कांग्रेस को मज़हबियों से इतनी हमदर्दी क्यों: अमरावती से सामने आया मामला किसी भी सभ्य समाज के लिए एक गहरा घाव है।
मोहम्मद अयान अहमद तनवीर नामक युवक ने डिजिटल माध्यमों और धोखे का सहारा लेकर 180 से अधिक लड़कियों को अपनी हवस और साजिश का शिकार बनाया।
आरोपी ने न केवल 350 से ज्यादा अश्लील वीडियो बनाए, बल्कि उनमें से 100 वीडियो को सार्वजनिक कर उन लड़कियों के मान-सम्मान को सरेबाज़ार नीलाम कर दिया।
यह मामला महिला सुरक्षा के दावों की पोल खोलता है और तकनीक के दुरुपयोग की एक डरावनी तस्वीर पेश करता है।
रक्षक ही जब भक्षक की भाषा बोले
कांग्रेस को मज़हबियों से इतनी हमदर्दी क्यों: इस अत्यंत संवेदनशील मामले में जहां अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और पीड़िताओं को मानसिक संबल देने की जरूरत थी, वहीं कांग्रेस नेत्री यशोमती ठाकुर ने पीड़ित लड़कियों की अक्ल पर ही सवाल उठा दिए।
उन्होंने कहा, क्या लड़कियों में बुद्धि नहीं है? गौर करने वाली बात यह है कि यशोमती ठाकुर 2019 से 2022 तक महिला एवं बाल विकास मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर रह चुकी हैं।
जिस पद की जिम्मेदारी महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों का संरक्षण था, उस पर बैठी रहीं नेत्री का यह लेक्चर समाज की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
कांग्रेस का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड
यह पहला अवसर नहीं है जब कांग्रेस के नेताओं ने अपराध के लिए अपराधी के बजाय पीड़िता को ही कटघरे में खड़ा किया हो।
इतिहास गवाह है कि जब-जब महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराध हुए, कांग्रेस के कई दिग्गजों की जुबान फिसली या उन्होंने अपनी पितृसत्तात्मक सोच का प्रदर्शन किया।
केआर रमेश कुमार: कर्नाटक के पूर्व स्पीकर का वह बयान कि “जब रेप होना ही है, तो लेटो और मजे लो” आज भी राजनीति के सबसे निचले स्तर की याद दिलाता है।
मुल्लापल्ली रामचंद्रन: केरल कांग्रेस के नेता का यह कहना कि “रेप पीड़िता को आत्महत्या कर लेनी चाहिए,” संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।
फूल सिंह बरैया: लड़कियों की खूबसूरती पर टिप्पणी कर अपराध को सामान्य बताने की कोशिश करना उनकी मानसिकता को उजागर करता है।
हाथरस से अमरावती तक
कांग्रेस को मज़हबियों से इतनी हमदर्दी क्यों: राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा अक्सर महिला सुरक्षा के मुद्दों पर सक्रिय नजर आते हैं, लेकिन अमरावती जैसे मामलों में पार्टी की चुप्पी और यशोमती ठाकुर जैसे नेताओं के बयान उनके दावों पर सवालिया निशान लगाते हैं।
हाथरस मामले के समय कार में हंसी-मजाक करते हुए जाने वाले वायरल वीडियो ने पहले ही यह बहस छेड़ दी थी कि क्या कांग्रेस के लिए ये मुद्दे केवल फोटो-ऑप और पॉलिटिकल टूरिज्म का जरिया हैं?
जब अपनी ही पार्टी की महिला नेता पीड़ितों को अपमानित करती हैं, तब केंद्रीय नेतृत्व की खामोशी इस मानसिकता को मौन समर्थन देती प्रतीत होती है।
अपराधियों के बढ़ते हौसले
जब सत्ता या विपक्ष में बैठे जिम्मेदार नेता पीड़ितों को ही उनके साथ हुए अपराध का जिम्मेदार ठहराने लगते हैं, तो इसका सीधा लाभ अपराधियों को मिलता है।
इससे समाज में एक गलत संदेश जाता है कि दोष पीड़ित का है, जिससे अपराधी बेखौफ हो जाते हैं।
यशोमती ठाकुर जैसा बयान न केवल उन 180 लड़कियों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट करने वाली लड़कियों का मनोबल तोड़ने वाला भी है।
राजनीति से ऊपर उठने की जरूरत
कांग्रेस को मज़हबियों से इतनी हमदर्दी क्यों: अमरावती का मामला महज एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह हमारे राजनीतिक वर्ग के नैतिक पतन की भी कहानी है।
महिला सुरक्षा केवल नारों और मंत्रालयों से सुनिश्चित नहीं हो सकती, इसके लिए एक संवेदनशील सोच की आवश्यकता है।
कांग्रेस को यह समझना होगा कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन महिलाओं के सम्मान की बलि चढ़ाकर की गई बयानबाजी समाज को गर्त में ले जाती है। जब तक विक्टिम ब्लेमिंग की यह परिपाटी खत्म नहीं होगी, तब तक न्याय की कल्पना अधूरी है।
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