मनोज बाजपेयी बायोग्राफी: एक समय ऐसा भी था जब एक छोटे से गाँव का लड़का अपने सपनों के पीछे इतना पागल था कि उसने उस शहर में जीवित रहने के लिए अपनी थोड़ी-बहुत संपत्ति तक बेच दी थी।
वहीं शहर जिसने उसे अपनाने से मना कर दिया था। रास्ता आसान नहीं था। तीन बार उसे प्रतिष्ठित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) ने ठुकरा दिया।
कई लोग उस घड़ी में हार मान जाते, लेकिन उसने हार को अपने हौसले की सीढ़ी बना लिया।
हर अस्वीकृति ने उसके संकल्प को और मजबूत किया और उसे यह सिखाया कि केवल मेहनत, लगन और आत्मविश्वास ही मंज़िल तक पहुँचाने वाले हैं।
धूलभरी गलियों से लेकर...
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए सार्वजनिक स्कूलों द्वारा बच्चों के लिंग पहचान परिवर्तन...
सदानंदन मास्टर के कटे पैरों और वी.एस. अच्युतानंदन को पद्म विभूषण की राजनीति: रक्तरंजित बलिदानों का अपमान और सत्ता का 'मास्टरस्ट्रोक'
लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर...
सिलीगुड़ी कॉरिडोर: सिलीगुड़ी के पास स्थित चिकन नेक यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए केवल एक भौगोलिक हिस्सा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक जीवनरेखा है।
लगभग...