Friday, April 17, 2026

हेयर डाई: जानें बालों में कलर कराने के नुकसान

हेयर डाई: सैलून की कुर्सी पर बैठकर जब बालों का रंग बदलता है, तो मन में यह सवाल आना स्वाभाविक है कि क्या हेयर डाई में मौजूद केमिकल्स शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं।

खासतौर पर तेज गंध और अलग-अलग तरह की बातों के चलते लोगों में यह डर बन जाता है कि कहीं इसका असर लिवर पर तो नहीं पड़ता,

लेकिन इस विषय की सच्चाई उतनी डरावनी नहीं है, जितनी आमतौर पर समझी जाती है।

एक्सपर्ट की राय क्या कहती है?

विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली कॉस्मेटिक हेयर डाई से लिवर को गंभीर नुकसान होने का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है।

इसका मुख्य कारण यह है कि बाजार में उपलब्ध अधिकतर हेयर डाई निर्धारित मानकों के तहत बनाई जाती हैं।

जब इन्हें स्कैल्प पर लगाया जाता है, तो इनके केमिकल्स का शरीर में अवशोषण बहुत सीमित मात्रा में होता है।

इसका मतलब यह है कि ये खून तक इतनी मात्रा में नहीं पहुंचते कि लिवर पर गंभीर प्रभाव डाल सकें।

क्या बिल्कुल सुरक्षित है हेयर डाई?

हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि हेयर डाई पूरी तरह से जोखिम मुक्त है। कुछ दुर्लभ मामलों में लिवर से जुड़ी समस्याओं की रिपोर्ट सामने आई है,

खासकर तब जब डाई में पैरा-फिनाइलिन डायमीन (PPD) जैसे केमिकल मौजूद हों,

लेकिन ऐसे मामले बेहद कम होते हैं और यह हर व्यक्ति में अलग-अलग तरह से असर करते हैं। यह शरीर की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है, न कि केवल डाई की मात्रा पर।

किन परिस्थितियों में बढ़ सकता है खतरा?

खतरा तब बढ़ता है जब कुछ विशेष परिस्थितियां एक साथ मौजूद हों। उदाहरण के लिए, यदि स्कैल्प पर घाव या कट हो और उस पर डाई लगाई जाए, तो केमिकल्स का अवशोषण बढ़ सकता है।

इसके अलावा, डाई के धुएं को अधिक मात्रा में सांस के जरिए अंदर लेना भी नुकसानदेह हो सकता है।

आमतौर पर इसका असर स्किन एलर्जी के रूप में दिखाई देता है, जो असहज जरूर होती है, लेकिन गंभीर नहीं होती।

इसके साथ ही, अगर व्यक्ति स्मोकिंग करता है या पहले से लिवर से जुड़ी समस्या जैसे फैटी लिवर या शराब का सेवन करता है, तो जोखिम बढ़ सकता है।

ऐसे मामलों में शरीर पर केमिकल्स का कुल प्रभाव अधिक हो सकता है।

सुरक्षित इस्तेमाल के लिए क्या करें?

हेयर डाई का उपयोग करते समय कुछ सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है। हमेशा भरोसेमंद और प्रमाणित ब्रांड की डाई ही चुनें।

“अमोनिया-फ्री” या “हर्बल” जैसे शब्दों पर पूरी तरह भरोसा न करें, क्योंकि इनमें भी अन्य केमिकल्स मौजूद हो सकते हैं।

हर बार इस्तेमाल से पहले पैच टेस्ट जरूर करें, ताकि एलर्जी की संभावना पहले ही पता चल सके।

कभी भी कटे-फटे या सूजे हुए स्कैल्प पर डाई न लगाएं। साथ ही, डाई लगाते समय अच्छी वेंटिलेशन वाली जगह का चयन करें, ताकि केमिकल्स के धुएं का असर कम हो।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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