सम्राट चौधरी की शपथ कुंडली
पटना, 15 अप्रैल 2026, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज पटना के लोकभवन में प्रातः 10:59 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। ज्योतिष की दृष्टि से यह शपथ-मुहूर्त अत्यंत महत्त्वपूर्ण और विचारणीय है। वैशाख कृष्ण त्रयोदशी, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र और ब्रह्म योग के संयोग में ग्रहण की गई यह शपथ एक दीर्घकालीन और स्थिर सरकार का संकेत दे रही है।
शपथ ग्रहण कुंडली
शपथ ग्रहण के समय की कुंडली मिथुन लग्न की है। इस कुंडली में लग्न भाव में सप्तमेश और दशमेश बृहस्पति विराजमान हैं, जो स्वयं में एक उच्च राजयोग की स्थिति है।

वहीं लग्नेश और चतुर्थेश बुध नीच का होकर दशम भाव में स्थित हैं। किंतु विशेष बात यह है कि लग्न और दशम भाव के बीच बुध-गुरु का स्थान परिवर्तन हो रहा है, जो नीचभंग राजयोग की सृष्टि करता है।
दशम भाव में सात भावों का असाधारण संकेन्द्रण
दशम भाव में बुध के साथ चन्द्र, मंगल और शनि भी उपस्थित हैं। इस प्रकार लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, षष्ठ, अष्टम, नवम और एकादश, कुल सात भावों की ऊर्जा और शक्ति दशम भाव में केन्द्रित हो गई है।
ज्योतिष में दशम भाव राज्य, कर्म और शासन का प्रतिनिधि भाव है। जब कुंडली के सात भावों का संबंध एक साथ दशम से बनता है और साथ ही लग्न-दशम का स्थान परिवर्तन भी हो, तो यह एक असाधारण रूप से बलशाली राजयोग बन जाता है। इससे स्पष्ट है कि सम्राट चौधरी की सरकार पूर्ण प्रभुत्व के साथ संचालित होगी।
गठबंधन में वर्चस्व: सहयोगियों पर पकड़
कुंडली में सप्तमेश गुरु का लग्न में होना यह दर्शाता है कि सभी सहयोगी दल और राजनीतिक साझेदार सम्राट चौधरी के नेतृत्व में चलेंगे। जैसा कि व्यावहारिक रूप से देखा भी जा रहा है, नीतीश कुमार के पूर्ण समर्थन से जेडीयू के भीतर से भी किसी प्रकार का विरोध संभव नहीं लग रहा।
नीच के लग्नेश बुध से कुछ बाधा की आशंका थी, परंतु गुरु की लग्न में उपस्थिति ने उस बाधा को निष्प्रभावी कर लग्न की शुभता को और अधिक सुदृढ़ कर दिया है। अगले चुनाव तक इस सरकार पर किसी प्रकार के संकट की कोई ज्योतिषीय संभावना नहीं बनती।
प्रबल राजयोग: उच्च का सूर्य और निवेश की संभावनाएँ
तृतीयेश सूर्य एकादश भाव में उच्च के हैं, और शपथ से ठीक एक दिन पूर्व मेष संक्रांति होने के कारण सूर्य अनेक वर्ग कुंडलियों में उच्च और वर्गोत्तम हो रहे हैं। यह स्थिति एक प्रबल राजयोग का निर्माण करती है।
भावचलित कुंडली में यही सूर्य दशम भाव में आकर यह संकेत देते हैं कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार में बड़े पैमाने पर निवेश आएगा। यद्यपि प्रतिद्वंद्वी इसमें बाधा डालने का प्रयास करेंगे, परंतु अंततः वे निवेश आकर्षित करने में सफल रहेंगे।
बिहार की जीडीपी और लोकप्रियता में वृद्धि

धनेश चन्द्रमा की शुभ स्थिति यह इंगित करती है कि बिहार सरकार की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और राज्य की जीडीपी में सकारात्मक प्रगति देखने को मिलेगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की जन-लोकप्रियता भी निरंतर बढ़ती रहेगी।
निष्कर्ष: बिहार के लिए शुभ संकेत
कुल मिलाकर, 15 अप्रैल 2026 को प्रातः 10:59 बजे ली गई शपथ की यह कुंडली अत्यंत शुभ और बलशाली है। मिथुन लग्न में गुरु की उपस्थिति, सात भावों का दशम में संकेन्द्रण, उच्च का वर्गोत्तम सूर्य और बुध-गुरु का स्थान परिवर्तन, ये सभी योग मिलकर एक दीर्घस्थायी, स्थिर और विकासोन्मुख सरकार का चित्र प्रस्तुत करते हैं।
ज्योतिष की भाषा में कहें तो, सम्राट चौधरी का शासन न केवल सत्ता में बना रहेगा, बल्कि बिहार के इतिहास में एक उल्लेखनीय विकास-काल के रूप में अंकित होगा।
— ज्योतिषाचार्य मुदित

