NEET पेपर लीक पर पीएम मोदी का संदेश: NEET-UG परीक्षा में पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर लंबे समय से छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी बनी हुई है।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में बड़े प्रशासनिक बदलाव किए हैं,
पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की है और परीक्षा में धांधली रोकने के लिए नए सख्त कानून की तैयारी भी शुरू कर दी है।
इन फैसलों का उद्देश्य छात्रों का भरोसा दोबारा मजबूत करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है।
शिक्षा मंत्रालय में हुए अहम बदलाव
केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग में नई नियुक्तियां की हैं। पहले इस विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे विनीत जोशी का तबादला कर उन्हें पंचायती राज मंत्रालय का सचिव बनाया गया है।
उनकी जगह अब नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया गया है।
नरेश पाल गंगवार इससे पहले मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में सचिव के रूप में कार्य कर चुके हैं। सरकार को उम्मीद है कि उनके अनुभव का लाभ शिक्षा क्षेत्र में भी मिलेगा।
इसके अलावा टीके अनिल कुमार को स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का सचिव बनाया गया है, जबकि कटिकितला श्रीनिवास को उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है।
वहीं खान मंत्रालय के सचिव पीयूष गोयल को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का महासचिव नियुक्त किया गया है। इन सभी नियुक्तियों को कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने मंजूरी दी है।
छात्रों के विरोध के बीच लिए गए फैसले
NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक के बाद देशभर में कई जगह छात्रों ने प्रदर्शन किए थे। लाखों छात्रों ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और पारदर्शी व्यवस्था की मांग की।
ऐसे माहौल में सरकार द्वारा किए गए प्रशासनिक बदलावों को शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को पहले से अधिक सुरक्षित बनाने और छात्रों का विश्वास बहाल करने के लिए लगातार सुधार किए जाएंगे।
पेपर लीक मामलों के लिए बनेगा विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट
पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की है।
इसके लिए जज अनु ग्रोवर बलीगा को विशेष न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।
यह अदालत राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर में कार्य करेगी और Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 के तहत दर्ज मामलों सहित अन्य संबंधित आपराधिक मामलों की सुनवाई करेगी।
इससे पहले अनु ग्रोवर बलीगा तीस हजारी कोर्ट के केंद्रीय जिला मध्यस्थता केंद्र में प्रभारी न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।
उम्मीद की जा रही है कि विशेष अदालत बनने से पेपर लीक मामलों का निपटारा पहले की तुलना में अधिक तेजी से होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छात्रों के नाम संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात छात्रों के नाम एक वीडियो संदेश जारी किया।
उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल परीक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लगातार काम कर रही है।
दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह थी कि छात्रों का एक साल खराब न हो। इसी कारण कम समय में लगभग 22 लाख छात्रों की परीक्षा कराई गई और समय पर परिणाम भी जारी किया गया।
जल्द आ सकता है नया कानून
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी बताया कि सरकार पेपर लीक रोकने के लिए नया और सख्त कानून लाने की तैयारी कर रही है।
प्रस्तावित कानून का मसौदा तैयार किया जा चुका है और इसे कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद संसद में पेश किया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य परीक्षा में धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति ऐसी गतिविधियों में शामिल होने से पहले कई बार सोचे।
दोषियों को मिल सकती है कड़ी सजा
प्रस्तावित कानून के अनुसार यदि कोई व्यक्ति पेपर लीक या परीक्षा में धांधली का दोषी पाया जाता है, तो उसे 5 से 10 साल तक की जेल हो सकती है।
इसके अलावा दोषियों पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया जा सकता है।
सरकार का मानना है कि कड़ी सजा और फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसी व्यवस्थाएं परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेंगी।

