Bihar Petrol Price Hike: पटना, 15 मई 2026: बिहार के आम आदमी के लिए आज की सुबह महंगाई का बड़ा झटका लेकर आई है।
वैश्विक स्तर पर जारी ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर अब बिहार के पेट्रोल पंपों पर दिखने लगा है।
राज्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई है। करीब दो साल के लंबे अंतराल के बाद यह ईंधन की कीमतों में सबसे बड़ा उछाल माना जा रहा है।
यह बढ़ोत्तरी ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम भी 50 रुपये बढ़ाए गए थे, जिससे अब आम आदमी की रसोई के साथ-साथ आवाजाही भी महंगी हो गई है।
पटना समेत सभी जिलों में नई कीमतें लागू
Bihar Petrol Price Hike: बिहार की राजधानी पटना समेत राज्य के सभी जिलों में तेल की नई दरें प्रभावी हो गई हैं।
पटना में कल तक जो पेट्रोल 105.41 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा था, वह आज यानी 15 मई को बढ़कर 108.55 रुपये पर पहुंच गया है।
इसी तरह डीजल के दाम भी 91.78 रुपये से बढ़कर 94.63 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं।
बिहार के अन्य प्रमुख शहरों जैसे भागलपुर, गया और मुजफ्फरपुर में भी कीमतें इसी अनुपात में बढ़ी हैं।
क्योंकि बिहार में माल ढुलाई और स्थानीय टैक्स की दरें अलग-अलग हैं, इसलिए कुछ जिलों में पेट्रोल की कीमतें 109 रुपये के भी पार चली गई हैं।
एलपीजी की बात करें तो घरेलू सिलेंडर अब 951 रुपये के बजाय 1011 रुपये में मिल रहा है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पहल: ‘इलेक्ट्रिक गाड़ियां और छोटा काफिला’
Bihar Petrol Price Hike: ईंधन की बढ़ती कीमतों और ऊर्जा संकट को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक मिसाल पेश की है।
उन्होंने न केवल अपने सुरक्षा काफिले की गाड़ियों की संख्या कम कर दी है, बल्कि खुद भी इलेक्ट्रिक गाड़ी (EV) का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
मुख्यमंत्री की इस पहल का मकसद राज्य में ईंधन की खपत को कम करना और पर्यावरण को बचाना है।
हाल ही में एक दिलचस्प उदाहरण तब देखने को मिला जब बिहार सरकार के तीन मंत्रियों ने अलग-अलग वाहनों के बजाय एक ही गाड़ी साझा की और पटना से वैशाली का दौरा किया।
मुख्यमंत्री ने सभी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से अपील की है कि वे कम से कम गाड़ियों का इस्तेमाल करें और ‘कार पूलिंग’ को बढ़ावा दें।
‘नो व्हीकल डे’ और वर्क फ्रॉम होम की सलाह
बिहार सरकार ने बढ़ते Bihar Petrol Price Hike के असर को कम करने के लिए जनता और प्रशासन के लिए कुछ खास सुझाव दिए हैं:
वर्क फ्रॉम होम (WFH): सीएम ने सरकारी और निजी दफ्तरों को सलाह दी है कि जहाँ संभव हो, कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दी जाए।
नो व्हीकल डे: सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाने का आग्रह किया गया है, ताकि तेल की बचत हो सके।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट: लोगों से अपील की गई है कि वे निजी कारों या बाइक के बजाय मेट्रो, बस और ऑटो जैसे सार्वजनिक साधनों का उपयोग करें।
महंगाई की दोहरी मार
पेट्रोल और डीजल के महंगे होने का सीधा असर अब जरूरी चीजों की कीमतों पर भी पड़ेगा।
माल ढुलाई महंगी होने से सब्जी, फल और राशन के दामों में भी बढ़ोत्तरी की आशंका जताई जा रही है।
15 मई की सुबह जब लोग पेट्रोल पंप पहुंचे, तो बढ़े हुए रेट देखकर उनमें चिंता साफ दिखी।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की स्थिति स्थिर नहीं होती, तब तक कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद कम है।
ऐसे में सरकार की ‘बचत और इलेक्ट्रिक’ नीति ही फिलहाल सबसे बड़ा सहारा नजर आ रही है।

