर
अगर आप लखनऊ के गोमती नगर, इंदिरा नगर, विकास नगर या अलीगंज जैसे रिहायशी इलाकों को ऊपर से देखें, तो मकानों की छतों पर नीले-काले सोलर पैनलों की एक बड़ी कतार साफ नजर आती है।
खास बात यह है कि यह बदलाव सिर्फ अमीर या मध्यमवर्गीय परिवारों तक सीमित नहीं है।
इंदिरा नगर की झुग्गी-झोपड़ियों से लेकर पुराने लखनऊ की संकरी गलियों में बनी इमारतों पर भी लोगों ने अपनी सहूलियत के हिसाब से सोलर पैनल लगवाए हैं।
इसका एक बेहतरीन उदाहरण सड़क किनारे दुकान लगाने वाले छोटे दुकानदार हैं।
लखनऊ के बैराज रोड पर पान की दुकान चलाने वाले एक वेंडर ने बताया कि वह पहले ₹30 रोज के किराए पर बैटरी लेते थे जिससे सिर्फ एक लाइट और छोटा पंखा चलता था।
अब उन्होंने ₹3,000 में एक छोटा सोलर पैनल खरीद लिया है, जिससे दिन में पंखा धूप से चलता है और रात में दुकान की लाइट जलती है। इसने उनके बिजनेस का खर्च सीधे आधा कर दिया है।
सरकार की ‘केंद्रीकृत निगरानी’ रणनीति रही कामयाब
लखनऊ के इस चमत्कार के पीछे उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (UPNEDA) और स्थानीय बिजली कंपनियों (Discoms) का बेहतरीन तालमेल रहा है।
राज्य सरकार ने “विकेंद्रीकृत कार्यान्वयन और केंद्रीकृत निगरानी” (Decentralized Implementation, Centralized Monitoring) का मॉडल अपनाया, जिससे आम जनता के लिए वेंडर ढूंढना और सरकारी सब्सिडी पाना बेहद आसान हो गया।
क्यों गेमचेंजर साबित हो रही है यह योजना?
पूरे उत्तर प्रदेश में लगभग 35 लाख घरों में अब सोलर पैनल लग चुके हैं, जिससे राज्य में कुल 1,888 MW की रूफटॉप सौर ऊर्जा क्षमता पैदा हो रही है।
अब तक उपभोक्ताओं को केंद्र सरकार से 3,602 करोड़ रुपये और राज्य सरकार से 1,200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी सीधे उनके बैंक खातों में मिल चुकी है।
यह योजना आम परिवारों के लिए कमाई का जरिया भी बन गई है।
भारी सरकारी सब्सिडी के कारण घरों का बिजली बिल तो शून्य (जीरो) हो ही रहा है, साथ ही नेट-मीटरिंग के जरिए लोग अपनी जरूरत से ज्यादा बनी बिजली को वापस सरकारी ग्रिड को बेचकर हर महीने पैसे भी कमा रहे हैं।
लखनऊ के नंबर वन बनने की सबसे बड़ी वजह यही है कि यहाँ के लोगों ने इस आर्थिक फायदे को बहुत जल्दी समझा और अपनाया।
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