पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण से पहले आई रिपोर्ट ने चुनावी सियासत की हकीकत एक बार फिर उजागर कर दी है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और पश्चिम बंगाल इलेक्शन वॉच के विश्लेषण के अनुसार, चुनाव मैदान में उतरे उम्मीदवारों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान के लिए 1,475 उम्मीदवारों के हलफनामों के अध्ययन में पाया गया कि लगभग 23 फीसदी उम्मीदवारों ने खुद अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है। यानी हर चार में से एक उम्मीदवार दागी है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रमुख दलों में दागी उम्मीदवारों की होड़
प्रमुख राजनीतिक दलों के आंकड़े और भी चौंकाने वाले हैं। भारतीय जनता पार्टी के 152 में से 106 उम्मीदवार (करीब 70 फीसदी) आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं, जो इसे इस सूची में सबसे ऊपर रखता है।
वहीं तृणमूल कांग्रेस के 148 में से 63 (43 फीसदी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के 98 में से 43 और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 151 में से 39 उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की घोषणा की है। यह साफ दिखाता है कि लगभग सभी दलों में “विनिंग एबिलिटी” को प्राथमिकता दी जा रही है।
गंभीर अपराधों के आरोप और ‘रेड अलर्ट’ सीटें बढ़ीं चिंता
रिपोर्ट के अनुसार, कुल 345 उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले लंबित हैं, जिनमें से 294 पर गंभीर आरोप हैं। हत्या के 19 और हत्या के प्रयास के 105 मामले इस सूची में शामिल हैं। इसके अलावा महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़े मामलों में 98 उम्मीदवारों के नाम सामने आए हैं, जिनमें छह पर दुष्कर्म के आरोप हैं।
चिंता की बात यह भी है कि 66 विधानसभा क्षेत्रों (करीब 43 फीसदी) को “रेड अलर्ट” घोषित किया गया है। इन क्षेत्रों में कम से कम तीन उम्मीदवार ऐसे हैं, जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिससे मतदाताओं के सामने सीमित विकल्प बचते हैं।
करोड़पति उम्मीदवारों का दबदबा, महिला भागीदारी अब भी कम
आर्थिक स्थिति पर नजर डालें तो 309 उम्मीदवार (21 फीसदी) करोड़पति हैं और औसत संपत्ति 1.34 करोड़ रुपये है। तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों की औसत संपत्ति सबसे अधिक 5.70 करोड़ रुपये दर्ज की गई है।
वहीं महिला प्रतिनिधित्व की स्थिति निराशाजनक बनी हुई है। पहले चरण में केवल 167 महिला उम्मीदवार मैदान में हैं, जो कुल संख्या का महज 11 फीसदी है।
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा और 4 मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे। यह रिपोर्ट एक बार फिर संकेत देती है कि राजनीतिक दलों के लिए साफ छवि से ज्यादा जीतने की संभावना अहम बनी हुई है—जो लोकतंत्र के भविष्य के लिए एक गंभीर सवाल खड़ा करती है।

