Wednesday, April 15, 2026

ईरान पर किस देश का कर्ज, जानिए किन देशों से लिया उधार

ईरान पर किस देश का कर्ज: मिडिल ईस्ट में इस साल की शुरुआत से ही भू-राजनीतिक तनाव एक बड़े वैश्विक संकट के रूप में उभरकर सामने आया है।

खास तौर पर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने पूरी दुनिया को चिंतित कर दिया है।

फरवरी से शुरू हुए इस तनाव ने न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित किया, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी गहरा असर डाला है।

हालांकि हाल के समय में अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी सीजफायर लागू होने से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं कहे जा सकते।

मिडिल ईस्ट तनाव और वैश्विक असर

इस पूरे संकट का सबसे बड़ा प्रभाव ऊर्जा बाजार पर देखने को मिला है। दुनिया के कई देशों की तेल और गैस आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होती है, जो ईरान के नियंत्रण वाले क्षेत्र के बेहद करीब स्थित है।

इस रणनीतिक मार्ग पर तनाव बढ़ने से कई देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ीं और सप्लाई चेन बाधित हुई। एशिया और यूरोप के कई देशों को वैकल्पिक रास्तों की तलाश करनी पड़ी, जिससे लागत और बढ़ गई।

ईरान की अर्थव्यवस्था: संकट के बीच स्थिरता

राजनीतिक और सैन्य तनाव के बावजूद ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद देश ने अपने आर्थिक ढांचे को कुछ हद तक संतुलित बनाए रखा है।

मार्च 2025 तक ईरान के चालू खाते में 13.2 अरब डॉलर का अधिशेष दर्ज किया गया, जो यह दिखाता है कि निर्यात, खासकर तेल और पेट्रोकेमिकल सेक्टर, अभी भी देश की आर्थिक रीढ़ बने हुए हैं।

इसके अलावा, विदेशी निवेश के आंकड़ों में भी कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं। दिसंबर 2021 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में लगभग 838 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

यही नहीं, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश और विदेशों में ईरान के निवेश में भी वृद्धि देखी गई है, जो यह दर्शाता है कि देश पूरी तरह आर्थिक अलगाव में नहीं है।

ईरान का बाहरी कर्ज: आश्चर्यजनक रूप से कम

ईरान के केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2025 तक देश का कुल बाहरी कर्ज लगभग 4.9 अरब डॉलर रहा।

यह आंकड़ा 2024 के 5.0 अरब डॉलर से थोड़ा कम है, यानी पिछले एक साल में इसमें मामूली गिरावट आई है। दिलचस्प बात यह है कि यह स्तर पिछले कई दशकों में सबसे कम माना जा रहा है।

अगर इतिहास पर नजर डालें तो 2008 में ईरान का बाहरी कर्ज करीब 28.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया था।

इसके मुकाबले मौजूदा कर्ज काफी कम है, जो यह दर्शाता है कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय कर्ज पर अपनी निर्भरता घटा दी है।

किस देश का सबसे ज्यादा कर्ज?

ईरान की एक खास बात यह है कि उसका कर्ज किसी एक देश पर केंद्रित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध के कारण पश्चिमी देशों से कर्ज मिलना लंबे समय से सीमित रहा है।

ऐसे में ईरान ने अपनी वित्तीय रणनीति को बदलते हुए मुख्य रूप से एशियाई और क्षेत्रीय साझेदारों से सीमित स्तर पर उधार लिया है।

यही वजह है कि ईरान पर किसी एक देश का अत्यधिक आर्थिक दबाव नहीं है। अगर भविष्य में राजनीतिक बदलाव भी होता है, तो किसी एक देश को बड़ा आर्थिक नुकसान होने की संभावना कम मानी जाती है।

जीडीपी और आर्थिक संकेतक

जून 2025 में ईरान की जीडीपी का अनुमान लगभग 119.7 अरब डॉलर लगाया गया था। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारी प्रतिबंधों, राजनीतिक तनाव और वैश्विक दबाव के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमराई नहीं है।

ईरान की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा घरेलू उत्पादन और ऊर्जा निर्यात पर आधारित है। यही कारण है कि बाहरी दबावों के बावजूद देश अपने आर्थिक संतुलन को बनाए रखने में सफल रहा है।

फिलहाल दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत पर टिकी हैं। यदि यह वार्ता सफल होती है और स्थायी शांति स्थापित होती है, तो न केवल मिडिल ईस्ट बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है।

ऊर्जा बाजार में स्थिरता आएगी, तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव कम होगा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार फिर से पटरी पर लौट सकता है। लेकिन अगर तनाव दोबारा बढ़ता है, तो इसका असर और भी व्यापक हो सकता है।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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