Sunday, August 23, 2026

Cancer Risk: हजारों घंटे आसमान में उड़ते हैं पायलट और एयर होस्टेस, क्या रेडिएशन बढ़ा रहा है कैंसर का खतरा?

Cancer Risk: आसमान में उड़ने वाली नौकरी बाहर से जितनी ग्लैमरस और रोमांचक नजर आती है, उसके पीछे कुछ ऐसे स्वास्थ्य जोखिम भी हो सकते हैं, जिन पर आमतौर पर ज्यादा बात नहीं होती।

पायलट और फ्लाइट अटेंडेंट्स अपनी नौकरी के दौरान हजारों घंटे विमान में बिताते हैं। अब एक नई रिसर्च ने इसी लंबे समय तक उड़ान भरने वाले एयरक्रू की सेहत को लेकर एक अहम सवाल खड़ा किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 500 से ज्यादा अलग-अलग पेशों की तुलना में फ्लाइट अटेंडेंट्स और पायलट्स में रेडिएशन से जुड़े कैंसर से होने वाली मौतों का अनुपात ज्यादा पाया गया।

शोधकर्ताओं ने इसके पीछे उड़ान के दौरान लंबे समय तक कॉस्मिक रेडिएशन के संपर्क को एक संभावित वजह माना है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि एयरक्रू में कैंसर का कारण सिर्फ रेडिएशन ही है। रिसर्च में दूसरे कारणों को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

1.27 करोड़ से ज्यादा मौतों के आंकड़ों से सामने आई तस्वीर

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह रिसर्च हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शोधकर्ताओं ने की है। इसके निष्कर्ष JAMA Internal Medicine में प्रकाशित हुए हैं।

शोधकर्ताओं ने अमेरिका में 2020 से 2024 के बीच हुई करीब 1.27 करोड़ मौतों से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन किया।

इसमें 503 अलग-अलग पेशों को शामिल किया गया। रिसर्च का फोकस उन कैंसर से होने वाली मौतों पर था, जिन्हें रेडिएशन से जोड़ा जा सकता है।

अध्ययन में फ्लाइट अटेंडेंट्स सबसे ऊपर रहे, जबकि पायलट दूसरे स्थान पर थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरे पेशों की तुलना में फ्लाइट अटेंडेंट्स में रेडिएशन से जुड़े कैंसर से मौतों का अनुपात करीब 50 प्रतिशत ज्यादा पाया गया।

वहीं, पायलट्स में यह अनुपात करीब 36 प्रतिशत अधिक था।

लेकिन यहां एक बात समझना बहुत जरूरी है। जब शोधकर्ताओं ने हर तरह के कैंसर को एक साथ देखा,

तो पायलट और फ्लाइट अटेंडेंट्स में कैंसर का स्तर असामान्य रूप से ज्यादा नहीं मिला। यानी हर तरह के कैंसर का खतरा बढ़ा हुआ नहीं दिखा।

आखिर आसमान में रेडिएशन ज्यादा क्यों होता है?

अब सवाल उठता है कि जमीन पर रहने की तुलना में विमान में रेडिएशन का एक्सपोजर क्यों बढ़ जाता है?

इसका संबंध कॉस्मिक रेडिएशन से है। अंतरिक्ष से लगातार हाई एनर्जी वाले कण पृथ्वी की तरफ आते हैं।

हमारा वातावरण इनसे काफी हद तक सुरक्षा देता है। लेकिन जब हम धरती से बहुत ऊपर पहुंचते हैं, तो वातावरण की यह सुरक्षा कुछ कम हो जाती है।

कमर्शियल विमान काफी ऊंचाई पर उड़ते हैं। ऐसे में विमान के अंदर मौजूद लोगों को जमीन पर मौजूद लोगों की तुलना में कॉस्मिक रेडिएशन का ज्यादा सामना करना पड़ सकता है।

आम यात्री साल में कुछ ही बार फ्लाइट लेते हैं, लेकिन पायलट और फ्लाइट अटेंडेंट्स का काम ही लगातार उड़ान भरना है।

अपने पूरे करियर में वे हजारों घंटे आसमान में बिताते हैं। इसलिए उनके शरीर को लंबे समय तक रेडिएशन के संपर्क में रहने की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, एयरक्रू को एक साल में करीब 3 से 6 मिलीसिवर्ट कॉस्मिक रेडिएशन मिल सकता है।

वहीं साल में करीब 10 क्रॉस-कंट्री रिटर्न फ्लाइट लेने वाले आम यात्री को लगभग 0.4 मिलीसिवर्ट रेडिएशन मिलने का अनुमान है।

हर फ्लाइट में रेडिएशन की मात्रा एक जैसी नहीं

ऐसा नहीं है कि हर पायलट या फ्लाइट अटेंडेंट को बराबर मात्रा में रेडिएशन मिलता है। यह कई चीजों पर निर्भर करता है।

फ्लाइट कितनी लंबी है, विमान किस ऊंचाई पर उड़ रहा है, रूट किस इलाके से गुजर रहा है और उड़ान किस अक्षांश के ऊपर हो रही है, इन सभी चीजों का असर रेडिएशन एक्सपोजर पर पड़ सकता है।

यानी किसी एयरक्रू सदस्य का एक्सपोजर उसकी फ्लाइट की संख्या और काम के पैटर्न के हिसाब से दूसरे सदस्य से अलग हो सकता है।

क्या कैंसर के पीछे सिर्फ कॉस्मिक रेडिएशन है?

यह सवाल सबसे ज्यादा जरूरी है। रिसर्च के आधार पर फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि पायलट और फ्लाइट अटेंडेंट्स में कैंसर की वजह सिर्फ कॉस्मिक रेडिएशन है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एयरक्रू की लाइफस्टाइल और काम का तरीका भी कई तरह से शरीर को प्रभावित कर सकता है। रात की फ्लाइट, बदलती शिफ्ट, लगातार अलग-अलग टाइम जोन में सफर और नींद के समय में बदलाव इसके उदाहरण हैं।

बार-बार टाइम जोन बदलने से शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक यानी सर्कैडियन रिदम प्रभावित हो सकती है।

इसके अलावा, विमान की खिड़कियों से मिलने वाली अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन को भी संभावित कारणों में शामिल किया गया है।

इसलिए शोधकर्ता इस स्टडी को कैंसर का सीधा कारण बताने के बजाय एक ऐसे पैटर्न के रूप में देख रहे हैं, जिस पर आगे और गहराई से रिसर्च की जरूरत है।

क्या एयरक्रू के लिए सुरक्षा नियम बढ़ाने की जरूरत है?

इस रिसर्च के बाद एयरक्रू की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अमेरिका में Federal Aviation Administration यानी FAA एयरक्रू को आयनाइजिंग रेडिएशन के संपर्क में आने वाले पेशेवर समूह के तौर पर मानता है।

हालांकि, शोधकर्ताओं के मुताबिक एयरक्रू के लिए रेडिएशन की नियमित निगरानी और डोज लिमिट को लेकर वैसी व्यवस्था नहीं है,

जैसी कुछ दूसरे रेडिएशन के संपर्क में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए होती है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि एयरक्रू को काम के दौरान मिलने वाले रेडिएशन की बेहतर निगरानी की जानी चाहिए। साथ ही, जरूरत के अनुसार उनकी सुरक्षा के लिए नए उपायों पर भी विचार किया जाना चाहिए।

फिलहाल यह रिसर्च सिर्फ एक संभावित खतरे की ओर ध्यान खींचती है। कॉस्मिक रेडिएशन और कैंसर के बीच सीधा संबंध साबित करने के लिए अभी और शोध जरूरी है।

इसलिए एयरक्रू को लेकर घबराने के बजाय इस मुद्दे को बेहतर सुरक्षा और लगातार वैज्ञानिक जांच के नजरिए से देखना ज्यादा सही होगा।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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