Monday, August 24, 2026

सहरसा में राष्ट्रीय जलीय जीव गांगेय डॉल्फिन की हत्या, तेल निकालने के लिए मछुवारे ने ली जान

डॉल्फिन

मछली के जाल में फंसी डॉल्फिन, चेतावनी के बावजूद मारी

बिहार के सहरसा जिले में मछली पकड़ने के दौरान एक गांगेय डॉल्फिन मछुवारे के जाल में फंस गई। आरोप है कि वीरेंद्र नाम के मछुवारे ने डॉल्फिन को बचाने के बजाय मार दिया, क्योंकि वह उसके शरीर से तेल निकालना चाहता था।

घटना के दौरान मौजूद एक व्यक्ति वीडियो बनाते हुए वीरेंद्र को लगातार समझाता रहा कि गांगेय डॉल्फिन को मारना गंभीर, गैरकानूनी और दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद डॉल्फिन की जान ले ली गई। गांगेय डॉल्फिन भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव है।

महिषी ब्लॉक के टेरार गांव का निवासी है वीरेंद्र

वीरेंद्र सहरसा जिले के महिषी ब्लॉक स्थित टेरार गांव का रहने वाला बताया गया है। यह क्षेत्र कोसी और गंगा नदी के कछार के आसपास पड़ता है। इस इलाके में बहने वाली नदियों में गांगेय डॉल्फिन जैसे दुर्लभ जलीय जीव अक्सर दिखाई देते हैं।

नदी तंत्र में डॉल्फिन की मौजूदगी के कारण इस क्षेत्र में इनके संरक्षण का महत्व और बढ़ जाता है। इसके बावजूद गंगा और उससे जुड़े नदी क्षेत्रों में डॉल्फिन के अवैध शिकार की घटनियां सामने आती रही हैं, जिनके पीछे एक प्रमुख कारण इसका तेल है।

कानून में बाघ और शेर जैसी सर्वोच्च सुरक्षा

Wildlife Protection Act, 1972 के तहत गांगेय डॉल्फिन को Schedule I में रखा गया है। इस श्रेणी में शामिल वन्यजीवों को देश में सर्वोच्च स्तर की कानूनी सुरक्षा प्राप्त होती है। डॉल्फिन को भी बाघ और शेर जैसे संरक्षित जीवों के समान कानूनी संरक्षण मिला है।

इस कानूनी स्थिति के बावजूद कुछ मछुवारे गंगा और आसपास की नदियों में डॉल्फिन का अवैध शिकार करते हैं। इसके शरीर से निकाले जाने वाले तेल की स्थानीय स्तर पर मांग इस शिकार की सबसे बड़ी वजहों में शामिल मानी जाती है।

Blubber से निकाला जाता है डॉल्फिन का तेल

डॉल्फिन की त्वचा के नीचे वसा की एक मोटी परत होती है, जिसे Blubber कहा जाता है। अवैध शिकार करने वाले लोग इसी वसा से तेल निकालते हैं। इस तेल की तीव्र गंध पानी में फैलती है और मछलियों को आकर्षित करने का काम करती है।

विशेष रूप से कैटफिश इस गंध की ओर आकर्षित होती हैं। इसी कारण कुछ स्थानीय मछुआरे डॉल्फिन के तेल का उपयोग मछलियों को जाल के पास खींचने के लिए करते हैं, जिससे उनके लिए बड़ी संख्या में मछलियां पकड़ना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है।

औषधीय गुणों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रांतियां

ग्रामीण इलाकों में डॉल्फिन के तेल को लेकर कई तरह की पारंपरिक धारणाएं भी प्रचलित हैं। कुछ लोग मानते हैं कि इस तेल से मालिश करने पर गठिया, जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों में राहत मिल सकती है।

डॉल्फिन के तेल से इन रोगों के उपचार या किसी चिकित्सकीय लाभ का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद ऐसी मान्यताएं इसके अवैध इस्तेमाल और मांग को बढ़ावा देती हैं, जिससे पहले से संरक्षित गांगेय डॉल्फिन के अस्तित्व पर अतिरिक्त खतरा पैदा होता है।

डॉल्फिन तेल का व्यापार और औषधीय इस्तेमाल गैरकानूनी

गांगेय डॉल्फिन को मारकर उसके शरीर से तेल निकालना ही नहीं, बल्कि उसके तेल का किसी प्रकार का व्यावसायिक या औषधीय उपयोग भी पूरी तरह गैरकानूनी है। कानून राष्ट्रीय जलीय जीव को शिकार, व्यापार और अन्य प्रकार के अवैध दोहन से संरक्षण देता है।

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Mudit
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लेखक भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर लेखन कर रहे हैं। समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास पर रिसर्च बेस्ड विश्लेषण में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। उनके शोधपरक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।
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