ज़ाकिर खान बायोग्राफी: इससे पहले कि महफिलों का शोर उनके नाम की गूंज बन जाता, इससे पहले कि हेडलाइंस उनके हर लफ्ज़ को 'लाइफ लेसन' की तरह छापने लगतीं।
इससे पहले कि हजारों की भीड़ उनके 'खामोश ठहरने' (pause) पर तालियां बजाना सीखती -एक शख्स था जो सालों तक परछाइयों में जिया।
एक ऐसा चेहरा, जिसे महफिल में होने के बावजूद अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता था।
जाकिर खान की कहानी रातों-रात मिली शोहरत का कोई सस्ता किस्सा नहीं है। इसमें आपको बनावटी ठहाके या जबरदस्ती ठूंसी गई पंचलाइनें नहीं मिलेंगी।
उनकी जीवनी दरअसल उस 'सब्र' की इबादत है, जिसने दुनिया को शोर मचाकर नहीं बल्कि गौर से सुनकर समझा।
यह...
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बाजौर,...
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