इरफ़ान खान बायोग्राफी: भारतीय सिनेमा की वो चकाचौंध भरी दुनिया, जहाँ 'सिक्स पैक एब्स' की नुमाइश होती थी, जहाँ 'फेयरनेस क्रीम' से चमकते चेहरों को कामयाबी का पैमाना माना जाता था और जहाँ शोर-शराबे वाले अभिनय को ही 'स्टारडम' समझा जाता था।
वहाँ एक ऐसा लड़का दाखिल हुआ जो इन तमाम पैमानों के खिलाफ खड़ा था। जयपुर की तपती और धूल भरी गलियों से निकलकर मुंबई की कंक्रीट की दुनिया में कदम रखने वाला यह लड़का लंबा था, दुबला-पतला था और उसकी आँखों के नीचे गहरी झाइयाँ थीं।
उसकी आँखों में नींद बहुत कम थी, लेकिन उनमें पले हुए सपनों का बोझ इतना ज़्यादा था कि वो पूरी दुनिया को...
सदानंदन मास्टर के कटे पैरों और वी.एस. अच्युतानंदन को पद्म विभूषण की राजनीति: रक्तरंजित बलिदानों का अपमान और सत्ता का 'मास्टरस्ट्रोक'
लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर...
सिलीगुड़ी कॉरिडोर: सिलीगुड़ी के पास स्थित चिकन नेक यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए केवल एक भौगोलिक हिस्सा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक जीवनरेखा है।
लगभग...