Friday, May 15, 2026

भोजशाला पर हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, परिसर को माना मंदिर, मुस्लिम पक्ष जाएगा सुप्रीम कोर्ट

भोजशाला पर हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने धार स्थित Bhojshala विवाद पर बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

लंबे समय से चले आ रहे इस बहुचर्चित मामले में अदालत ने भोजशाला परिसर को मंदिर माना है।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह स्थल हिंदू आस्था और पूजा से जुड़ा हुआ है तथा यहां हिंदू समाज को पूजा-अर्चना का अधिकार प्राप्त होगा।

अदालत ने यह भी कहा कि यदि मुस्लिम पक्ष चाहे तो वह राज्य सरकार के समक्ष अलग जमीन आवंटित करने के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकता है।

कोर्ट ने सरकार को यह सुझाव भी दिया कि मां वाग्देवी की प्रतिमा को इंग्लैंड से वापस लाने के लिए आवश्यक प्रयास किए जाएं।

हिंदू पक्ष लंबे समय से इस प्रतिमा को मां सरस्वती की मूर्ति बताते हुए भारत लाने की मांग करता रहा है।

चार साल चली सुनवाई, अब आया फैसला

भोजशाला पर हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: भोजशाला विवाद को लेकर पिछले कई वर्षों से कानूनी लड़ाई जारी थी।

हिंदू पक्ष की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर भोजशाला को मंदिर घोषित करने और वर्षभर 24 घंटे पूजा-अर्चना की अनुमति देने की मांग की गई थी।

मामले में दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत बहस हुई और करीब चार वर्षों तक सुनवाई चलती रही।

सभी पक्षों को सुनने और दस्तावेजों, ऐतिहासिक तथ्यों तथा पुरातात्विक रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि भोजशाला का धार्मिक स्वरूप मंदिर का है।

अंतरसिंह की याचिका खारिज

मामले में अंतरसिंह द्वारा दायर याचिका को भी अदालत ने खारिज कर दिया।

इस याचिका में मांग की गई थी कि दोनों समुदायों के बीच सौहार्द बनाए रखने के लिए पूर्व व्यवस्था जारी रखी जाए।

हालांकि कोर्ट ने कहा कि धार्मिक स्वरूप को लेकर अब स्पष्ट निर्णय दिया जा चुका है और उसी आधार पर आगे की व्यवस्था तय होगी।

फैसले के बाद हिंदू पक्ष में जश्न

फैसले के बाद हिंदू संगठनों और मंदिर पक्ष में खुशी की लहर दौड़ गई।

इंदौर हाई कोर्ट के गेट नंबर 3 के बाहर समर्थकों ने मिठाइयां बांटीं, ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया और जयकारे लगाए।

मंदिर पक्ष के अधिवक्ता Vishnu Shankar Jain ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह हिंदू समाज की आस्था और लंबे संघर्ष की जीत है।

उन्होंने कहा कि अब हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिल गया है और वर्षों पुरानी मांग पूरी हुई है।

मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाएगा

हाई कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है।

मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Salman Khurshid, Arshad Warsi और Shobha Menon ने अदालत में पक्ष रखा था।

वहीं हिंदू पक्ष की ओर से Vishnu Shankar Jain और Manish Gupta ने बहस की।

फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वे कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेंगे और मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाएंगे।

आखिर क्या है भोजशाला विवाद?

भोजशाला पर हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: धार स्थित भोजशाला एक संरक्षित स्मारक है, जिसकी देखरेख Archaeological Survey of India करता है।

हिंदू पक्ष का दावा है कि यह प्राचीन काल में मां सरस्वती का मंदिर और विद्या का प्रमुख केंद्र था, जहां विद्वान शिक्षा प्राप्त करने आते थे।

दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है और यहां नमाज अदा करने का अधिकार मांगता रहा है।

इसके अलावा जैन समुदाय के एक वर्ग का दावा है कि यह स्थल प्राचीन जैन मंदिर और गुरुकुल रहा है।

इसी धार्मिक स्वरूप को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा था।

समय-समय पर प्रशासन द्वारा दोनों पक्षों के लिए अलग-अलग व्यवस्था लागू की जाती रही, लेकिन अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद इस विवाद ने नया मोड़ ले लिया है।

राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश समेत देशभर में राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

हिंदू संगठनों ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताते हुए स्वागत किया है, जबकि मुस्लिम संगठनों ने अदालत के फैसले पर असहमति जताई है।

अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं, जहां इस मामले में आगे की कानूनी लड़ाई देखने को मिल सकती है।

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Karnika Pandey
Karnika Pandeyhttps://reportbharathindi.com/
“This is Karnika Pandey, a Senior Journalist with over 3 years of experience in the media industry. She covers politics, lifestyle, entertainment, and compelling life stories with clarity and depth. Known for sharp analysis and impactful storytelling, she brings credibility, balance, and a strong editorial voice to every piece she writes.”
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