कर्नाटक मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए नई कैबिनेट का गठन किया है।
इस विस्तार में पार्टी ने नए और युवा चेहरों को सीमित अवसर देने के साथ-साथ कई अनुभवी नेताओं पर भी भरोसा दोहराया है।
लंबे समय से कांग्रेस के भीतर पीढ़ीगत बदलाव और युवाओं को अधिक जिम्मेदारी देने की मांग उठ रही थी, लेकिन इस बार भी अपेक्षाकृत कम नए नेताओं को मंत्री पद मिला है।
नई कैबिनेट में केवल एक महिला मंत्री को शामिल किया गया है, जबकि युवा नेताओं में रिजवान अरशद और पूर्व मुख्यमंत्री धरम सिंह के बेटे अजय सिंह पहली बार मंत्री बनने जा रहे हैं। इस विस्तार के बाद मंत्रिमंडल में मुस्लिम प्रतिनिधित्व बढ़कर तीन मंत्रियों तक पहुंच गया है।
वहीं, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के कई करीबी नेताओं की भी मंत्रिमंडल में वापसी हुई है, जिससे अनुभव और संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने की कोशिश साफ नजर आती है.
जमीर अहमद खान और बी. नागेंद्र की हुई वापसी
नई कैबिनेट में जमीर अहमद खान को एक बार फिर मंत्री बनाया गया है। उन्हें मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का करीबी माना जाता है।
दावणगेरे उपचुनाव में पार्टी की हार के बाद उन पर सवाल उठे थे, लेकिन अल्पसंख्यक समुदाय और संगठन में उनकी मजबूत पकड़ के चलते उन्हें दोबारा जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसके अलावा बी. नागेंद्र की भी मंत्रिमंडल में वापसी हुई है। वाल्मीकि डेवलपमेंट कॉरपोरेशन घोटाले में नाम आने के बावजूद पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है।
वहीं नरेंद्र स्वामी, बसवंतप्पा, रघुमूर्ति, पुट्टारंगाशेट्टी, गायत्री शांते गौड़ा, विजयानंद काशप्पनवर और वरिष्ठ नेता शिवलिंगे गौड़ा को पहली बार मंत्री बनाकर कांग्रेस ने नए चेहरों को भी अवसर दिया है।
जातीय संतुलन साधने की कोशिश
नई कैबिनेट में इस बार किसी भी ब्राह्मण नेता को मंत्री नहीं बनाया गया है। हालांकि कांग्रेस ने अलग-अलग समुदायों के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति अपनाई है।
लिंगायत समुदाय से सात नेताओं को मंत्री बनाया गया है, जो पिछली कैबिनेट के बराबर है। वोक्कालिगा समुदाय से पांच नेताओं को मंत्री पद मिला है, जबकि रेड्डी समुदाय के एक नेता को विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से इस बार सात मंत्री बनाए गए हैं। इनमें तीन राइट, दो लेफ्ट, एक लांबानी और एक भोवी समुदाय से हैं।
वहीं अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय से तीन नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। इससे अलग-अलग सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश दिखाई देती है।
मुस्लिम समुदाय को मिला बड़ा प्रतिनिधित्व
नई कैबिनेट में मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व भी पहले की तुलना में मजबूत हुआ है। समुदाय को तीन मंत्री पद दिए गए हैं, जबकि विधान परिषद के सभापति का पद भी मुस्लिम नेता के पास है।
कर्नाटक के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार माना जा रहा है कि मुस्लिम समुदाय को एक साथ चार महत्वपूर्ण संवैधानिक और राजनीतिक पद मिले हैं।
OBC नेताओं को भी मिली अहम जिम्मेदारी
पिछड़ा वर्ग (OBC) से पांच नेताओं को मंत्री बनाया गया है। इसके अलावा विधानसभा और विधान परिषद, दोनों के उपाध्यक्ष भी पिछड़ा वर्ग से हैं।
इससे कांग्रेस ने सामाजिक समीकरणों को साधने का स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है।
महिला और युवा प्रतिनिधित्व पर उठे सवाल
हालांकि नई कैबिनेट में सामाजिक संतुलन बनाने का प्रयास दिखाई देता है, लेकिन महिला और युवा प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
मंत्रिमंडल में केवल एक महिला मंत्री को जगह मिली है, जबकि युवाओं को भी अपेक्षा के अनुरूप प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया।
ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस ने इस विस्तार में अनुभव को प्राथमिकता दी है, जबकि पीढ़ीगत बदलाव की मांग फिलहाल सीमित स्तर तक ही पूरी होती नजर आ रही है।

