ओवेरियन कैंसर: भारत में महिलाओं के बीच ओवेरियन कैंसर तेजी से चिंता का विषय बनता जा रहा है। यह महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसरों में तीसरे स्थान पर माना जाता है।
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अधिकांश मामलों में इसकी पहचान तब होती है जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार भारत में लगभग 70 से 80 प्रतिशत ओवेरियन कैंसर के मरीज एडवांस स्टेज में अस्पताल पहुंचते हैं।
इसका कारण केवल जांच की कमी नहीं, बल्कि इसके शुरुआती लक्षणों का बेहद सामान्य दिखना भी है, जिन्हें महिलाएं अक्सर नजरअंदाज कर देती हैं।
ओवेरियन कैंसर को ‘साइलेंट कैंसर’ क्यों कहा जाता है?
लंबे समय से डॉक्टर ओवेरियन कैंसर को “साइलेंट कैंसर” कहते रहे हैं, क्योंकि इसके शुरुआती संकेत बहुत स्पष्ट नहीं होते।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी पूरी तरह खामोश नहीं होती, बल्कि इसके लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग उन्हें दूसरी छोटी-मोटी समस्याओं से जोड़ लेते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार पेट से जुड़ी परेशानियां, भूख कम लगना, जल्दी पेट भर जाना या हल्की असहजता जैसे संकेत कई बार ओवेरियन कैंसर की शुरुआती चेतावनी हो सकते हैं।
चूंकि ये लक्षण गैस, अपच या हार्मोनल बदलाव जैसी सामान्य समस्याओं से मिलते-जुलते हैं, इसलिए महिलाएं अक्सर इन पर ध्यान नहीं देतीं।
लगातार पेट फूलना हो सकता है बड़ा संकेत
ओवेरियन कैंसर: ओवेरियन कैंसर का सबसे आम शुरुआती लक्षण लगातार पेट फूलना माना जाता है। यदि किसी महिला को बार-बार पेट भारी लग रहा हो या कम खाना खाने के बाद भी ऐसा महसूस हो कि पेट भरा हुआ है, तो इसे आम समस्या मानकर टालना नहीं चाहिए।
विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर यह परेशानी कई दिनों तक बनी रहे और इसके साथ पेट के निचले हिस्से या पेल्विक एरिया में दर्द भी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
कई बार यह दर्द हल्का होता है, लेकिन लगातार बना रहता है, जो गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।
पीरियड्स में बदलाव को हल्के में न लें
मासिक धर्म में अचानक होने वाले बदलाव भी ओवेरियन कैंसर के संकेतों में शामिल हो सकते हैं। बहुत अधिक या बहुत कम ब्लीडिंग होना, पीरियड्स का अनियमित होना या सामान्य चक्र में बदलाव दिखाई देना चिकित्सकीय जांच की मांग करता है।
विशेष रूप से मेनोपॉज के बाद यदि किसी महिला को ब्लीडिंग होती है, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह कई गंभीर स्त्री रोग संबंधी समस्याओं के साथ-साथ ओवेरियन कैंसर का भी संकेत हो सकता है।
असामान्य वेजाइनल डिस्चार्ज भी हो सकता है चेतावनी संकेत
ओवेरियन कैंसर: विशेषज्ञों के मुताबिक यदि किसी महिला को बदबूदार, खून मिला हुआ या असामान्य रंग का वेजाइनल डिस्चार्ज दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
मेनोपॉज के बाद होने वाला किसी भी प्रकार का असामान्य डिस्चार्ज विशेष ध्यान देने योग्य होता है।
हालांकि हर असामान्य डिस्चार्ज कैंसर का संकेत नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक बने रहने पर इसकी जांच जरूर करानी चाहिए।
किन महिलाओं में ज्यादा होता है जोखिम?
कुछ महिलाओं में ओवेरियन कैंसर का खतरा सामान्य से अधिक हो सकता है। जिनके परिवार में पहले किसी सदस्य को ओवेरियन, ब्रेस्ट या कोलन कैंसर हो चुका है, उन्हें विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। ऐसे मामलों में आनुवंशिक (Genetic) जोखिम बढ़ जाता है।
इसके अलावा बढ़ती उम्र, मोटापा, धूम्रपान, हार्मोनल असंतुलन और कुछ आनुवंशिक जीन म्यूटेशन जैसे BRCA1 और BRCA2 भी इस बीमारी के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
कब करानी चाहिए डॉक्टर से जांच?
ओवेरियन कैंसर: स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पेट फूलना, पेल्विक दर्द, भूख कम लगना या अन्य संबंधित लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें या एक महीने में 12 दिनों से ज्यादा ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत Gynecologic Oncologist से सलाह लेनी चाहिए।
फिलहाल ओवेरियन कैंसर के लिए सर्वाइकल कैंसर के पैप स्मीयर या ब्रेस्ट कैंसर की मैमोग्राफी जैसी कोई नियमित स्क्रीनिंग टेस्ट उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि जागरूकता और समय पर पहचान ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।
ओवेरियन कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती इसके सामान्य दिखने वाले शुरुआती लक्षण हैं। पेट फूलना, जल्दी पेट भर जाना, पेल्विक दर्द, पीरियड्स में बदलाव और असामान्य डिस्चार्ज जैसी समस्याओं को बार-बार नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।
यदि ये लक्षण लगातार बने रहें, तो समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहद जरूरी है। शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर उपचार की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है और मरीज का जीवन बचाया जा सकता है।
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Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या लक्षण के मामले में डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

