Tuesday, August 4, 2026

क्या आपके घर में भी है डाबर का यह सामान? FSSAI ने लगाई रोक!

क्या आपके घर में भी है डाबर का यह सामान: अगर आप किसी खाद्य उत्पाद को खरीदते समय उसके पैकेट पर लिखे “100% प्योर”,

“100% नेचुरल” या “100% ऑर्गेनिक” जैसे दावों को देखकर उसे बेहतर गुणवत्ता वाला मान लेते हैं, तो अब आपको थोड़ा सतर्क होने की जरूरत है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने ऐसे दावों को लेकर सख्त रुख अपनाया है और डाबर इंडिया के कुछ खाद्य उत्पादों पर कार्रवाई की है।

नियामक का कहना है कि इस तरह के दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं और इन्हें वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह प्रमाणित करना संभव नहीं है।

किन उत्पादों पर हुई कार्रवाई?

FSSAI की कार्रवाई डाबर इंडिया के कई लोकप्रिय उत्पादों पर हुई है। इनमें डाबर हनी, डाबर गाय का घी,

डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर, डाबर होममेड कोकोनट मिल्क, डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल,

डाबर तिल का तेल और डाबर कोकोनट वॉटर शामिल हैं। इन उत्पादों पर “100%” से जुड़े दावे किए जा रहे थे, जिन्हें नियामक ने नियमों के अनुरूप नहीं माना।

FSSAI को क्या आपत्ति है?

FSSAI के अनुसार, किसी भी खाद्य उत्पाद पर “100% प्योर”, “100% नेचुरल”, “100% प्योरिटी गारंटीड” या “100% ऑर्गेनिक” जैसे दावे स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं हैं।

मौजूदा खाद्य नियमों में ऐसे दावों के लिए कोई निर्धारित मानक उपलब्ध नहीं है। इसलिए इनकी वैज्ञानिक जांच या सत्यापन करना संभव नहीं होता।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी प्रयोगशाला में यह जांच की जा सकती है कि किसी उत्पाद में मिलावट है या नहीं,

लेकिन यह साबित करना संभव नहीं कि कोई उत्पाद पूरी तरह “100 प्रतिशत शुद्ध” है। इसी वजह से ऐसे दावे भ्रामक माने जा सकते हैं।

‘100%’ लिखना क्यों बन गया विवाद?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि “100%” आखिर किस चीज़ का संकेत देता है? क्या इसका मतलब पूरी तरह शुद्ध होना है, पूरी तरह प्राकृतिक होना है या किसी विशेष सामग्री की मात्रा से जुड़ा दावा है?

चूंकि इसका कोई स्पष्ट कानूनी या वैज्ञानिक आधार तय नहीं है, इसलिए ऐसे दावे उपभोक्ताओं के बीच गलत धारणा पैदा कर सकते हैं।

FSSAI का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खाद्य उत्पादों पर लिखी गई हर जानकारी तथ्यात्मक, प्रमाणित और उपभोक्ताओं को भ्रमित न करने वाली हो।

ग्राहकों पर क्या पड़ सकता है असर?

जब किसी पैकेट पर “100% प्योर” जैसा दावा लिखा होता है, तो आम ग्राहक अक्सर यह मान लेता है कि यह उत्पाद दूसरे ब्रांड्स की तुलना में अधिक सुरक्षित या बेहतर गुणवत्ता वाला है।

जबकि वास्तविकता यह है कि भारत में बिकने वाले सभी पैक्ड खाद्य उत्पादों को FSSAI द्वारा निर्धारित गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होता है।

ऐसे में केवल आकर्षक दावों के आधार पर किसी उत्पाद को श्रेष्ठ मान लेना सही निर्णय नहीं माना जा सकता।

‘जैविक भारत’ लोगो पर भी उठे सवाल

कार्रवाई केवल “100%” वाले दावों तक सीमित नहीं रही। FSSAI ने यह भी पाया कि कुछ ऑर्गेनिक उत्पादों पर ‘जैविक भारत’ का लोगो इस्तेमाल किया गया था,

जबकि उसके लिए आवश्यक वैध ऑर्गेनिक प्रमाणन उपलब्ध नहीं था।

यदि किसी उत्पाद पर सरकारी ऑर्गेनिक प्रमाणन चिह्न लगाया जाता है, तो उसके लिए संबंधित मानकों और प्रमाणपत्रों का होना अनिवार्य है।

इस मामले में नियामक ने इसे केवल विज्ञापन का विषय नहीं बल्कि प्रमाणन नियमों के उल्लंघन के रूप में भी देखा है।

कंपनी को क्या निर्देश दिए गए?

FSSAI ने कंपनी को संबंधित दावों वाले उत्पादों की बिक्री रोकने के निर्देश दिए हैं और 15 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report) जमा करने को कहा है।

नियामक का कहना है कि पहले भी ऐसे दावे हटाने के लिए नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसी कारण अब सख्त कदम उठाया गया है।

हालांकि आदेश जारी होने के तुरंत बाद भी कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पुराने पैकेजिंग वाले उत्पाद दिखाई दे रहे थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि नई पैकेजिंग और ऑनलाइन लिस्टिंग अपडेट होने में कुछ समय लग सकता है।

पहले भी जारी हो चुके हैं ऐसे निर्देश

यह पहली बार नहीं है जब FSSAI ने “100%” वाले दावों पर आपत्ति जताई हो। इससे पहले भी खाद्य कंपनियों को ऐसे भ्रामक दावे हटाने के निर्देश दिए जा चुके हैं।

नियामक लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि किसी भी खाद्य उत्पाद पर ऐसे दावे तभी किए जाने चाहिए जब उनके लिए स्पष्ट कानूनी और वैज्ञानिक आधार मौजूद हो।

ग्राहकों के लिए क्या है सीख?

खाद्य उत्पाद खरीदते समय केवल बड़े-बड़े दावों पर भरोसा करने के बजाय पैकेट पर दी गई अन्य महत्वपूर्ण जानकारी भी जरूर देखें।

जैसे कि उत्पाद की सामग्री (Ingredients), FSSAI लाइसेंस नंबर, निर्माण और समाप्ति तिथि यदि उत्पाद ऑर्गेनिक है तो उसका वैध प्रमाणन।

जागरूक उपभोक्ता बनकर ही सही और सुरक्षित खाद्य उत्पादों का चुनाव किया जा सकता है।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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