Lenskart
Lenskart पर उठे विवाद ने केवल एक कंपनी की ग्रूमिंग नीति को मुद्दा नहीं बनाया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या विदेशी पूंजी से नियंत्रित भारतीय यूनिकॉर्न सचमुच भारतीय सभ्यता, प्रतीकों और धार्मिक पहचान का सम्मान कर सकते हैं।
कंपनी की आलोचना इसलिए नहीं हो रही कि वह किसी समुदाय से खुले तौर पर नफरत करती है। आरोप इससे गहरा है। सवाल यह है कि विदेशी निवेश, ESG मानकों और पश्चिमी DEI ढांचे में बंधी कंपनियां भारतीय सांस्कृतिक प्रतीकों को स्वतंत्रता से स्वीकार ही नहीं कर पातीं।
Made in India के दावे पर सवाल
Peyush Bansal ने कहा था कि उन्हें गर्व है कि Lenskart भारत...