टीएमसी में बढ़ा विवाद
तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे राजनीतिक टकराव के बीच बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के बेटे बैद्यनाथ घोष दस्तीदार ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को कानूनी नोटिस भेजकर विवाद को नया मोड़ दे दिया है।
बारासात टिकट को लेकर लगाए गए दावों पर आपत्ति
बैद्यनाथ घोष दस्तीदार ने उन दावों को गलत बताया है, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने बारासात विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए पार्टी से विधायक टिकट मांगा था। उन्होंने ऐसे बयानों को झूठा, भ्रामक और मानहानिकारक बताया है।
पेशे से मनोचिकित्सक बैद्यनाथ घोष दस्तीदार की ओर से भेजे गए नोटिस में ममता बनर्जी के साथ महुआ मोइत्रा, कल्याण बनर्जी, सौगत रॉय और सोनाली गुहा सहित टीएमसी के कई नेताओं को पक्षकार बनाया गया है।
महुआ मोइत्रा के बयान पर बैद्यनाथ की कड़ी प्रतिक्रिया
रविवार सुबह बैद्यनाथ ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा पर आरोप लगाया कि उन्होंने झूठा दावा किया कि उनकी मां काकोली घोष दस्तीदार उनके लिए विधायक टिकट मांग रही थीं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों में परिवार के निजी सदस्यों को नहीं घसीटना चाहिए।
बैद्यनाथ ने अपने बयान में इसे सौ प्रतिशत झूठ बताया और स्पष्ट किया कि असहमति का जवाब राजनीतिक तरीके से दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपने कानूनी अधिकार सुरक्षित रखते हैं और इस मामले में आगे कार्रवाई कर सकते हैं।
टीएमसी के भीतर आंतरिक संकट के बीच मामला गरमाया
यह कानूनी नोटिस ऐसे समय सामने आया है, जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर आंतरिक संकट गहराया हुआ है। काकोली घोष दस्तीदार संसद में पार्टी सांसदों के बीच उठे असंतोष और बगावत के प्रमुख चेहरों में शामिल मानी जा रही हैं।
नोटिस का विषय डॉ बैद्यनाथ घोष दस्तीदार के खिलाफ झूठे, मानहानिकारक और अनावश्यक संदर्भों को रोकने से जुड़ा है। इसमें कहा गया है कि उनके बारे में सार्वजनिक तौर पर गलत संकेत और आरोप लगाए गए हैं।
नोटिस में बैद्यनाथ की पेशेवर पहचान का उल्लेख
कानूनी दस्तावेज में बैद्यनाथ घोष दस्तीदार को एक उच्च शिक्षित मनोचिकित्सक बताया गया है। इसमें कहा गया है कि उन्होंने मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, बोस्टन और लंदन की सेंट्रल एंड नॉर्थ वेस्ट लंदन एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट से पेशेवर जुड़ाव और प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि बैद्यनाथ अकादमिक उत्कृष्टता, पेशेवर ईमानदारी और सार्वजनिक सम्मान की प्रतिष्ठा रखते हैं। उनके अनुसार राजनीतिक विवाद के बीच उनके नाम को गलत तरीके से जोड़ना उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है।
आईपैक से संपर्क का दावा
नोटिस में कहा गया है कि कई मौकों पर यह संकेत दिया गया कि बैद्यनाथ ने बारासात विधानसभा क्षेत्र से राजनीतिक नामांकन या टिकट मांगा था। यह भी कहा गया कि टिकट नहीं मिलने के बाद उनकी मां ने टीएमसी सांसदों में बगावत शुरू की।
बैद्यनाथ ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने टिकट नहीं मांगा था। उनके अनुसार टीएमसी के साथ काम कर चुकी राजनीतिक परामर्श कंपनी आईपैक के प्रतिनिधियों ने उनसे संपर्क किया और बारासात से चुनाव लड़ने पर विचार करने का अनुरोध किया।
नोटिस में दावा किया गया है कि बैद्यनाथ के निर्देशों के अनुसार उस समय बारासात जिला टीएमसीपी से जुड़े सोहम पाल ने उनसे व्हाट्सऐप के माध्यम से कई बार संपर्क किया और उन्हें चुनाव लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
पंद्रह दिन में माफी और स्पष्टीकरण की मांग
कानूनी नोटिस में जिन नेताओं को संबोधित किया गया है, उनसे बैद्यनाथ के संबंध में दिए गए सभी झूठे, मानहानिकारक और भ्रामक बयानों को वापस लेने की मांग की गई है। इसके साथ सार्वजनिक स्पष्टीकरण और माफी जारी करने को भी कहा गया है।
नोटिस में पंद्रह दिनों की समयसीमा दी गई है। इसमें कहा गया है कि यदि निर्धारित अवधि में संबंधित नेता अपने बयान वापस नहीं लेते और सार्वजनिक माफी नहीं देते, तो बैद्यनाथ उपलब्ध कानूनी विकल्पों के तहत कार्रवाई शुरू कर सकते हैं।
ममता बनर्जी और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया अभी नहीं
कानूनी नोटिस में यह चेतावनी दी गई है कि जवाब नहीं मिलने पर दीवानी, आपराधिक और अन्य कानूनी कार्यवाही शुरू की जा सकती है। फिलहाल ममता बनर्जी और नोटिस पाने वाले अन्य टीएमसी नेताओं की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

