मृदुल कांत शास्त्री
वृंदावन के भागवत प्रवक्ता मृदुल कांत शास्त्री इन दिनों एक विवाद के केंद्र में हैं। उन्होंने एक वाहन चालक की गाड़ी की चाबी छीनी और मामले को इतना तूल दिया कि महिलाओं और बच्चों तक को पुलिस थाने की हवा खानी पड़ी।
इस पूरे प्रकरण में शास्त्री ने खुद को पीड़ित बताते हुए वृंदावनवासियों को नपुंसक तक कह डाला और धमकी दी कि वे अब वृंदावन के लिए कोई काम नहीं करेंगे। लेकिन अब जो तथ्य सामने आए हैं वे इस पूरे प्रकरण की दिशा ही बदल देते हैं।
यह खुलासे अकाट्य सत्य समाचार के संपादक और खोजी पत्रकार हिमांशु सिंह ऑथोरिटेटिव ने किए हैं।

खुद 6 चालान के साथ दूसरों को दे रहे थे ट्रैफिक का पाठ
वाहन नंबर UP85CQ2789 पर कुल 6 चालान लंबित पाए गए हैं, जिनमें से कुछ कोर्ट में विचाराधीन हैं। यह वही गाड़ी बताई जा रही है जिसे लेकर शास्त्री जी ने विवाद खड़ा किया था। अब इन चालानों की फेहरिस्त देखें तो हकीकत खुद बोलने लगती है।
पहला चालान 28 सितंबर 2024 को राजस्थान में खतरनाक तरीके से वाहन चलाने यानी DRIVING DANGEROUSLY के लिए काटा गया, जिसकी राशि 1,000 रुपये है।
दूसरा चालान 2 मई 2025 को हरियाणा में तय गति सीमा से तेज या धीमे वाहन चलाने पर 2,000 रुपये का जारी हुआ।

कोर्ट में लंबित 4 मामले, गंभीर उल्लंघन शामिल
तीसरा चालान 17 जनवरी 2025 को राजस्थान में अत्यधिक गति से वाहन चलाने यानी DRIVING AT EXCESS SPEED पर 1,000 रुपये का है और यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
चौथा चालान 30 अप्रैल 2025 को उत्तर प्रदेश में गति सीमा के उल्लंघन पर 2,000 रुपये का कटा है, यह भी कोर्ट में लंबित है।
पाँचवाँ चालान 10 मई 2025 को हरियाणा में फिर से गति सीमा उल्लंघन पर 2,000 रुपये का है और यह भी न्यायालय में है।

छठा और अंतिम चालान 12 जनवरी 2026 को दिल्ली में अनुचित और बाधक पार्किंग यानी IMPROPER OR OBSTRUCTIVE PARKING पर 500 रुपये का काटा गया है, यह मामला भी कोर्ट में लंबित है।
यानि मृदुल कांत शास्त्री ने खतरनाक तरीके से वाहन चलाना, तय गति सीमा से अधिक गति से वाहन चलाना, पार्किंग में गाड़ी खड़ी न करना जैसे अनेक यातायात अपराध लगातार किए हैं।
इस पर लोगों का कहना है कि खुद की गाड़ी किसी दूसरी गाड़ी से हल्की सी अड़ गई तो गुंडागर्दी पर उतरते हुए वाहनचालक की चाभी छीनकर कानून हाथ में लेने का अपराध क्यों किया।
राजस्थान से दिल्ली तक, हर राज्य में नियम तोड़े
इन छह चालानों में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये केवल एक राज्य में नहीं बल्कि राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली, चार अलग-अलग राज्यों में काटे गए हैं।
यानी जहाँ भी गए, ट्रैफिक नियमों की धज्जियाँ उड़ाते गए। खतरनाक ड्राइविंग, बार-बार स्पीड का उल्लंघन और गलत पार्किंग, हर तरह का उल्लंघन इस सूची में दर्ज है।
कुल बकाया चालान राशि 8,500 रुपये से अधिक है और चार मामले अभी भी अदालत में विचाराधीन हैं। जो व्यक्ति दूसरों की गाड़ी की चाबी छीनकर खुद को ट्रैफिक का रखवाला समझ रहा था, उसी की गाड़ी पर खतरनाक ड्राइविंग का चालान मौजूद है।
चाबी छीनी, थप्पड़ मारा, महिलाओं को जेल भिजवाया और ऊपर से नसीहत भी
यह वही शास्त्री हैं जिन्होंने वृंदावन में एक वाहन चालक की गाड़ी की चाबी जबरन खींच ली। यह भी दावा किया जा रहा है कि थप्पड़ मारने की शुरुआत स्वयं उनकी ओर से हुई थी।
इस विवाद को इस कदर बढ़ाया गया कि महिलाओं और बच्चों तक को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
इस घटना के बाद उन्होंने मीडिया पर समस्त वृंदावनवासियों को नपुंसक कह डाला और घोषणा की कि वे वृंदावन के लिए काम करना बंद कर देंगे।
जिन बृजवासियों ने उनकी घटना के बाद उनके साथ खड़े होकर समर्थन दिया, उन्हीं को उन्होंने अपमानित किया। जब बांकेबिहारी व्यापार एसोसिएशन वृंदावन के अध्यक्ष शिवा प्रधान ने वृंदावन वासियों के अपमान का मामला उठाया तो मृदुल कांत शास्त्री को माफी मांगनी पड़ी, पर वहां भी किंतु परन्तु करते रहे।
प्रवचन में धर्म का पाठ, सड़क पर नियमों की अनदेखी
धर्म और आचरण का पाठ पढ़ाने वाले इस प्रवक्ता की असलियत उनकी अपनी गाड़ी के चालान रिकॉर्ड से सामने आ गई है।
एक ओर मंच से सदाचार और संयम की बात, दूसरी ओर सड़क पर खतरनाक ड्राइविंग और बार-बार स्पीड का उल्लंघन। यह दोहरापन अब दस्तावेजों में दर्ज है।
जो व्यक्ति दूसरों की गाड़ी चलाने के तरीके पर आपत्ति जताते हुए सड़क पर हंगामा खड़ा कर दे और उसी की अपनी गाड़ी पर चार राज्यों में छह चालान पेंडिंग हों, उस पर धर्म और अनुशासन की बात करने का नैतिक अधिकार कितना बचता है, यह प्रश्न अब वृंदावन की गलियों से निकलकर पूरे देश में गूँज रहा है।
मृदुलकांत शास्त्री का वृंदावन में विरोध, वृंदावन वासियों को कहा नपुंसक, महिलाओं से गाली गलौच का आरोप

