अमित शाह
यूपी के 62 शहरों से पंजाब के 44 ठिकानों तक फैला था खतरा
देश के भीतर आतंकी नेटवर्क कितनी गहराई तक अपनी जड़ें फैलाने की कोशिश कर चुका था, इसका अंदाजा आंकड़ों से लगता है। उत्तर प्रदेश के 62 शहर, हरियाणा के 52 इलाके, दिल्ली की 51 जगहें और पंजाब के 44 ठिकाने आतंकियों की निगाह में थे।
इन स्थानों की केवल पहचान नहीं की गई थी, बल्कि कई इलाकों की रेकी तक पूरी हो चुकी थी। पाकिस्तान से पैसा पहुंच रहा था और स्थानीय स्तर पर ऐसे लोगों को तैयार किया जा रहा था, जो लक्ष्य की जानकारी जुटाकर सीमा पार बैठे हैंडलरों तक पहुंचा सकें।
10 से 12 अगस्त की तीन रातें, दिल्ली में चलता रहा ऑपरेशन
इसी दौरान 10 से 12 अगस्त के बीच अमित शाह के खिलाफ राजनीतिक हमले भी बेहद तेज हो गए थे। लेकिन दिल्ली में तस्वीर दूसरी थी। गृह मंत्रालय के स्तर पर लगातार बैठकों, खुफिया इनपुट और राज्यों के साथ समन्वय के बीच तीन रातों तक ऑपरेशन चलता रहा।
राजनीतिक कुर्सी पर हो रहे हमलों की चिंता छोड़कर अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों को आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। एक साथ 14 राज्यों में रीयल टाइम कोऑर्डिनेटेड रेड कराई गई और अलग अलग स्थानों से कुल 253 आतंकियों को दबोचा गया।
मिनट दर मिनट अमित शाह की निगरानी में चला सबसे बड़ा शिकंजा
यह कोई सामान्य छापेमारी नहीं थी, जिसमें अलग अलग राज्यों की पुलिस अपनी सुविधा से कार्रवाई करती। ऑपरेशन का समय, लोकेशन और एजेंसियों के बीच तालमेल पहले से तय था। उद्देश्य साफ था कि किसी भी संदिग्ध को दूसरे नेटवर्क तक चेतावनी पहुंचाने का मौका नहीं मिले।
पूरे अभियान की मिनट दर मिनट निगरानी अमित शाह कर रहे थे। एक राज्य में कार्रवाई शुरू होते ही दूसरे राज्य की टीम भी सक्रिय थी। दिल्ली से लेकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक सुरक्षा एजेंसियां एक ही समय पर नेटवर्क की अलग अलग कड़ियों पर टूट पड़ीं।
पाकिस्तान में बैठा शहजाद भट्टी बना रहा था भारत के भीतर नेटवर्क
इस पूरे नेटवर्क के केंद्र में पाकिस्तान का शहजाद भट्टी क्राइम सिंडिकेट था। सोशल मीडिया को भर्ती के हथियार की तरह इस्तेमाल करते हुए 200 से ज्यादा लोगों को नेटवर्क में जोड़ा गया और फिर उन्हें सुरक्षित एनक्रिप्टेड कम्युनिकेशन सिस्टम के जरिए हैंडलरों से जोड़ा गया।
पाकिस्तान में बैठा हैंडलर इन लड़कों को निर्देश देता, टारगेट बताता और उनसे रेकी करवाता था। कई स्थानों पर निगरानी मजबूत करने के लिए सीसीटीवी कैमरे तक लगवाए गए, ताकि गतिविधियों, सुरक्षा व्यवस्था और संभावित लक्ष्यों की जानकारी लगातार नेटवर्क तक पहुंचती रहे।
पंजाब सीमा से ड्रोन के जरिए पहुंचाए गए हथियार
नेटवर्क केवल डिजिटल संपर्क या रेकी तक सीमित नहीं था। पाकिस्तान से पंजाब सीमा के रास्ते ड्रोन के जरिए हथियार गिराए गए थे। दूसरी तरफ स्थानीय सप्लायर भी तैयार किए गए, जिन्होंने नेटवर्क से जुड़े लोगों तक ग्रेनेड और दूसरे विस्फोटक पहुंचाने में भूमिका निभाई।
योजना का अगला चरण कहीं ज्यादा भयावह था। आतंकियों ने कार में बम लगाने की तैयारी की थी। ऐसी कार को भारी ट्रैफिक वाले इलाके में रेडलाइट पर विस्फोट से उड़ाने की योजना थी, जहां कुछ सेकंड में बड़ी संख्या में लोग निशाना बन सकते थे।
एक विस्फोट और सैकड़ों जिंदगियां हो सकती थीं तबाह
कल्पना कीजिए, शाम का व्यस्त समय हो, रेडलाइट पर दर्जनों गाड़ियां खड़ी हों और उन्हीं के बीच विस्फोटकों से भरी कार मौजूद हो। हमले की यह योजना केवल किसी इमारत को निशाना बनाने की नहीं, बल्कि अधिकतम जनहानि करने के हिसाब से तैयार थी।
यही वह खतरा था जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते पकड़ लिया। रेकी, पैसा, हथियार, ग्रेनेड, ड्रोन सप्लाई, स्थानीय मददगार और विस्फोटक कार की तैयारी मिलकर जिस हमले की जमीन बना रहे थे, उसे ऑपरेशन ने अंजाम तक पहुंचने से पहले ही तोड़ दिया।
राजनीतिक हमलों के बीच अमित शाह का पूरा ध्यान सुरक्षा ऑपरेशन पर
10 से 12 अगस्त के बीच अमित शाह के खिलाफ राजनीतिक मोर्चे पर चाहे जितना शोर रहा हो, उन्हीं घंटों में गृह मंत्रालय के सामने एक बिल्कुल अलग चुनौती थी। देश के कई राज्यों में फैले नेटवर्क की हर कड़ी को एक साथ पकड़ना बेहद संवेदनशील अभियान था।
इस ऑपरेशन की सबसे अहम बात समय और समन्वय था। यदि किसी एक राज्य में कार्रवाई पहले हो जाती तो बाकी नेटवर्क भूमिगत हो सकता था। अमित शाह की निगरानी में एजेंसियों ने एक साथ दबिश देकर उस संभावना को खत्म किया और 253 आतंकियों को पकड़ लिया।
62 शहर, 52 इलाके, 51 जगहें और 44 ठिकाने, खतरा कितना बड़ा था
उत्तर प्रदेश के 62 शहरों से लेकर हरियाणा के 52 इलाकों, दिल्ली की 51 जगहों और पंजाब के 44 ठिकानों तक पहुंच चुका नेटवर्क बताता है कि यह किसी एक शहर या राज्य की सुरक्षा चुनौती नहीं थी। इसकी तैयारी राष्ट्रीय स्तर की थी।
अमित शाह के नेतृत्व में हुए ऑपरेशन ने उसी राष्ट्रीय खतरे का जवाब राष्ट्रीय स्तर पर दिया। 14 राज्यों में एक साथ कार्रवाई कर नेटवर्क की भर्ती, रेकी, हथियार सप्लाई और हमले की तैयारी से जुड़ी कड़ियों को पकड़ा गया और एक बेहद खतरनाक योजना समय रहते ध्वस्त कर दी गई।

