Friday, May 15, 2026

RG Kar केस में बड़ी कार्रवाई: तीन IPS अधिकारी सस्पेंड, बंगाल सरकार ने दिखाई सख़्ती

RG Kar केस में बड़ी कार्रवाई: पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद बहुचर्चित RG Kar मेडिकल कॉलेज रेप और मर्डर केस में बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया गया है।

मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने शुक्रवार (15 मई 2026) को नवान्न सचिवालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को निलंबित करने की घोषणा की।

इनमें तत्कालीन कोलकाता पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल, DCP (नॉर्थ) अभिषेक गुप्ता और DCP (सेंट्रल) इंदिरा मुखर्जी शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सरकार ने इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं। इस फैसले को RG Kar केस में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई माना जा रहा है।

पुलिस अधिकारियों पर क्या हैं आरोप?

सरकार के मुताबिक इन अधिकारियों पर कई गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि उन्होंने मामले को सही तरीके से नहीं संभाला और शुरुआती जांच के दौरान कई अहम प्रक्रियाओं में लापरवाही बरती।

इतना ही नहीं, पीड़िता के परिवार को कथित तौर पर आर्थिक मुआवजा देकर मामले को शांत करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया गया है।

मुख्यमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कुछ अधिकारियों ने बिना अधिकृत अनुमति मीडिया के सामने बयानबाजी भी की, जिससे जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठे।

सरकार का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामले में पुलिस प्रशासन का रवैया बेहद जिम्मेदार होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसी कारण तीनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

क्या था RG Kar मेडिकल कॉलेज मामला?

यह दर्दनाक घटना 9 अगस्त 2024 को सामने आई थी। कोलकाता स्थित RG Kar Medical College and Hospital के सेमिनार हॉल में एक जूनियर डॉक्टर का शव मिला था।

पोस्टमार्टम और जांच में सामने आया कि डॉक्टर के साथ पहले बलात्कार किया गया और फिर बेरहमी से हत्या कर दी गई।

इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। मेडिकल समुदाय से लेकर आम लोगों तक में भारी आक्रोश देखने को मिला।

कोलकाता पुलिस ने मामले में सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया था। बाद में लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शन और निष्पक्ष जांच की मांग के बीच केस को CBI को सौंप दिया गया।

कोर्ट का फैसला और परिवार के सवाल

RG Kar केस में बड़ी कार्रवाई: 20 जनवरी 2025 को ट्रायल कोर्ट ने संजय रॉय को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

हालांकि पीड़िता के परिवार ने शुरुआत से ही दावा किया कि इस अपराध में सिर्फ एक व्यक्ति शामिल नहीं था। परिवार का कहना है कि कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच ठीक से नहीं हुई।

हाल ही में कलकत्ता हाई कोर्ट में परिवार की ओर से कहा गया कि फोरेंसिक एक्सपर्ट की राय के अनुसार घटनास्थल पर एक से अधिक लोगों की मौजूदगी के संकेत मिले थे।

परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि CBI और राज्य पुलिस दोनों ने कुछ अहम तथ्यों को नजरअंदाज किया। यही वजह है कि आज भी इस केस को लेकर जनता के बीच सवाल बने हुए हैं।

बंगाल चुनाव में भी बना बड़ा मुद्दा

RG Kar केस पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था। भाजपा ने इसे महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जोड़ते हुए राज्य सरकार को घेरा।

पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने भी भाजपा के टिकट पर पानीहाटी सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।

चुनाव प्रचार के दौरान RG Kar पीड़िता को न्याय दिलाने का मुद्दा लगातार उठाया गया।

नई सरकार बनने के बाद अब इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई कर सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि दोषियों और लापरवाह अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।

जेलों में भी चला बड़ा सर्च ऑपरेशन

RG Kar केस में बड़ी कार्रवाई: RG Kar केस के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने राज्य की जेलों की खराब व्यवस्था पर भी चिंता जताई।

गुरुवार को कोलकाता पुलिस, जेल सुधार सेवा विभाग और फायर विभाग की संयुक्त टीम ने प्रेसीडेंसी जेल में बड़ा तलाशी अभियान चलाया।

करीब चार घंटे तक चले ऑपरेशन में जेल परिसर से 23 मोबाइल फोन बरामद किए गए।

इस मामले में जेल अधीक्षक एन. कुजूर और चीफ कंट्रोलर दीप्त घोराई को भी तत्काल निलंबित कर दिया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जेलों के अंदर अपराधियों का नेटवर्क चलना बेहद गंभीर मामला है। मामले की जांच अब CID को सौंप दी गई है।

सरकार का सख़्त संदेश

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार महिला सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर पूरी तरह गंभीर है।

उन्होंने साफ किया कि CBI अपराध की मुख्य जांच जारी रखेगी, जबकि राज्य सरकार प्रशासनिक लापरवाही के पहलू पर अलग से कार्रवाई करेगी।

सरकार ने राज्य के सभी सुधार गृहों में मोबाइल फोन और अन्य प्रतिबंधित सामग्री के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं।

RG Kar केस में हुई इस बड़ी कार्रवाई को राज्य सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति के तौर पर देखा जा रहा है।

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