आदित्य गढ़वी बायोग्राफी: गुजरात के खुरदरे तटीय इलाकों में गूंजता एक लोकगीत, नाविकों की सदियों पुरानी पुकार, जो अचानक डिजिटल दुनिया में तूफान बनकर उभर आता है।
यही हुआ जब आदित्य गढ़वी ने कोक स्टूडियों भारत के मंच पर ‘खलासी’ को अपनी आवाज़ दी।
कुछ ही हफ्तों में यह गीत 200 मिलियन से ज्यादा बार देखा गया और सीमाओं को पार कर वैश्विक पहचान बन गया।
यह सिर्फ एक गाना नहीं था यह परंपरा और आधुनिकता का ऐसा संगम था जिसने हर भाषा, हर संस्कृति के लोगों को एक ही धुन पर जोड़ दिया।
यहां तक कि नरेंद्र मोदी ने भी इसकी सराहना की, और जिन लोगों ने कभी...
सदानंदन मास्टर के कटे पैरों और वी.एस. अच्युतानंदन को पद्म विभूषण की राजनीति: रक्तरंजित बलिदानों का अपमान और सत्ता का 'मास्टरस्ट्रोक'
लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर...
सिलीगुड़ी कॉरिडोर: सिलीगुड़ी के पास स्थित चिकन नेक यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए केवल एक भौगोलिक हिस्सा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक जीवनरेखा है।
लगभग...
धुरंधर: 'द रिवेंज'
'धुरंधर: द रिवेंज' का खौफ: पर्दे पर उतरा आतंकवाद का नंगा सच, तो बौखला उठा वामपंथी इकोसिस्टम
विकिपीडिया पर आदित्य धर की फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' को 'प्रोपेगेंडा'...