समुद्र के नीचे तेल के कुएं खोदेगा भारत: भारत अब समुद्र की गहराई में छिपे तेल और गैस के भंडार खोजने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।
सरकार गहरे समुद्र में 60 नए कुओं की ड्रिलिंग करवाएगी। इस योजना का मकसद देश में तेल और गैस का उत्पादन बढ़ाना है, ताकि विदेशों से कच्चा तेल खरीदने की जरूरत कम हो सके।
इस काम को आसान बनाने के लिए सरकार हर कुएं पर 650 करोड़ रुपये तक की आर्थिक मदद भी देगी।
क्यों शुरू की गई यह योजना?
भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इसके लिए हर साल सरकार को बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है।
जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है, तो इसका असर भारत में भी देखने को मिलता है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं और देश का आयात बिल भी ज्यादा हो जाता है।
सरकार चाहती है कि देश में ही ज्यादा तेल और गैस का उत्पादन हो। अगर ऐसा होता है तो विदेशों पर निर्भरता कम होगी और भारत ऊर्जा के मामले में ज्यादा मजबूत बन सकेगा।
इसी सोच के साथ समुद्र में बड़े स्तर पर खोज अभियान शुरू किया जा रहा है।
हर कुएं पर 650 करोड़ रुपये क्यों खर्च होंगे?
समुद्र के नीचे तेल और गैस की खोज करना बहुत महंगा काम है। इसके लिए बड़ी मशीनें, खास जहाज और आधुनिक तकनीक की जरूरत होती है।
कई बार कंपनियां करोड़ों रुपये खर्च कर देती हैं, लेकिन फिर भी तेल या गैस नहीं मिलती। ऐसे में उन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है।
इसी जोखिम को कम करने के लिए सरकार ने फैसला किया है कि हर कुएं की ड्रिलिंग पर 650 करोड़ रुपये तक की मदद दी जाएगी।
इससे कंपनियों का आर्थिक बोझ कम होगा और वे बिना ज्यादा डर के इस काम में निवेश कर सकेंगी।
किन इलाकों में होगी ड्रिलिंग?
सरकार की योजना के तहत भारत के पूर्वी और पश्चिमी समुद्री क्षेत्रों में ड्रिलिंग की जाएगी।
इसके अलावा समुद्र के बेहद गहरे हिस्सों यानी अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों में भी तेल और गैस की खोज होगी।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इन इलाकों में तेल और प्राकृतिक गैस के अच्छे भंडार हो सकते हैं।
नई तकनीक की मदद से इन क्षेत्रों की जांच की जाएगी। अगर यहां बड़े भंडार मिलते हैं तो देश को इसका सीधा फायदा मिलेगा।
किन कंपनियों को मिलेगा फायदा?
इस योजना का फायदा सिर्फ सरकारी कंपनी ONGC को ही नहीं मिलेगा, बल्कि निजी और विदेशी कंपनियां भी इसमें हिस्सा ले सकेंगी।
अब तक गहरे समुद्र में ड्रिलिंग करना बहुत महंगा और जोखिम भरा माना जाता था। इसी वजह से कई कंपनियां निवेश करने से बचती थीं।
लेकिन सरकार की आर्थिक मदद मिलने के बाद कंपनियों का जोखिम कम होगा।
इससे ज्यादा कंपनियां भारत के समुद्री क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज के लिए आगे आएंगी। इससे देश में निवेश बढ़ेगा और नई तकनीक का इस्तेमाल भी होगा।
देश को क्या होगा फायदा?
अगर समुद्र के नीचे तेल और गैस के बड़े भंडार मिलते हैं, तो भारत को कई तरह से फायदा होगा।
सबसे पहले विदेशों से तेल खरीदने पर होने वाला खर्च कम हो सकता है। इससे देश की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
इसके अलावा देश में तेल और गैस की उपलब्धता बढ़ेगी। उद्योगों, बिजली उत्पादन और परिवहन जैसे कई क्षेत्रों को इसका फायदा मिलेगा।
भविष्य में अगर दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ती भी हैं, तो भारत पर उसका असर पहले की तुलना में कम हो सकता है।
क्या इस योजना में जोखिम भी है?
गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज आसान नहीं होती। कई बार लंबे समय तक काम करने के बाद भी कोई बड़ा भंडार नहीं मिलता।
इसलिए इस तरह की परियोजनाओं में जोखिम हमेशा बना रहता है।
हालांकि, सरकार का मानना है कि अगर अभी खोज पर निवेश किया जाएगा, तो भविष्य में इसका फायदा मिल सकता है।
दुनिया के कई देशों ने समुद्र के नीचे बड़े तेल और गैस भंडार खोजकर अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया है। भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।
भारत के लिए क्यों है यह कदम अहम?
बढ़ती आबादी और तेजी से बढ़ते उद्योगों के कारण भारत में ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में यह मांग और ज्यादा होगी।
ऐसे में सिर्फ आयात पर निर्भर रहना सही नहीं माना जाता। अगर देश में ही तेल और गैस का उत्पादन बढ़ता है तो ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलेगा।
सरकार का मानना है कि यह योजना सिर्फ आज की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाले समय की तैयारी भी है।
अगर खोज सफल रहती है तो भारत ऊर्जा के क्षेत्र में पहले से ज्यादा आत्मनिर्भर बन सकता है।

