Tuesday, August 18, 2026

FSSAI की सख्ती का असर, Diageo बदलेगी Royal Challenge समेत इन बड़े ब्रांड्स की फॉर्मूलेशन

FSSAI की सख्ती का असर: भारत में शराब के कारोबार से जुड़ी कंपनियों के लिए अब सिर्फ उत्पाद की बिक्री और बाजार में लोकप्रियता ही मायने नहीं रखती, बल्कि उसके ingredients, manufacturing process और packaging पर दी गई जानकारी भी नियामकीय जांच के दायरे में है।

इसी कड़ी में Diageo और उसकी भारतीय कंपनी United Spirits Limited (USL) के कुछ चर्चित शराब ब्रांड्स को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) की आपत्तियों के बाद कंपनी ने कुछ उत्पादों की मौजूदा formulation में बदलाव करने पर सहमति जताई है।

इस प्रक्रिया का असर Royal Challenge Whisky, Antiquity Blue Whisky और McDowell’s No. 1 Celebration Matured XXX Rum जैसे प्रमुख ब्रांड्स पर पड़ सकता है।

मामला मुख्य रूप से बाहरी flavouring substances, product claims और packaging से जुड़े compliance नियमों को लेकर है।

नियामकीय निर्देशों के बाद कंपनी को अपनी manufacturing process की समीक्षा करनी होगी और विवादित हिस्सों में आवश्यक बदलाव करने होंगे।

Royal Challenge से लेकर McDowell’s No. 1

FSSAI की कार्रवाई में United Spirits के कई बड़े नाम सामने आए हैं। इनमें Royal Challenge Whisky प्रमुख है। यह कंपनी के बड़े volume वाले whisky brands में शामिल है और देश के कई बाजारों में इसकी अच्छी मांग है।

इसके अलावा Antiquity Blue Whisky भी इस मामले में प्रभावित होने वाले प्रमुख उत्पादों में बताया गया है। यह United Spirits के premium domestic whisky segment का महत्वपूर्ण ब्रांड है।

McDowell’s No. 1 Celebration Matured XXX Rum भी इस regulatory scrutiny में शामिल है। यह भारत में लंबे समय से बिकने वाले लोकप्रिय rum brands में से एक है।

बताया जा रहा है कि प्रस्तावित बदलाव केवल किसी एक राज्य या किसी विशेष production batch तक सीमित नहीं होंगे। आवश्यकता पड़ने पर इन्हें देशभर में उत्पादन करने वाली संबंधित इकाइयों में लागू किया जाएगा।

शराब में बाहरी flavouring को लेकर उठे सवाल?

पूरे मामले का सबसे अहम हिस्सा flavouring substances से जुड़ा है। नियामक की आपत्ति उन परिस्थितियों को लेकर है, जहां whisky या rum के निर्धारित flavour profile को बनाए रखने के लिए बाहरी flavouring substances का इस्तेमाल किया जाता है।

FSSAI के नियमों के तहत अलग-अलग alcoholic beverages के लिए उनकी पहचान और निर्माण से संबंधित निर्धारित मानक होते हैं। नियामकीय दृष्टिकोण यह है कि उत्पाद की विशेषता उसके निर्धारित raw materials और manufacturing process से मेल खानी चाहिए।

इसी वजह से कंपनियों को उन flavouring ingredients की समीक्षा करनी पड़ रही है, जिनके इस्तेमाल पर सवाल उठाए गए हैं। Diageo को भी अपने संबंधित products की formulation में बदलाव करने की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी।

लेबल पर लिखी जानकारी

इस कार्रवाई का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू bottles पर लिखे गए claims हैं। किसी शराब की बोतल पर उसकी maturation, ingredients या production process से संबंधित जानकारी ग्राहक के लिए महत्वपूर्ण होती है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, FSSAI ने कुछ ऐसे दावों पर सवाल उठाए जिनसे उत्पाद की maturation या उसकी composition को लेकर अलग धारणा बन सकती थी। Royal Challenge जैसे उत्पादों पर American oak casks में maturation से जुड़े उल्लेखों की भी regulatory scrutiny की गई।

नियामक की चिंता यह है कि packaging पर मौजूद जानकारी उत्पाद की वास्तविक प्रकृति और निर्माण प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से दर्शाए। अगर किसी claim से ग्राहक को उत्पाद की उम्र या maturation के बारे में गलत या अधूरी समझ बन सकती है, तो उस label को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

18 हजार केस से बढ़ी चिंता

मामले में packaging compliance भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिकारियों ने Diageo के करीब 18,000 cases को लेकर कार्रवाई की।

यह मामला recycled plastic packaging से जुड़े जरूरी compliance markings और consumer information से संबंधित बताया गया है। यानी नियामकीय जांच सिर्फ बोतल के अंदर मौजूद liquid तक सीमित नहीं रही, बल्कि packaging material और उसके बारे में दी गई जानकारी भी जांच का हिस्सा बनी।

शराब कंपनियों के लिए यह संकेत महत्वपूर्ण है क्योंकि आने वाले समय में packaging पर मौजूद हर जरूरी declaration और compliance marking की जांच और सख्त हो सकती है।

कंपनियों को मिला transition period

नए नियमों के अनुरूप बदलाव तुरंत लागू करने के बजाय कंपनियों को एक transition period दिया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, manufacturers को करीब 90 दिनों के भीतर आवश्यक formulation और manufacturing बदलाव पूरे करने होंगे।

इस अवधि का उद्देश्य कंपनियों को मौजूदा उत्पादन व्यवस्था से नई व्यवस्था में व्यवस्थित तरीके से जाने का मौका देना है। बड़े शराब ब्रांड्स के मामले में manufacturing facilities, supply chain और packaging को एक साथ बदलना आसान नहीं होता। इसलिए चरणबद्ध implementation कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पुराने stock को लेकर भी transition व्यवस्था के तहत अलग compliance requirements लागू हो सकती हैं।

नए लेबल पर ज्यादा साफ जानकारी

नई formulation पूरी तरह बाजार में आने तक कुछ products की packaging पर अतिरिक्त जानकारी देने की व्यवस्था की जा सकती है। इसका मकसद ग्राहकों को यह बताना है कि उत्पाद में इस्तेमाल किए गए flavouring substances या अन्य संबंधित ingredients की प्रकृति क्या है।

इस तरह की जानकारी से consumer को product चुनते समय ज्यादा स्पष्टता मिल सकती है। साथ ही कंपनियों के लिए भी यह जरूरी होगा कि packaging पर किए जाने वाले claims नियामकीय मानकों के अनुरूप हों।

दूसरे शराब ब्रांड्स भी जांच के घेरे में

यह मामला सिर्फ Diageo तक सीमित नहीं दिखाई देता। रिपोर्ट्स के अनुसार, अन्य शराब निर्माता कंपनियों के कुछ लोकप्रिय products पर भी regulatory action लिया गया है।

Inbrew Beverages के Bagpiper Deluxe Whisky और Old Cask Deluxe XXX Rum जैसे products का नाम भी सामने आया है। इसके अलावा Mohan Meakin के कुछ Old Monk Rum variants को लेकर भी नियामकीय कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।

इससे संकेत मिलता है कि flavouring और labeling को लेकर FSSAI की जांच का दायरा एक कंपनी से कहीं बड़ा है।

राज्यों ने भी शुरू की कार्रवाई

केंद्र की नियामकीय कार्रवाई का असर राज्यों के liquor markets में भी दिखाई दिया है। कुछ राज्य एजेंसियों और शराब बिक्री से जुड़ी संस्थाओं ने compliance से जुड़े मामलों में संबंधित products पर रोक या बिक्री प्रतिबंध जैसे कदम उठाए हैं।

तमिलनाडु में राज्य संचालित retailer TASMAC द्वारा कई liquor categories की बिक्री रोके जाने की रिपोर्ट भी सामने आई है। यह कदम कथित तौर पर artificial flavouring से जुड़े compliance concerns के बाद उठाया गया।

हालांकि शराब की बिक्री और regulation में राज्यों की अपनी व्यवस्थाएं होती हैं, लेकिन manufacturers के लिए national-level compliance को नजरअंदाज करना अब मुश्किल हो सकता है।

शराब में बदल सकता है compliance का तरीका

FSSAI की यह कार्रवाई भारतीय alcoholic beverage industry के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका दायरा केवल alcohol content या सामान्य food safety तक सीमित नहीं है।

अब ingredients, flavouring substances, manufacturing methods, maturation claims और packaging declarations जैसे पहलुओं पर भी ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।

इसका सीधा मतलब है कि कंपनियों को अपने products के formulation के साथ-साथ उनकी marketing और labeling strategy की भी समीक्षा करनी पड़ सकती है।

बड़े brands के लिए यह बदलाव चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि किसी लोकप्रिय product की formulation बदलने के साथ उसके स्वाद, production process और packaging को भी नए नियमों के अनुरूप रखना पड़ सकता है।

उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा?

आम ग्राहकों के लिए सबसे बड़ा बदलाव product labels पर ज्यादा स्पष्ट जानकारी के रूप में दिखाई दे सकता है।

अगर कंपनियां अपने packaging claims और ingredient disclosures को नए मानकों के मुताबिक अपडेट करती हैं, तो consumers को product के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।

वहीं formulation में बदलाव का असर संबंधित products की manufacturing process पर पड़ेगा। हालांकि किसी बदलाव के बाद उत्पाद के स्वाद या consumer experience में कितना फर्क आएगा, यह कंपनी की नई formulation और production process पर निर्भर करेगा।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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