त्योहारी सीजन से पहले महंगी हुई चीनी: त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है।
देश में चीनी के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं और बाजार में कीमतें रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई हैं।
ऐसे समय में जब गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आने वाले हैं, मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की मांग भी बढ़ने की उम्मीद है।
यही वजह है कि सरकार घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए आयात से जुड़े नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है।
चीनी की इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने की तैयारी
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार चीनी पर मौजूदा 100 प्रतिशत इम्पोर्ट ड्यूटी को कम करने या पूरी तरह खत्म करने के विकल्प पर विचार कर रही है।
हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। सरकारी अधिकारी अलग-अलग प्रस्तावों पर चर्चा कर रहे हैं और आने वाले दिनों में स्थिति साफ हो सकती है।
अगर सरकार आयात शुल्क में कटौती करती है, तो विदेशी बाजार से चीनी मंगाना पहले की तुलना में सस्ता हो सकता है। इससे घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ाने में मदद मिल सकती है और कीमतों पर भी दबाव कम होने की उम्मीद है।
त्योहारों में बढ़ जाती है चीनी की मांग
त्योहारी सीजन में चीनी की खपत आम दिनों के मुकाबले काफी बढ़ जाती है। मिठाई, बेकरी प्रोडक्ट्स, पेय पदार्थ और घरों में बनने वाले कई पारंपरिक पकवानों में चीनी का इस्तेमाल होता है।
ऐसे में त्योहारों से ठीक पहले कीमतों में तेजी आम लोगों के साथ-साथ मिठाई कारोबारियों के लिए भी परेशानी बढ़ा सकती है।
सरकार की कोशिश है कि त्योहारी मांग बढ़ने के बावजूद बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे। आयात शुल्क में बदलाव इसी दिशा में उठाया जाने वाला संभावित कदम माना जा रहा है।
महाराष्ट्र में चीनी की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर
चीनी की बढ़ती कीमतों का असर उत्पादन वाले राज्यों में भी दिखाई दे रहा है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार,
महाराष्ट्र में हाल ही में मिल से निकलने वाली चीनी की कीमत करीब 46 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है।
कीमतों में तेजी के पीछे घरेलू उत्पादन और उपलब्धता को लेकर बनी चिंता अहम वजह मानी जा रही है। सरकार इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, ताकि त्योहारी सीजन में बाजार में किसी तरह की कमी न हो।
गन्ने की फसल पर भी मौसम का असर
चीनी की कीमतों के बीच गन्ने की फसल को लेकर भी चिंता बनी हुई है। देश में गन्ने की खेती काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है। इस साल मानसून की बारिश सामान्य से कम रहने की वजह से फसल पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जून के अंत में बारिश की कमी 40 प्रतिशत से भी ज्यादा थी। हालांकि बाद में स्थिति में सुधार हुआ। भारतीय मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून की बारिश अभी भी सामान्य स्तर से करीब 13 प्रतिशत कम रही है।
गन्ने की बुवाई भी थोड़ी कम
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 14 अगस्त तक देश में करीब 58.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की बुवाई हुई थी।
यह आंकड़ा पिछले साल इसी अवधि की तुलना में थोड़ा कम है। बारिश की कमी के कारण कुछ इलाकों में फसलों की बुवाई में देरी भी हुई थी।
गन्ने की फसल पर मौसम का असर पड़ने की स्थिति में आगे चलकर चीनी के उत्पादन और आपूर्ति पर दबाव बन सकता है। यही कारण है कि सरकार अभी से बाजार की स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही है।
आम लोगों को क्या राहत मिल सकती है?
अगर सरकार चीनी पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने या हटाने का फैसला करती है, तो इससे बाजार में विदेशी चीनी की उपलब्धता बढ़ सकती है।
अतिरिक्त सप्लाई आने से कीमतों में तेजी को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि इसका वास्तविक असर आयात की मात्रा, अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।

