PM मोदी की ठुकराई अपील: मध्य प्रदेश के भिंड में भाजपा किसान मोर्चा के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष सज्जन सिंह यादव का शक्ति प्रदर्शन उनके लिए भारी पड़ गया।
ग्वालियर से भिंड तक लगभग 100 से 120 वाहनों के लंबे काफिले के साथ निकाली गई स्वागत रैली ने न सिर्फ शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को प्रभावित किया, बल्कि पार्टी संगठन को भी असहज स्थिति में ला दिया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और तस्वीरों के बाद भाजपा नेतृत्व ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए सज्जन सिंह यादव को पद से हटा दिया।
नियुक्ति के 18 दिन बाद ही कार्रवाई
सज्जन सिंह यादव को हाल ही में भाजपा किसान मोर्चा का जिला अध्यक्ष बनाया गया था। लेकिन पद संभालने के महज 18 दिन बाद ही उनकी नियुक्ति निरस्त कर दी गई।
भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर यह कार्रवाई की।
पार्टी द्वारा जारी पत्र में साफ कहा गया कि यह शक्ति प्रदर्शन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा बचत और सादगी की अपील के विपरीत था।
शहर में जाम और अव्यवस्था से बढ़ी नाराजगी
PM मोदी की ठुकराई अपील: बुधवार शाम जब सज्जन सिंह यादव समर्थकों के साथ भिंड पहुंचे, तब शहर के कई प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लग गया।
मालनपुर, गोहद चौराहा और मेहगांव जैसे इलाकों में भारी भीड़ जमा हो गई। लगातार हॉर्न, नारेबाजी और लग्जरी वाहनों के लंबे काफिले से आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
कई जगह लोगों को घंटों ट्रैफिक में फंसे रहना पड़ा, जिससे स्थानीय स्तर पर नाराजगी भी देखने को मिली।
पीएम मोदी की अपील के उलट गया संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले कुछ समय से लगातार ईंधन बचत, ऊर्जा संरक्षण और अनावश्यक वाहन उपयोग कम करने की अपील कर रहे हैं।
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और ऊर्जा संकट को देखते हुए उन्होंने नागरिकों से जिम्मेदारी निभाने की बात कही थी।
इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत कई नेताओं ने अपने काफिलों में वाहनों की संख्या भी कम की है।
ऐसे समय में भिंड में हुआ यह शक्ति प्रदर्शन पार्टी के संदेश के बिल्कुल विपरीत माना गया।
सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स के बाद बढ़ा दबाव
काफिले के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। लोगों ने सवाल उठाए कि जब सरकार खुद ईंधन बचाने की बात कर रही है, तब भाजपा नेताओं द्वारा इस तरह के शक्ति प्रदर्शन क्यों किए जा रहे हैं।
कई यूजर्स ने इसे दिखावे की राजनीति और संसाधनों की बर्बादी बताया। राष्ट्रीय मीडिया में खबर आने के बाद भाजपा संगठन पर कार्रवाई का दबाव और बढ़ गया।
संगठन ने मांगा था जवाब
मामला सामने आने के बाद भाजपा संगठन ने सज्जन सिंह यादव से जवाब तलब किया था। अपनी सफाई में उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी समर्थक को वाहन लेकर आने के लिए नहीं कहा था।
उनके मुताबिक कार्यकर्ता स्वेच्छा से काफिले में शामिल हुए थे और यह पार्टी के प्रति उनका उत्साह था। हालांकि संगठन उनकी सफाई से संतुष्ट नहीं हुआ और अंततः उन्हें पद से हटा दिया गया।
सौभाग्य सिंह पर भी सरकार की बड़ी कार्रवाई
PM मोदी की ठुकराई अपील: इसी बीच मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के नवनियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह पर भी सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं।
उज्जैन से भोपाल तक लगभग 700 वाहनों के काफिले के साथ पदभार ग्रहण करने पहुंचे सौभाग्य सिंह को मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
उनके प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार अगले आदेश तक निरस्त कर दिए गए हैं। साथ ही उन्हें निगम कार्यालय में प्रवेश, बैठकों में भाग लेने और प्रशासनिक फैसले लेने से भी रोक दिया गया है।
विपक्ष ने उठाए दोहरे मापदंड के सवाल
हालांकि इस कार्रवाई के बाद विपक्ष ने भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि कुछ नेताओं पर तुरंत कार्रवाई होती है, जबकि अन्य मामलों में संगठन चुप्पी साध लेता है।
शिवपुरी में भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी के 300 से अधिक वाहनों वाले शक्ति प्रदर्शन का मामला भी चर्चा में है, लेकिन वहां अब तक कोई कार्रवाई सामने नहीं आई।
सादगी बनाम शक्ति प्रदर्शन की नई बहस
भिंड की यह घटना अब केवल एक स्थानीय राजनीतिक विवाद नहीं रह गई है। इसने राजनीति में सादगी, जवाबदेही और नेताओं की कथनी-करनी के फर्क पर नई बहस छेड़ दी है।
भाजपा संगठन ने कार्रवाई कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी अनुशासन और शीर्ष नेतृत्व की अपील की अनदेखी बर्दाश्त नहीं करेगी।
लेकिन साथ ही यह सवाल भी बना हुआ है कि क्या संगठनात्मक अनुशासन का पैमाना सभी नेताओं के लिए एक समान है।
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