सत्यजीत रे बायोग्राफी: क्या कभी आपने सोचा है कि क्या कोई एक अकेला इंसान पूरी फिल्म इंडस्ट्री का काम अकेले संभाल सकता है? वह कौन सा अद्भुत कलाकार था जो फिल्म की कहानी लिखने से लेकर, उसका संगीत तैयार करने, सेट का डिज़ाइन बनाने और यहाँ तक कि फिल्म के पोस्टर्स को अपने हाथों से पेंट करने तक का हर काम खुद ही इतनी बखूबी करता था कि दुनिया दंग रह जाती थी?
जिसने न केवल कैमरे के पीछे खड़े होकर भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया, बल्कि अपनी जादुई कलम से बच्चों के लिए 'फेलुदा' और 'प्रोफेसर शोंकू' जैसे अमर किरदार भी रच दिए। वह सिर्फ...
सदानंदन मास्टर के कटे पैरों और वी.एस. अच्युतानंदन को पद्म विभूषण की राजनीति: रक्तरंजित बलिदानों का अपमान और सत्ता का 'मास्टरस्ट्रोक'
लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर...
धुरंधर: 'द रिवेंज'
'धुरंधर: द रिवेंज' का खौफ: पर्दे पर उतरा आतंकवाद का नंगा सच, तो बौखला उठा वामपंथी इकोसिस्टम
विकिपीडिया पर आदित्य धर की फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' को 'प्रोपेगेंडा'...