दिल्ली हिंदी अकादमी के साहित्यिक सम्मानों में बड़ा बदलाव
दिल्ली सरकार की हिंदी अकादमी ने अपने वार्षिक साहित्यिक पुरस्कार कार्यक्रम में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए कई सम्मानों को राष्ट्रीय चेतना, भारतीय संस्कृति, हिंदी सेवा और साहित्यिक परंपरा से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों के नाम से जोड़ा है। इसे अकादमी की सम्मान परंपरा में नया विस्तार माना जा रहा है।
इस बदलाव के तहत वीर सावरकर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी, पंडित मदन मोहन मालवीय और अन्य साहित्यिक व सांस्कृतिक व्यक्तित्वों के नाम पर पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं। अकादमी ने कुछ श्रेणियों में पुरस्कार राशि भी बढ़ाई है।
राष्ट्रीय चेतना के लिए वीर सावरकर सम्मान
दिल्ली हिंदी अकादमी ने राष्ट्रीय चेतना के क्षेत्र में योगदान देने वालों के लिए वीर सावरकर सम्मान की घोषणा की है। इस सम्मान के साथ दो लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी। यह श्रेणी राष्ट्रभाव, वैचारिक दृढ़ता और समाज में राष्ट्रीय दृष्टि को सम्मानित करने की दिशा में अहम कदम है।
वीर सावरकर का नाम भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन, राष्ट्रवादी चिंतन और वैचारिक लेखन से जुड़ा रहा है। ऐसे में राष्ट्रीय चेतना से जुड़े सम्मान को उनके नाम से जोड़ना साहित्य और राष्ट्र दृष्टि के बीच संबंध को और स्पष्ट करने वाला निर्णय माना जा रहा है।
अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर संस्कृति और ज्ञान परंपरा सम्मान
भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपराओं के प्रचार प्रसार के लिए किए गए कार्यों को सम्मानित करने हेतु अटल बिहारी वाजपेयी संस्कृति तथा ज्ञान परंपरा सम्मान शुरू किया गया है। इस सम्मान के साथ पांच लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी।
अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के साथ साथ हिंदी साहित्य, कविता और सार्वजनिक संवाद की गंभीर परंपरा से भी जुड़े रहे। उनके नाम पर यह सम्मान भारतीय ज्ञान, संस्कृति, भाषा और साहित्यिक अभिव्यक्ति को एक साथ प्रतिष्ठा देने वाला कदम है।
शलाका सम्मान में दीनदयाल उपाध्याय का नाम
अकादमी के सर्वोच्च सम्मान हिंदी अकादमी शलाका सम्मान का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय शलाका सम्मान कर दिया गया है। इस सम्मान की पुरस्कार राशि भी पांच लाख रुपये से बढ़ाकर सात लाख रुपये कर दी गई है।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय का नाम एकात्म मानववाद और भारतीय वैचारिक परंपरा से जुड़ा रहा है। सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान में उनका नाम जोड़ना हिंदी साहित्य को भारतीय चिंतन, समाजदृष्टि और सांस्कृतिक आधार से जोड़ने का प्रयास माना जा रहा है।
हिंदी सेवा के लिए विजय कुमार मल्होत्रा सम्मान
हिंदी सेवी सम्मान का नाम बदलकर भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय कुमार मल्होत्रा के नाम पर रखा गया है। उनका पिछले वर्ष सितंबर में निधन हुआ था। यह सम्मान हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार और सेवा में योगदान देने वालों को प्रदान किया जाएगा।
विजय कुमार मल्होत्रा लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन और भाषा से जुड़े कार्यों में सक्रिय रहे। हिंदी सेवा के सम्मान को उनके नाम से जोड़ना उन लोगों को प्रोत्साहन देने वाला निर्णय है, जो हिंदी को समाज और प्रशासन में मजबूत स्थान दिलाने के लिए काम करते हैं।
महिला साहित्यकारों के लिए अहिल्याबाई होल्कर सम्मान
महिला साहित्यकारों के लिए दिया जाने वाला पुरस्कार अब रानी अहिल्याबाई होल्कर के नाम पर होगा। यह पुरस्कार पहले संतोष कोली की स्मृति में स्थापित था। संतोष कोली का वर्ष 2013 में सड़क दुर्घटना में निधन हो गया था।
आम आदमी पार्टी सरकार ने संतोष कोली की मृत्यु के बाद यह पुरस्कार शुरू किया था। अब इस श्रेणी को मराठा हिंदू शासक रानी अहिल्याबाई होल्कर के नाम से जोड़ा गया है। इस सम्मान के साथ दो लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी।
रानी अहिल्याबाई होल्कर का नाम सुशासन, समाज सेवा, धर्म संरक्षण और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण से जुड़ा रहा है। महिला साहित्यकारों के सम्मान को उनके नाम से जोड़ना भारतीय इतिहास की प्रेरक महिला नेतृत्व परंपरा को साहित्यिक क्षेत्र में प्रतिष्ठित करता है।
एक लाख रुपये वाले प्रमुख साहित्यिक सम्मान
एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि वाले सम्मानों में पंडित मदन मोहन मालवीय हिंदी साहित्यकार सम्मान शामिल है। इसी श्रेणी में बाल साहित्य के लिए बाबा जोरावर सिंह सम्मान और युवाओं के लिए स्वामी विवेकानंद युवा प्रतिभा सम्मान भी निर्धारित किया गया है।
हिंदी पत्रकारिता में योगदान देने वालों को विद्यानिवास मिश्र सम्मान के तहत एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी। यह निर्णय साहित्य के साथ पत्रकारिता, बाल साहित्य और युवा प्रतिभा को भी अकादमी की सम्मान योजना में पर्याप्त स्थान देता है।
अनुवाद, लोक लेखन और सामाजिक विज्ञान को भी स्थान
अन्य सम्मानों में अनुवाद के लिए निर्मल वर्मा सम्मान रखा गया है। हिंदी उत्कर्ष के लिए रामचंद्र शुक्ल हिंदी उत्कर्ष सम्मान, लोक लेखन के लिए वासुदेव शरण अग्रवाल सम्मान और सामाजिक विज्ञान विषय में लेखन के लिए देवेंद्र स्वरूप सम्मान शामिल किए गए हैं।
महिला लेखिकाओं के लिए मृदुला सिन्हा सम्मान और विभिन्न साहित्यिक विधाओं में योगदान के लिए नरेंद्र कोहली सम्मान भी तय किया गया है। इन श्रेणियों से स्पष्ट है कि अकादमी हिंदी साहित्य को व्यापक बौद्धिक और सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में देख रही है।
कुल सोलह पुरस्कार श्रेणियां तय
हिंदी अकादमी ने कुल सोलह पुरस्कार श्रेणियां निर्धारित की हैं। इन श्रेणियों में पुरस्कार राशि एक लाख रुपये से लेकर सात लाख रुपये तक रखी गई है। इससे साहित्यकारों, पत्रकारों, अनुवादकों, महिला लेखिकाओं, युवा प्रतिभाओं और हिंदी सेवियों को व्यापक अवसर मिलेंगे।
अकादमी ने शैक्षणिक वर्ष 2022 23, 2023 24, 2024 25 और 2025 26 के लिए पात्र साहित्यकारों से नामांकन मांगे हैं। नामांकन जमा करने की अंतिम तिथि 23 जून 2026 तय की गई है।
हिंदी अकादमी की भूमिका और उद्देश्य
हिंदी अकादमी की स्थापना वर्ष 1981 में हिंदी भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण तथा संवर्धन के उद्देश्य से स्वायत्त संस्था के रूप में की गई थी। अकादमी लगातार साहित्यिक गतिविधियों, पुरस्कारों और हिंदी के प्रचार प्रसार से जुड़े कार्यक्रमों का संचालन करती रही है।
अकादमी साहित्यकार सम्मान योजना भी संचालित करती है। इस योजना के तहत दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लेखकों, कवियों और पत्रकारों को सम्मानित किया जाता है। नए नामकरण से इस योजना को सांस्कृतिक और राष्ट्रीय दृष्टि से नया आधार मिला है।
भारतीय दृष्टि से साहित्यिक सम्मान की नई दिशा
इन बदलावों को हिंदी साहित्यिक सम्मानों में भारतीयता, राष्ट्रभाव और सांस्कृतिक स्मृति को केंद्र में रखने की पहल के रूप में देखा जा सकता है। पुरस्कारों के नाम अब उन व्यक्तित्वों से जुड़े हैं, जिन्होंने राष्ट्र, संस्कृति, भाषा, समाज और विचार के क्षेत्र में अलग पहचान बनाई।
दिल्ली हिंदी अकादमी का यह निर्णय साहित्य को केवल रचनात्मक अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उसे राष्ट्रीय चेतना, भारतीय ज्ञान परंपरा, हिंदी सेवा, लोक लेखन, पत्रकारिता और सामाजिक चिंतन से भी जोड़ता है। यह बदलाव हिंदी जगत के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।

