Thursday, September 3, 2026

आकाश आनंद की सियासत पर फिर लगा ब्रेक! मायावती के ‘IN-OUT’ फैसलों ने बढ़ाई BSP की उलझन

आकाश आनंद: बहुजन समाज पार्टी की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव हुआ है और इस बार भी केंद्र में हैं पार्टी प्रमुख मायावती के भतीजे आकाश आनंद।

सियासत में कदम रखने के करीब सात साल बाद आकाश आनंद एक बार फिर उस मोड़ पर खड़े हैं, जहां उनके पास पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं है।

मायावती ने उन्हें सभी प्रमुख पदों से हटाकर फिलहाल एक सामान्य कार्यकर्ता की भूमिका में ला दिया है।

आकाश आनंद के राजनीतिक सफर को देखें तो इसमें लगातार उतार-चढ़ाव दिखाई देते हैं।

कभी उन्हें पार्टी का भविष्य बताया गया, कभी राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी सौंपी गई और कभी अचानक उनके सारे अधिकार वापस ले लिए गए।

यही वजह है कि अब सवाल सिर्फ आकाश आनंद के पद का नहीं, बल्कि BSP की आगे की राजनीतिक दिशा और नेतृत्व को लेकर भी उठ रहे हैं।

सियासत में एंट्री के कुछ ही दिनों बाद मिली बड़ी जिम्मेदारी

आकाश आनंद: आकाश आनंद ने 16 अप्रैल 2019 को सक्रिय राजनीति में कदम रखा था।

खास बात यह रही कि पार्टी में औपचारिक तौर पर आने के महज 68 दिन बाद ही उन्हें राष्ट्रीय समन्वयक जैसी अहम जिम्मेदारी दे दी गई।

इतनी तेजी से मिली जिम्मेदारी ने उसी वक्त यह संकेत दे दिया था कि मायावती उन्हें पार्टी की अगली पीढ़ी के प्रमुख चेहरे के तौर पर तैयार करना चाहती हैं।

इसके बाद दिसंबर 2023 में मायावती ने आकाश आनंद को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।

यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि इससे पहली बार साफ तौर पर संकेत मिला कि BSP की कमान भविष्य में मायावती के बाद किसके हाथों में जा सकती है।

लेकिन इसके कुछ ही महीनों बाद कहानी पूरी तरह बदल गई।

लोकसभा चुनाव के बीच पहली बार हटाए गए

आकाश आनंद: 2024 का लोकसभा चुनाव आकाश आनंद के राजनीतिक करियर के लिए बड़ा मोड़ साबित हुआ।

चुनाव प्रचार के दौरान उनके एक भाषण को लेकर विवाद खड़ा हुआ और उनके खिलाफ FIR की स्थिति बन गई।

इसके बाद मई 2024 में मायावती ने उन्हें पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से हटा दिया। जिस युवा नेता को कुछ महीने पहले BSP का उत्तराधिकारी बनाया गया था, वह अचानक पार्टी की मुख्य भूमिका से बाहर हो गया।

हालांकि यह दूरी ज्यादा लंबी नहीं चली।

जून 2024 में मायावती ने आकाश आनंद को दोबारा पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका दी। इसके बाद एक बार फिर उन्हें राष्ट्रीय समन्वयक की जिम्मेदारी मिली।

लेकिन आकाश का यह राजनीतिक पुनरागमन भी स्थायी साबित नहीं हुआ।

एक बार फिर पद गया, फिर मिली वापसी

मार्च 2025 में मायावती ने दोबारा आकाश आनंद से सभी पद वापस ले लिए। इसके बाद अगस्त 2025 में आकाश ने मायावती से माफी मांगी और उन्हें फिर से राष्ट्रीय समन्वयक बना दिया गया।

यानी कुछ ही वर्षों में आकाश आनंद ने BSP के भीतर जिम्मेदारी मिलने और छिनने का सिलसिला कई बार देखा।

अब सितंबर 2026 में एक बार फिर मायावती ने उन्हें सभी बड़ी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है।

इस बार भी सवाल वही है—क्या आकाश आनंद BSP में अपना राजनीतिक भविष्य मजबूत कर पाएंगे या उनका IN-OUT दौर आगे भी जारी रहेगा?

मायावती ने क्यों लिया इतना बड़ा फैसला?

आकाश को हटाने के पीछे मायावती ने दो अहम बातें सामने रखी हैं। पहली वजह उन्होंने आकाश की राजनीतिक परिपक्वता को बताया और दूसरी वजह चुनावी राजनीति में विपक्ष की रणनीतियों से पार्टी को बचाने की जरूरत बताई।

मायावती का कहना है कि आकाश को अभी राजनीति में और अनुभव हासिल करने की जरूरत है। उनके मुताबिक जब तक वह पूरी तरह परिपक्व नहीं होते, तब तक उन्हें पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी देना उचित नहीं होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान विरोधी दल अलग-अलग राजनीतिक रणनीतियों और हथकंडों का इस्तेमाल कर सकते हैं, ऐसे में पार्टी को सावधानी से आगे बढ़ने की जरूरत है।

कांशीराम की विचारधारा का भी दिया हवाला

आकाश आनंद: मायावती ने अपने फैसले को कांशीराम की राजनीतिक सोच से भी जोड़कर देखा।

उनका तर्क है कि कांशीराम ने अपने परिवार और रिश्तेदारों को पार्टी के काम में सहयोग करने की अनुमति तो दी थी, लेकिन चुनाव लड़ाने या सत्ता मिलने के बाद उन्हें महत्वपूर्ण पद देने के पक्ष में नहीं थे।

मायावती के मुताबिक वह भी इसी सिद्धांत पर कायम हैं और आकाश आनंद को पार्टी में काम करने की अनुमति इसी सोच के तहत दी गई है।

लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों के बीच मायावती के इस तर्क को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

क्या आकाश की बढ़ती सक्रियता बनी परेशानी?

राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र मिश्रा का मानना है कि अगर कांशीराम के सिद्धांतों की बात की जा रही है तो मायावती को यह भी देखना चाहिए कि कांशीराम ने उन्हें खुद राजनीतिक रूप से आगे बढ़ने और गलतियों से सीखने का अवसर दिया था।

उनके मुताबिक आकाश आनंद जब भी पार्टी को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश करते नजर आते हैं और ऐसे राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर बोलते हैं जिनसे BSP का आधार मजबूत हो सकता है, तब उनके सामने नई मुश्किल खड़ी हो जाती है।

मिश्रा के अनुसार मायावती के फैसलों से यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि वह आकाश को भविष्य के नेता के तौर पर तैयार करना चाहती हैं या पार्टी को पूरी तरह अपने नियंत्रण में रखना चाहती हैं।

BSP में नेतृत्व को लेकर बढ़ रहा कंफ्यूजन?

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता डॉ. आशुतोष वर्मा ने भी मायावती के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि लगातार बदलते फैसलों से सबसे ज्यादा नुकसान खुद BSP को हो रहा है।

उनके मुताबिक एक तरफ दूसरी पार्टियां 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और नए नेताओं को जोड़ने में लगी हैं, वहीं BSP के भीतर नेतृत्व को लेकर लगातार असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि हाल में लखनऊ में हुई पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक में आकाश आनंद की मौजूदगी नहीं रही, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं।

आकाश के ससुर का कनेक्शन भी चर्चा में

आकाश आनंद की राजनीति में मुश्किलों की चर्चा उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ के संदर्भ के बिना भी पूरी नहीं होती।

अशोक सिद्धार्थ को इससे पहले मायावती पार्टी से बाहर कर चुकी हैं। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठता रहा है कि क्या आकाश आनंद और उनके ससुर से जुड़े घटनाक्रमों का असर उनके राजनीतिक भविष्य पर पड़ रहा है?

हालांकि योगेंद्र मिश्रा इस फैसले को सीधे तौर पर अशोक सिद्धार्थ से जोड़ने के पक्ष में नहीं हैं। वहीं पत्रकार ज्ञानेंद्र शुक्ला का मानना है कि मामला सिर्फ आकाश की राजनीतिक परिपक्वता का नहीं, बल्कि भरोसे का भी हो सकता है।

उनके मुताबिक मायावती ने रिश्तों के चलते आकाश को कई बार मौका जरूर दिया, लेकिन शायद अभी भी उन्हें पूरी तरह राजनीतिक भरोसा देने में हिचकिचाहट है।

विपक्ष ने कसा तंज, BJP ने कांग्रेस को घेरा

मायावती के फैसले पर कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने भी निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सवाल उठाया कि जब आकाश को बार-बार पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी दी जाती है और फिर वापस ले ली जाती है, तो इससे उनके राजनीतिक भविष्य पर क्या असर पड़ेगा।

उन्होंने यहां तक सवाल उठाया कि कहीं इन फैसलों के पीछे BJP की कोई रणनीति तो नहीं है।

दूसरी ओर BJP प्रवक्ता आलोक अवस्थी ने कांग्रेस पर ही तंज कस दिया। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस को आकाश आनंद को लेकर इतनी चिंता है तो वह उन्हें अपनी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दे और प्रधानमंत्री पद का चेहरा भी घोषित कर दे।

यानी आकाश आनंद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी अब BSP की सीमाओं से बाहर निकलकर विपक्षी दलों के बीच पहुंच चुकी है।

2027 से पहले सबसे बड़ा सवाल—BSP का भविष्य क्या है?

मायावती के ताजा फैसले को सिर्फ एक नेता को पद से हटाने के तौर पर देखना शायद पूरी तस्वीर नहीं होगी। इसके पीछे BSP की भविष्य की रणनीति का सवाल भी जुड़ा है।

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी, BJP और कांग्रेस जैसे दल अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। दूसरी ओर BSP में सबसे बड़ा चेहरा अब भी मायावती ही हैं।

ऐसे में आकाश आनंद को बार-बार आगे लाना और फिर पीछे कर देना पार्टी के समर्थकों के बीच भी एक सवाल पैदा कर रहा है—क्या आकाश आनंद वास्तव में BSP की अगली पीढ़ी का चेहरा हैं या अभी भी मायावती खुद ही पार्टी के भविष्य को लेकर अंतिम फैसला अपने हाथ में रखना चाहती हैं?

फिलहाल इतना जरूर है कि आकाश आनंद का राजनीतिक सफर जितनी तेजी से ऊपर गया, उतनी ही तेजी से कई बार नीचे भी आया है। अब उनके सामने चुनौती सिर्फ पार्टी में वापसी की नहीं, बल्कि विश्वास, नेतृत्व और अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान दोबारा बनाने की है।

और 2027 के चुनाव से पहले मायावती का यह फैसला BSP के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा, इसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा।

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Karnika Pandey
Karnika Pandeyhttps://reportbharathindi.com/
“This is Karnika Pandey, a Senior Journalist with over 3 years of experience in the media industry. She covers politics, lifestyle, entertainment, and compelling life stories with clarity and depth. Known for sharp analysis and impactful storytelling, she brings credibility, balance, and a strong editorial voice to every piece she writes.”
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