Thursday, April 16, 2026

चित्रकूट गैंगरेप: इंसाफ न मिलने पर नाबालिग ने की आत्महत्या, जानें होली के दिन हुई उस दरिंदगी का पूरा सच

चित्रकूट गैंगरेप: उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने मानवीय संवेदनाओं और पुलिस की कार्यशैली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। एक 16 वर्षीय दलित नाबालिग छात्रा ने गैंगरेप के आरोपों के बीच करीब 40 दिनों तक मानसिक संताप झेलने के बाद आत्महत्या कर ली। इस घटना ने न केवल गांव में तनाव पैदा कर दिया है, बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी उबाल ला दिया है।

होली के दिन की खौफनाक घटना

चित्रकूट गैंगरेप: पीड़िता के पिता के अनुसार, घटना की शुरुआत 4 मार्च 2026 को होली के दिन हुई थी। छात्रा कुएं पर पानी भरने गई थी, तभी गांव के ही तीन नाबालिग लड़कों ने उसे कथित तौर पर बंधक बना लिया।

आरोप है कि लड़कों ने उसके मुंह में कपड़ा ठूंसकर खेत में ले जाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।

जब छात्रा का छोटा भाई उसे ढूंढने निकला, तो उसने मंदिर की ऊंचाई से देखा कि तीन लड़के उसकी बहन को घेरे हुए थे, जो उसे देखकर भाग निकले।

घर लौटकर पीड़िता ने अपनी आपबीती सुनाई, जिसके बाद न्याय की गुहार लगाने का सिलसिला शुरू हुआ।

पुलिस की भूमिका और समझौते का विवाद

6 मार्च 2026 को परिवार पुलिस के पास पहुंचा, लेकिन यहां से मामला पेचीदा हो गया। पुलिस रिकॉर्ड (जीडी) के अनुसार, उस समय परिवार ने लिखित रूप में कोई मुकदमा दर्ज न कराने की बात कही थी।

चित्रकूट पुलिस ने एक वीडियो साक्ष्य भी जारी किया है, जिसमें पीड़िता और उसके माता-पिता रंग लगाने के विवाद की बात कह रहे हैं और कार्रवाई न करने की सहमति दे रहे हैं।

हालांकि, अब पीड़िता की मां का आरोप है कि पुलिस ने उन पर दबाव बनाया था। मां के अनुसार, पुलिस ने उन्हें डराया कि केस करने से बेटियों की शादी में दिक्कत आएगी और बदनामी होगी, इसी डर और दबाव में उन्होंने लिखित समझौता किया।

40 दिनों की ख़ामोशी के बाद मौत

समझौते के बाद करीब 40 दिन बीत गए। इस दौरान पुलिस का दावा है कि उन्होंने फॉलोअप किया था, जबकि परिवार का आरोप है कि आरोपियों को पुलिस ने हिरासत में लेकर छोड़ दिया था।

14 अप्रैल 2026 की रात, जब परिवार के अन्य सदस्य खेतों में काम करने गए थे, पीड़िता ने घर में फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।

आत्महत्या से पहले उसने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा, जिसमें अपनी पीड़ा व्यक्त की थी। उसकी मौत के बाद पुलिस ने आनन-फानन में तीनों नाबालिग आरोपियों के खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो और SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।

पीड़िता की डायरी में मिला अफेयर का एंगल

चित्रकूट गैंगरेप: जांच के दौरान पुलिस को छात्रा की एक निजी डायरी मिली है, जिसमें प्रेम और विरह से जुड़ी कुछ शायरियां और बातें लिखी गई हैं।

डायरी में अदालत इश्क की होगी और हम तुम्हारे अमीरी पर नहीं मरते जैसे वाक्य लिखे हैं।

इन पन्नों के आधार पर पुलिस अब इस दृष्टिकोण से भी जांच कर रही है कि क्या मामला किसी निजी प्रेम संबंध या उससे जुड़े तनाव का था।

हालांकि, पीड़िता की बहन और मां इन दावों को नकारते हुए केवल आरोपियों के लिए फांसी की सजा की मांग कर रहे हैं।

राजनीतिक घमासान और अखिलेश यादव के आरोप

इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर सरकार को घेरा।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राज में दलित बेटियों को न्याय नहीं मिल रहा है, जिसके कारण उन्हें मौत को गले लगाना पड़ रहा है।

अखिलेश यादव ने पीड़ित पिता से फोन पर बात कर हर संभव मदद का आश्वासन भी दिया।

दूसरी ओर, सरकार और पुलिस प्रशासन का तर्क है कि सपा प्रमुख मामले को राजनीतिक रंग देने और जातिगत आधार पर समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि शुरुआती जांच में परिवार ने खुद कार्रवाई से मना किया था।

व्यवस्था की विफलता या सामाजिक दबाव?

चित्रकूट गैंगरेप: चित्रकूट की यह घटना कई परतों में लिपटी है। एक तरफ पुलिस के पास मौजूद वीडियो और लिखित दस्तावेज हैं, तो दूसरी तरफ एक मां की चीख है जो व्यवस्था पर मिलीभगत का आरोप लगा रही है।

सवाल यह है कि क्या एक नाबालिग के साथ हुए अपराध में पुलिस को समझौते का इंतजार करना चाहिए था? क्या सामाजिक लोकलाज का डर इतना बड़ा हो गया कि एक बेटी को न्याय के बजाय मौत चुननी पड़ी?

फिलहाल, पुलिस की टीमें आरोपियों की तलाश में जुटी हैं और पूरा प्रदेश इस मामले में निष्पक्ष न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है।

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