संकट में दुबई: जिसे हम सोने की चमक, कांच की गगनचुंबी इमारतों और असीमित संभावनाओं के शहर के रूप में जानते थे, आज वह मिसाइलों की गड़गड़ाहट और अनिश्चितता के साये में है।
दुबई में रहने वाले 17 लाख भारतीयों के लिए यह शहर अब 'सपनों की नगरी' नहीं, बल्कि एक ऐसा 'वेटिंग रूम' बन गया है जहां हर पल डर का पहरा है।
करीब ₹2 लाख करोड़ का आर्थिक नुकसान और 5 लाख भारतीयों की घर वापसी की तड़प, यह सिर्फ मध्य-पूर्व का संकट नहीं, बल्कि भारत के लिए एक बहुत बड़ी इमरजेंसी है।
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