मेरठ में किसान नेताओं के साथ पुलिस हिरासत में मारपीट और थर्ड डिग्री देने के मामले में पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है।
मामले की जांच के बीच सिविल लाइंस थाना प्रभारी समेत आठ पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है।
यह कार्रवाई मेरठ जोन के एडीजी भानु भास्कर के आदेश पर की गई है। पूरे मामले की जांच डीआईजी सहारनपुर अभिषेक सिंह को सौंपी गई है।
आठ पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई
लाइन हाजिर किए गए पुलिसकर्मियों में सिविल लाइंस थाना प्रभारी अखिलेश कुमार गौड़ और उपनिरीक्षक मुलायम सिंह समेत कुल आठ पुलिसकर्मी शामिल हैं।
पुलिस विभाग की इस कार्रवाई को किसान नेताओं द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है।
इससे पहले गुरुवार को मेरठ के तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडे को भी पद से हटाकर लखनऊ पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया था।
उनके तबादले को भी किसान नेताओं से जुड़े इस विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, पूरे मामले में जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
किसान नेताओं ने लगाए गंभीर आरोप
किसान नेता दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने पुलिस पर हिरासत के दौरान मारपीट और कथित तौर पर थर्ड डिग्री देने के आरोप लगाए हैं।
दोनों का कहना है कि वे बुधवार को तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडे से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे थे।
किसान नेताओं के मुताबिक, उन्हें एसएसपी के निजी चैंबर में बुलाया गया। उनका आरोप है कि वहां करीब डेढ़ घंटे तक उनके साथ मारपीट की गई।
इसके बाद उन्हें एसओजी कार्यालय ले जाया गया, जहां भी कथित तौर पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया।
दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ पर पैर बांधकर पीटने और लाठी-डंडों से मारने का आरोप लगाया है।
वहीं उन्होंने तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडे पर जूते से मारने का आरोप लगाया।
दोनों किसान नेताओं ने यह भी दावा किया कि उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और उन्हें प्रताड़ित किया गया।
मामले पर गरमाई सियासत
किसान नेताओं के आरोप सामने आने के बाद इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान ने प्रेस वार्ता कर घटना की आलोचना की।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कार्यालय और एसओजी कार्यालय में दोनों किसान नेताओं के साथ थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया गया।
अतुल प्रधान ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोपों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और जांच के बाद जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
पहले भी विवादों में रही मेरठ पुलिस
मेरठ पुलिस की कार्रवाई को लेकर इससे पहले भी सवाल उठ चुके हैं। ललिता गौतम हत्याकांड से जुड़े प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई विवादों में आई थी।
उस समय तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडे का प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर मारपीट करते हुए वीडियो सामने आने की बात कही गई थी।
बताया जा रहा है कि इसी पुराने विवाद को लेकर दोनों किसान नेता बुधवार को एसएसपी से बातचीत करने पहुंचे थे। इसके बाद उनके साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया।
फिलहाल आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है और पूरे प्रकरण की जांच डीआईजी सहारनपुर अभिषेक सिंह कर रहे हैं।
जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
पुलिस और प्रशासन की ओर से जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

