नोएडा हिंसा में पाकिस्तान कनेक्शन: गौतमबुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने नोएडा में हाल ही में हुई हिंसा के मामले में महत्वपूर्ण खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि मजदूरों के वेतन वृद्धि संबंधी आंदोलन को सोची-समझी साजिश के तहत हिंसक रूप दिया गया। जांच में सामने आया है कि इस बवाल के तार सीधे पाकिस्तान से जुड़े हैं। जब नोएडा की सड़कों पर आगजनी और पथराव हो रहा था, उसी दौरान पाकिस्तान से संचालित दो एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल भ्रामक और भड़काऊ खबरें फैलाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे।
पाकिस्तान से चल रहे थे भ्रामक हैंडल
पुलिस जांच के अनुसार, @MeerIlayasi और @AyushiTiwari नाम के ये दो हैंडल पिछले तीन महीनों से सक्रिय थे।
ये पहचान छिपाने के लिए वीपीएन का इस्तेमाल कर रहे थे। @MeerIlayasi हैंडल चलाने वाले व्यक्ति ने अपने बायो में खुद को कांग्रेस का नामित सोशल मीडिया संयोजक बताया था और डिस्प्ले पिक्चर में राहुल गांधी की तस्वीर लगाई गई थी।
इन हैंडलों के जरिए फर्जी खबरें फैलाई जा रही थीं, जिससे मजदूरों में गुस्सा और भ्रम बढ़ रहा था। पुलिस ने इन दोनों हैंडलों के खिलाफ अलग से एफआईआर दर्ज की है और आगे की जांच जारी है।
सोची-समझी साजिश के तहत भड़काई गई हिंसा
नोएडा हिंसा में पाकिस्तान कनेक्शन: पुलिस के मुताबिक, फैक्ट्री मजदूरों का यह आंदोलन अचानक नहीं भड़का, बल्कि इसे मजदूर बिगुल दस्ता जैसे संगठनों ने पूर्व नियोजित तरीके से हिंसक बनाया।
9 और 10 अप्रैल को क्यूआर कोड के जरिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए, जिनमें 42 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को शामिल कर डिजिटल माध्यम से उकसाया गया।
11 अप्रैल को प्रशासन के साथ समझौता हो जाने के बावजूद, साजिशकर्ताओं ने उत्तेजित भाषण देकर मजदूरों को 13 अप्रैल को सड़कों पर उतरने और हिंसा करने के लिए भड़काया।
तीन मुख्य साज़िशकर्त्ताओं की पहचान
जांच में तीन मुख्य साजिशकर्ताओं की पहचान की गई है। इनमें रूपेश राय (मजदूर बिगुल दस्ता का प्रमुख) और मनीषा चौहान को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि तीसरा आरोपी आदित्य आनंद फिलहाल फरार है।
पुलिस के अनुसार, रूपेश राय और आदित्य आनंद पेशेवर प्रदर्शनकारी हैं, जो 2018-20 से देशभर में विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
ये लोग औद्योगिक क्षेत्रों की शांति भंग करने के लिए मजदूरों के डेटाबेस का इस्तेमाल कर रहे थे।
62 लोग गिरफ्तार, दोषियों पर NSA की कार्रवाई
नोएडा में दो दिनों तक चली इस हिंसा में 50 से ज्यादा वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था और जमकर पथराव हुआ।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि अब तक 13 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 62 उपद्रवियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
गिरफ्तार लोगों में आगजनी करने वाले, पुलिस पर हमला करने वाले और बाहरी तत्व शामिल हैं, जो असल मजदूर नहीं थे। मुख्य आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने बढ़ाया वेतन, फिर भी जारी रही हिंसा
नोएडा हिंसा में पाकिस्तान कनेक्शन: मजदूर न्यूनतम वेतन बढ़ाने और शोषण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार रात ही न्यूनतम मजदूरी में 3000 रुपये तक की बढ़ोतरी का फैसला लिया, जो 1 अप्रैल से लागू माना जाएगा।
इसके बावजूद पाकिस्तान से संचालित सोशल मीडिया हैंडलों और स्थानीय साजिशकर्ताओं ने भ्रामक सूचनाएं फैलाकर माहौल को शांत नहीं होने दिया।
वर्तमान स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था
फिलहाल नोएडा में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। मजदूर सरकार के फैसले से संतुष्ट हैं और काम पर लौट गए हैं।
सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं और सोशल मीडिया पर पैनी नजर रखी जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि शांति भंग करने वाले किसी भी तत्व को बख्शा नहीं जाएगा।
यह खुलासा नोएडा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में शांति बनाए रखने और विदेशी ताकतों द्वारा सोशल मीडिया के जरिए की जाने वाली साजिशों को नाकाम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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