Tuesday, August 4, 2026

Samudra Manthan Scheme: समुद्र में तेल-गैस खोजने पर सरकार करेगी ₹84,084 करोड़ खर्च, क्या बदल जाएगी भारत की किस्मत?

Samudra Manthan Scheme: भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसे आने वाले वर्षों में देश के सबसे बड़े रणनीतिक कदमों में गिना जा सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹84,084 करोड़ की ‘समुद्र मंथन नेशनल ऑफशोर एक्सप्लोरेशन स्कीम’ को मंजूरी दी है।

इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य समुद्र की गहराइयों में छिपे तेल और प्राकृतिक गैस के नए भंडारों की खोज करना है, ताकि भारत की आयातित कच्चे तेल और गैस पर बढ़ती निर्भरता को कम किया जा सके।

आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता देश है, लेकिन अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत तेल विदेशों से आयात करता है। हर साल इस आयात पर लाखों करोड़ रुपये खर्च होते हैं।

ऐसे में यदि देश के समुद्री क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर तेल और गैस के भंडार मिलते हैं, तो यह भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी मुद्रा बचत के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकता है।

क्या है ‘समुद्र मंथन’ योजना?

India Oil and Gas Exploration ‘समुद्र मंथन’ योजना भारत सरकार का एक महत्वाकांक्षी ऑफशोर एक्सप्लोरेशन कार्यक्रम है, जिसके तहत गहरे समुद्र (Deep Water) और अत्यधिक गहरे समुद्री क्षेत्रों (Ultra Deep Water) में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज की जाएगी।

इस योजना की सबसे खास बात यह है कि सरकार खुद एक्सप्लोरेशन का जोखिम साझा करेगी। यदि किसी कंपनी को गहरे समुद्र में तेल या गैस खोजने के लिए कुआं खोदना पड़ता है, तो उसकी लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम ₹650 करोड़ (जो भी कम हो) सरकार सीधे बजट से वहन करेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह दुनिया के शुरुआती बड़े सरकारी कार्यक्रमों में से एक है, जिसमें सरकार स्वयं हाई-रिस्क एक्सप्लोरेशन गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है।

आखिर क्यों उठाना पड़ा इतना बड़ा कदम?

Samudra Manthan Scheme: भारत में ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है। उद्योगों, परिवहन, बिजली उत्पादन और घरेलू उपयोग के कारण तेल और गैस की खपत हर वर्ष बढ़ती जा रही है।

लेकिन दूसरी ओर घरेलू उत्पादन लगातार घट रहा है। पुराने तेल कुओं में उत्पादन कम हो रहा है और नए बड़े भंडार लंबे समय से नहीं मिले हैं। परिणामस्वरूप देश को अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदना पड़ रहा है।

सरकार का मानना है कि यदि समुद्र की गहराइयों में नए भंडार खोज लिए जाते हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी।

सरकार कहां खर्च करेगी ₹84,084 करोड़?

Samudra Manthan Scheme: सरकार ने इस पूरी योजना के लिए 2031 तक कुल ₹84,084 करोड़ का बजट निर्धारित किया है।

इस राशि का सबसे बड़ा हिस्सा ₹43,200 करोड़ केवल गहरे समुद्र में ड्रिलिंग के लिए खर्च किया जाएगा। इसके तहत अगले पांच वर्षों में कुल 60 डीप-वॉटर और अल्ट्रा-डीप-वॉटर एक्सप्लोरेशन कुओं की ड्रिलिंग होगी।

इसके अलावा लगभग ₹10,000 करोड़ साझा इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर खर्च किए जाएंगे। इसमें समुद्र के नीचे पाइपलाइन, प्रोसेसिंग सुविधाएं, उत्पादन नेटवर्क और अन्य आवश्यक संरचनाएं शामिल होंगी, जिनका उपयोग कई कंपनियां मिलकर कर सकेंगी।

शेष ₹28,534 करोड़ ऑफशोर डेटा संग्रह, भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, समुद्री बेसिन मैपिंग और तकनीकी अध्ययन पर खर्च किए जाएंगे ताकि ड्रिलिंग से पहले संभावित क्षेत्रों की बेहतर पहचान की जा सके।

सरकार हर कुएं पर ₹650 करोड़ क्यों खर्च करेगी?

Samudra Manthan Scheme: गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज सामान्य ड्रिलिंग से कहीं अधिक कठिन और महंगी होती है।

एक एक्सप्लोरेशन वेल तैयार करने में हजारों करोड़ रुपये तक खर्च हो सकते हैं। कई बार वर्षों तक खोज करने के बाद भी व्यावसायिक रूप से उपयोगी तेल या गैस नहीं मिलती। ऐसी स्थिति में पूरा निवेश डूब जाता है।

यही कारण है कि अधिकांश निजी कंपनियां केवल पहले से खोजे गए क्षेत्रों में उत्पादन करती हैं, लेकिन नई खोज में निवेश करने से बचती हैं।

सरकार अब इस जोखिम का एक बड़ा हिस्सा खुद उठाकर कंपनियों को नए क्षेत्रों में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है।

निजी कंपनियां अब क्यों दिखा सकती हैं दिलचस्पी?

Samudra Manthan Scheme: अब तक गहरे समुद्री क्षेत्रों में निवेश का सबसे बड़ा अवरोध वित्तीय जोखिम था। यदि किसी कंपनी को तेल नहीं मिलता, तो उसका पूरा निवेश नुकसान में चला जाता था।

नई योजना के तहत सरकार ड्रिलिंग लागत का बड़ा हिस्सा वहन करेगी। इससे ONGC के अलावा निजी और विदेशी ऊर्जा कंपनियों के लिए भी भारत के अपतटीय क्षेत्रों में निवेश करना अधिक आकर्षक बन जाएगा।

इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, नई तकनीक आएगी और खोज की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है।

किन क्षेत्रों में होगी समुद्र के नीचे खोज?

Samudra Manthan Scheme: सरकार का फोकस भारत के गहरे समुद्री क्षेत्रों पर रहेगा। विशेष रूप से पूर्वी और पश्चिमी अपतटीय बेसिन, अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्र और ऐसे समुद्री इलाके जहां अब तक सीमित खोज हुई है, इस मिशन का हिस्सा होंगे।

इसके अलावा सरकार ने 99 प्रतिशत से अधिक ‘नो-गो’ क्षेत्रों को एक्सप्लोरेशन के लिए खोल दिया है। इससे भारत के एक्सक्लूसिव इकनॉमिक जोन (EEZ) का लगभग 10 लाख वर्ग किलोमीटर अतिरिक्त समुद्री क्षेत्र पहली बार खोज के लिए उपलब्ध हो गया है।

भारत में पहले से कहां-कहां मिलता है तेल?

Samudra Manthan Scheme: भारत में तेल उत्पादन का इतिहास 150 वर्ष से भी अधिक पुराना है। सबसे पहला तेल भंडार असम के डिगबोई क्षेत्र में खोजा गया था। इसके बाद गुजरात के अंकलेश्वर, कलोल, मेहसाणा, नवागाम और साणंद जैसे क्षेत्र प्रमुख तेल उत्पादक बने।

राजस्थान का बाड़मेर आज देश के सबसे महत्वपूर्ण ऑनशोर तेल क्षेत्रों में गिना जाता है।

वहीं समुद्र के नीचे स्थित मुंबई हाई भारत का सबसे बड़ा ऑफशोर ऑयल फील्ड है, जिसकी खोज 1974 में हुई थी। इसके अलावा कृष्णा-गोदावरी बेसिन भी तेल और गैस उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र बन चुका है।

भारत में अब तक कितने तेल और गैस भंडार खोजे गए?

Samudra Manthan Scheme: डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हाइड्रोकार्बन (DGH) के अनुसार, 1889 से 2025 तक कुल 966 तेल और गैस खोजें दर्ज की गई हैं।

इनमें 312 केवल तेल भंडार, 360 केवल गैस भंडार, 286 ऐसे क्षेत्र जहां तेल और गैस दोनों मिलें।

राज्यों की बात करें तो गुजरात में सबसे अधिक 217 खोजें हुई हैं। इसके बाद असम, मुंबई ऑफशोर, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और तमिलनाडु प्रमुख क्षेत्र हैं।

क्या सच में आयात कम हो सकता है?

Samudra Manthan Scheme: सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है, घरेलू उत्पादन बढ़ाना और आयात घटाना।

वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इससे हर साल विदेशी मुद्रा का भारी खर्च होता है।

यदि समुद्र मंथन योजना के तहत नए व्यावसायिक तेल और गैस भंडार मिलते हैं, तो भविष्य में आयात पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो सकती है।

हालांकि यह प्रक्रिया लंबी होगी और इसके परिणाम आने में कई वर्ष लग सकते हैं।

इस मिशन में सबसे बड़ा जोखिम क्या है?

Samudra Manthan Scheme: गहरे समुद्र में ड्रिलिंग केवल महंगी ही नहीं बल्कि अत्यधिक अनिश्चित भी होती है।

कई बार वैज्ञानिक सर्वेक्षण सकारात्मक संकेत देते हैं, लेकिन वास्तविक ड्रिलिंग के दौरान व्यावसायिक रूप से उपयोगी भंडार नहीं मिलते।

यानी करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी सफलता की कोई गारंटी नहीं होती।

इसी वजह से सरकार ने इस योजना में स्वयं जोखिम साझा करने का फैसला किया है ताकि खोज का काम लगातार जारी रह सके।

विशेषज्ञों की क्या राय है?

Samudra Manthan Scheme: ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन का अनुभव अभी सीमित है। ऐसे में सरकारी वित्तीय सहयोग कंपनियों के लिए जोखिम कम करेगा और नई खोजों को गति देगा।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि योजना सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में भारत न केवल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करेगा बल्कि विदेशी निवेश, रोजगार और ऊर्जा क्षेत्र में नई तकनीकों को भी बढ़ावा मिलेगा।

‘समुद्र मंथन’ योजना केवल एक ड्रिलिंग प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाया गया एक दीर्घकालिक रणनीतिक कदम है।

सरकार पहली बार इतने बड़े स्तर पर गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज का वित्तीय जोखिम अपने ऊपर ले रही है। यदि इस अभियान से नए हाइड्रोकार्बन भंडार मिलते हैं, तो भारत की आयात निर्भरता कम हो सकती है, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।

हालांकि यह मिशन बेहद चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा है, लेकिन इसकी सफलता देश की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को आने वाले दशकों में नई दिशा दे सकती है।

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