Organ Donation: किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके अंग किसी दूसरे जरूरतमंद इंसान के लिए जिंदगी की नई उम्मीद बन सकते हैं।
यही वजह है कि ऑर्गन डोनेशन को महादान कहा जाता है। हालांकि, जब किसी व्यक्ति की मौत अस्पताल के बजाय घर पर होती है, तो परिवार के मन में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि क्या उस व्यक्ति के अंग अब भी डोनेट किए जा सकते हैं? अगर हां, तो किन अंगों को दान किया जा सकता है?
इस विषय को लेकर कई तरह की गलतफहमियां भी हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि मृत्यु किस परिस्थिति में हुई है और कितने समय के भीतर डोनेशन की प्रक्रिया शुरू की गई।
ब्रेन डेथ के बाद कई महत्वपूर्ण अंगों का हो सकता है डोनेशन
Organ Donation: जब किसी मरीज को अस्पताल में मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत ब्रेन डेथ घोषित किया जाता है, तब ऑर्गन डोनेशन की संभावनाएं काफी अधिक होती हैं।
ऐसी स्थिति में मेडिकल टीम की निगरानी में हार्ट, लंग्स, लिवर, किडनी, पैंक्रियाज और छोटी आंत जैसे महत्वपूर्ण अंगों को ट्रांसप्लांट के लिए सुरक्षित किया जा सकता है।
इन अंगों को निकालने और सुरक्षित रखने की पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञों की निगरानी में होती है, क्योंकि ट्रांसप्लांट के लिए हर अंग की एक निश्चित समय सीमा होती है।
घर पर सामान्य मौत होने पर क्यों नहीं डोनेट किए जा सकते महत्वपूर्ण अंग?
Organ Donation: अगर किसी व्यक्ति की घर पर सामान्य या प्राकृतिक मृत्यु होती है, तो हार्ट, लिवर, किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों को ट्रांसप्लांट के लिए इस्तेमाल करना आमतौर पर संभव नहीं होता।
दरअसल, मृत्यु के बाद शरीर में रक्त संचार और ऑक्सीजन की सप्लाई रुक जाती है। इसका सीधा असर शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ता है।
जितना समय बीतता जाता है, उतना ही इन अंगों के ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त रहने की संभावना कम होती जाती है।
यानी अस्पताल में ब्रेन डेथ के बाद होने वाले ऑर्गन डोनेशन और घर पर हुई सामान्य मृत्यु के बाद होने वाले डोनेशन को एक जैसा नहीं माना जा सकता।
घर पर मौत के बाद आंखों की कॉर्निया डोनेट की जा सकती है
सामान्य मृत्यु के मामलों में कॉर्निया डोनेशन एक महत्वपूर्ण विकल्प हो सकता है।
आंख की कॉर्निया को जरूरतमंद मरीज के इलाज में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे उसकी दृष्टि बहाल करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इसमें सबसे महत्वपूर्ण चीज है समय। मृत्यु के बाद परिवार को जल्द से जल्द आई बैंक या किसी अधिकृत संबंधित केंद्र से संपर्क करना चाहिए, ताकि जरूरी प्रक्रिया समय रहते पूरी की जा सके।
कुछ टिश्यू भी किए जा सकते हैं दान
मृत्यु के बाद केवल कॉर्निया ही नहीं, बल्कि कुछ परिस्थितियों में कुछ टिश्यू भी डोनेट किए जा सकते हैं।
इनमें स्किन, बोन, टेंडन और हार्ट वाल्व जैसे टिश्यू शामिल हो सकते हैं।
लेकिन हर मृत व्यक्ति इन टिश्यू के डोनेशन के लिए योग्य हो, यह जरूरी नहीं है। इसके लिए मेडिकल जांच की जाती है और संबंधित टिश्यू बैंक के नियमों के अनुसार तय किया जाता है कि डोनेशन संभव है या नहीं।
परिवार को क्या करना चाहिए?
अगर किसी व्यक्ति ने जीवनकाल में ऑर्गन या टिश्यू डोनेट करने की इच्छा जताई थी, तो उसकी मृत्यु के बाद परिवार को खुद से यह फैसला करने या प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
इसके बजाय तुरंत नजदीकी अस्पताल, आई बैंक या अधिकृत ऑर्गन डोनेशन सेंटर से संपर्क करना चाहिए।
डोनेशन के मामलों में हर मिनट महत्वपूर्ण हो सकता है। इसलिए मृत्यु के बाद जानकारी देने में अनावश्यक देरी नहीं करनी चाहिए।
क्या ऑर्गन डोनेशन से शरीर को नुकसान पहुंचता है?
ऑर्गन या टिश्यू डोनेशन की प्रक्रिया प्रशिक्षित मेडिकल विशेषज्ञों की निगरानी में की जाती है।
डोनेशन के दौरान शरीर के साथ पूरी गरिमा और सम्मान का ध्यान रखा जाता है।
प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिवार सामान्य तरीके से अंतिम संस्कार कर सकता है।
साथ ही, डॉक्टर पहले यह जांच करते हैं कि कौन सा अंग या टिश्यू मेडिकल रूप से डोनेशन और ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त है।
हर व्यक्ति के सभी अंगों को डोनेट करना जरूरी नहीं होता।
सबसे जरूरी बात, मृत्यु के बाद तुरंत करें संपर्क
घर पर किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद परिवार को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि अब ऑर्गन डोनेशन की कोई संभावना नहीं है।
कुछ मामलों में कॉर्निया और अन्य टिश्यू डोनेट किए जा सकते हैं, जबकि महत्वपूर्ण अंगों का डोनेशन मुख्य रूप से अस्पताल में मेडिकल परिस्थितियों और ब्रेन डेथ प्रोटोकॉल से जुड़ा होता है।
इसलिए ऐसी स्थिति में सबसे सही कदम है कि परिवार बिना देरी किए डॉक्टर, आई बैंक या अधिकृत ऑर्गन डोनेशन सेंटर से संपर्क करे।
समय पर उठाया गया एक छोटा सा कदम किसी दूसरे व्यक्ति के लिए जिंदगी की नई उम्मीद बन सकता है।

