पंकज त्रिपाठी बायोग्राफी: वह शख्स जो मुंबई के ग्लैमर में अपनी तस्वीरों का एल्बम लेकर नहीं, बल्कि गाँव से चावल-दाल की बोरी लेकर आया था ताकि संघर्ष के दिनों में भूखा न रहना पड़े।
आज दुनिया उन्हें 'सहज अभिनय' का उस्ताद मानती है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि बिहार के एक छोटे से गाँव बेलसंड का यह लड़का कभी नुक्कड़ नाटकों में लड़की का किरदार निभाता था,
क्योंकि उस दौर में लड़कियों को बाहर निकलने की इजाजत नहीं थी।
एक छात्र आंदोलन के दौरान सात दिन जेल में बिताने वाले इस कलाकार ने वहीं किताबों और खामोशी की ताकत को पहचाना।
न घर में बिजली थी, न फिल्मों का...
सदानंदन मास्टर के कटे पैरों और वी.एस. अच्युतानंदन को पद्म विभूषण की राजनीति: रक्तरंजित बलिदानों का अपमान और सत्ता का 'मास्टरस्ट्रोक'
लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर...
सिलीगुड़ी कॉरिडोर: सिलीगुड़ी के पास स्थित चिकन नेक यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए केवल एक भौगोलिक हिस्सा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक जीवनरेखा है।
लगभग...
सुनेत्रा पवार
महाराष्ट्र में राजनीतिक घटनाक्रम के बीच राज्य को आज पहली महिला उपमुख्यमंत्री मिलने जा रही हैं। राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार शनिवार 31 जनवरी...