CWG 2026: स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (Commonwealth Games 2026) का सफल समापन हो गया है।
इस बार भारतीय दल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 39 पदक अपने नाम किए।
इनमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल हैं। इसी के साथ भारत ने पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया।
पहली नजर में यह आंकड़ा भारत के पिछले कुछ राष्ट्रमंडल खेलों की तुलना में कम दिखाई देता है।
दरअसल, यह 1998 के कुआलालंपुर कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद पहली बार है जब भारत 50 से कम पदक जीत पाया।
हालांकि, यदि पूरे टूर्नामेंट के स्वरूप और परिस्थितियों को देखा जाए तो यह प्रदर्शन भारतीय खिलाड़ियों की क्षमता, रणनीति और जुझारूपन का बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है।
केवल 10 खेलों तक सीमित रहा कॉमनवेल्थ गेम्स 2026
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्लासगो ने आर्थिक और संचालन संबंधी चुनौतियों के बीच राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की।
इसी वजह से आयोजकों ने इस बार खेलों की संख्या में बड़ी कटौती की।
जहां बर्मिंघम 2022 में कुल 19 खेल शामिल थे, वहीं ग्लासगो 2026 में केवल 10 खेलों को जगह दी गई।
इसका सबसे बड़ा असर भारत पर पड़ा क्योंकि भारत के सबसे सफल खेलों को इस बार प्रतियोगिता से बाहर कर दिया गया।
भारत के लिए सबसे सफल रहे कई खेल इस बार नहीं हुए शामिल
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जिन खेलों को शामिल नहीं किया गया, उनमें भारत के लिए सबसे ज्यादा पदक दिलाने वाले खेल शामिल थे।
शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी
इन खेलों में भारत ने वर्षों से शानदार प्रदर्शन किया है।
| खेल | भारत के कुल CWG पदक | बर्मिंघम 2022 में योगदान |
|---|
| शूटिंग | 135 | शामिल नहीं |
| कुश्ती | 114 | 12 पदक (6 स्वर्ण) |
| बैडमिंटन | 31 | 6 पदक (3 स्वर्ण) |
| टेबल टेनिस | 28 | 7 पदक (4 स्वर्ण) |
| हॉकी | 6 | 2 पदक (1 रजत, 1 कांस्य) |
खेल विशेषज्ञों के अनुसार, केवल इन पांच खेलों ने बर्मिंघम 2022 में भारत के 61 में से 30 पदक दिलाए थे, जिनमें 13 गोल्ड मेडल शामिल थे।
ऐसे में इन खेलों की गैरमौजूदगी भारत के लिए बड़ी चुनौती थी, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने दूसरे खेलों में शानदार प्रदर्शन कर इसकी भरपाई कर दी।
बॉक्सिंग में भारत का ऐतिहासिक दबदबा
यदि ग्लासगो 2026 में किसी एक खेल ने सबसे अधिक सुर्खियां बटोरीं तो वह बॉक्सिंग रही।
भारतीय मुक्केबाजों ने इतिहास रचते हुए 10 फाइनल मुकाबलों में जगह बनाई और सभी 10 मुकाबलों में पदक जीतने में सफल रहे। इनमें 7 स्वर्ण और 3 रजत पदक शामिल रहे।
महिला मुक्केबाजों का शानदार प्रदर्शन
भारतीय महिला मुक्केबाजों ने कई भार वर्गों में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।
प्रीति पवार – 54 किलोग्राम (स्वर्ण), जैसमीन लांबोरिया – 57 किलोग्राम (स्वर्ण), साक्षी चौधरी – 51 किलोग्राम (स्वर्ण), प्रिया घंघास – 60 किलोग्राम (स्वर्ण), अरुंधति चौधरी – 70 किलोग्राम (स्वर्ण)।
पुरुष वर्ग में भी बरसे पदक
पुरुष वर्ग में भी भारतीय मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया।
सचिन सिवाच – 60 किलोग्राम (स्वर्ण), अंकुश पंघाल – 80 किलोग्राम (स्वर्ण), लवलीना बोरगोहेन, जादुमणि सिंह, नरेंद्र बरवाल ने अपने-अपने वर्ग में रजत पदक जीतकर भारत का पदक खाता और मजबूत किया।
जूडो में पहली बार रचा गया इतिहास
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स भारतीय जूडो के लिए ऐतिहासिक साबित हुए।
इससे पहले भारत ने कभी भी कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में स्वर्ण पदक नहीं जीता था। लेकिन इस बार भारतीय खिलाड़ियों ने यह इंतजार खत्म कर दिया।
हर्ष सिंह (पुरुष -60 किग्रा) – स्वर्ण
अस्मिता डे (महिला -48 किग्रा) – स्वर्ण
यामिनी मौर्य – रजत
उन्नति शर्मा – कांस्य
यह जूडो में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जा रहा है।
एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में भी शानदार प्रदर्शन
एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 16 पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया।
नीरज चोपड़ा ने जीता रजत
स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने पुरुषों की जेवलिन थ्रो स्पर्धा में 85.83 मीटर का थ्रो करते हुए रजत पदक जीता।
वहीं यशवीर सिंह ने इसी स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया।
गुलवीर सिंह ने बनाया नया रिकॉर्ड
लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने इतिहास रचते हुए एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में दो ट्रैक पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया। उन्होंने
10,000 मीटर में रजत पदक
5,000 मीटर में कांस्य पदक
जीतकर नया रिकॉर्ड बनाया।
तेजस्विन शंकर ने भी रचा इतिहास
भारतीय एथलीट तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का पहला डेकाथलॉन पदक दिलाया।
पैरा एथलीटों ने भी दिखाया दम
भारत के 28 सदस्यीय पैरा एथलेटिक्स दल ने भी शानदार प्रदर्शन किया।
शर्मिला धनकर – स्वर्ण
दिलीप महादु गावित – स्वर्ण
सोमन राणा – स्वर्ण
सहित भारतीय पैरा खिलाड़ियों ने कुल 7 पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
यह उपलब्धि इसलिए भी खास रही क्योंकि यह भारत के कॉमनवेल्थ गेम्स पैरा स्पोर्ट्स इतिहास के कुल पदकों की बराबरी एक ही संस्करण में कर गई।
वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू ने कायम रखा दबदबा
भारत की वेटलिफ्टिंग टीम ने शुरुआत से ही शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 9 पदक जीते।
स्टार वेटलिफ्टर साइखोम मीराबाई चानू ने महिला 48 किलोग्राम वर्ग में लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ गेम्स स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया।
इसके अलावा भारतीय टीम ने विभिन्न भार वर्गों में 6 रजत पदक और 1 कांस्य पदक भी जीते, जिससे टीम की गहराई और निरंतरता साफ दिखाई दी।
पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा भारत
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की अंतिम पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया ने 171 पदकों (70 स्वर्ण) के साथ पहला स्थान हासिल किया।
इसके बाद इंग्लैंड दूसरे स्थान पर और कनाडा तीसरे स्थान पर रहे।
भारत ने 39 पदकों के साथ चौथा स्थान हासिल किया। समान कुल पदकों के बावजूद भारत ने मेजबान स्कॉटलैंड को रजत पदकों की संख्या के आधार पर पीछे छोड़ दिया।
कम पदक नहीं, बल्कि शानदार रणनीतिक सफलता की कहानी
ग्लासगो 2026 केवल पदकों की संख्या की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारत की बदलती खेल संस्कृति, खिलाड़ियों की मेहनत और नई चुनौतियों से मुकाबला करने की क्षमता का प्रमाण है।
जिन खेलों में भारत वर्षों से सबसे अधिक पदक जीतता आया था, वे इस बार प्रतियोगिता का हिस्सा ही नहीं थे।
इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने नए खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए साबित कर दिया कि देश अब केवल कुछ चुनिंदा खेलों पर निर्भर नहीं है।
भारत की इस सफलता ने यह संकेत भी दिया है कि आने वाले अंतरराष्ट्रीय बहु-खेल आयोजनों में भारतीय खिलाड़ी पहले से कहीं अधिक मजबूत दावेदारी पेश करने के लिए तैयार हैं।
ग्लासगो 2026 का यह प्रदर्शन भविष्य के लिए भारतीय खेलों के उज्ज्वल संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

