जोधपुर से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां दो युवतियों को सोशल मीडिया के जरिए फर्जी पहचान बनाकर संपर्क में लेने और उन्हें दूसरे स्थान पर ले जाने की कोशिश के आरोप लगाए जा रहे हैं।
मामले में ‘लव जिहाद’ के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों और युवतियों को लाखों रुपये में बेचने की कथित योजना की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और मानव तस्करी के एंगल से भी तथ्यों को खंगाला जा रहा है।
सोशल मीडिया के जरिए बढ़ाई नजदीकियां
जानकारी के मुताबिक, आरोप है कि आकिब अंसारी और सैयद इब्राहिम ने सोशल मीडिया पर हिंदू नामों से अकाउंट बनाए थे।
इन्हीं अकाउंट्स के जरिए दोनों ने जोधपुर की दो युवतियों से संपर्क किया।
शुरुआत में दोनों के बीच दोस्ती हुई और धीरे-धीरे बातचीत बढ़ने का दावा किया गया। इसके बाद आरोपियों ने युवतियों को अपने साथ ले जाने की कोशिश की।
मामला उस समय सामने आया, जब युवतियों के परिवारों को उनके घर से जाने की जानकारी मिली।
परिवारों ने उनकी तलाश शुरू की और इस दौरान पुलिस को भी मामले की जानकारी दी गई।
तलाश के दौरान अहमदाबाद रेलवे स्टेशन पर दोनों युवतियों को कथित तौर पर आरोपियों के साथ पकड़े जाने की बात सामने आई है।
लाखों रुपये में बेचने की योजना
पूछताछ के दौरान कथित तौर पर यह दावा सामने आया कि युवतियों को लाखों रुपये में बेचने की योजना बनाई गई थी।
कुछ दावों में यह रकम 8 से 10 लाख रुपये बताई जा रही है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में युवतियों को कहां ले जाने की योजना थी और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे।
इस मामले में यह भी जांच का विषय है कि क्या युवतियों से संपर्क करने के लिए जानबूझकर फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया गया था या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।
पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर मामले से जुड़े तथ्यों और संभावित संपर्कों की जानकारी जुटाने में लगी है।
मानव तस्करी के एंगल से जांच
मामले में पुलिस मानव तस्करी के एंगल से भी जांच कर रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि युवतियों को आखिर कहां ले जाने की योजना थी,
क्या उन्हें किसी अन्य व्यक्ति या समूह को सौंपने की तैयारी थी और क्या इस पूरे मामले में कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है।
जांच एजेंसियां सोशल मीडिया अकाउंट, बातचीत और आरोपियों के संपर्कों से जुड़े पहलुओं को भी खंगाल सकती हैं।
यदि जांच में मानव तस्करी या किसी अन्य अपराध से जुड़े ठोस सबूत सामने आते हैं, तो उसके आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
पहले भी सामने आए ऐसे दावे
मामले को लेकर कुछ दावों में यह भी कहा जा रहा है कि पहले भी इसी तरह लड़कियों को दूसरे स्थानों पर ले जाने की कोशिश की गई थी।
हालांकि, इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल पुलिस जांच के निष्कर्षों का इंतजार करना जरूरी है।
वहीं, ‘लव जिहाद’ जैसे आरोपों को लेकर भी पुलिस जांच में यह स्पष्ट करना अहम होगा कि क्या युवतियों को उनकी पहचान छिपाकर जानबूझकर निशाना बनाया गया था।
किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उपलब्ध सबूतों और जांच के तथ्यों को देखना जरूरी है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
फिलहाल इस पूरे मामले में कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि युवतियों को
दूसरे स्थान पर ले जाने के पीछे वास्तविक मकसद क्या था और क्या इसके पीछे किसी संगठित गिरोह की भूमिका थी। पुलिस की जांच इन सवालों के जवाब तलाशने में जुटी है।
अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो फर्जी पहचान के जरिए युवतियों को अपने जाल में फंसाने, उन्हें कहीं ले जाने या बेचने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जरूरी होगी।
साथ ही, सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से संपर्क करते समय युवाओं और परिवारों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।
फिलहाल मामले की पूरी तस्वीर पुलिस जांच और सामने आने वाले सबूतों के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

