Salary Rule: हर महीने बैंक अकाउंट में आने वाली सैलरी को लेकर नौकरीपेशा लोगों के बीच कई तरह की बातें चल रही हैं।
खासकर नए लेबर कोड के तहत सैलरी स्ट्रक्चर में होने वाले बदलाव को लेकर कर्मचारियों के मन में सवाल हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा 50% वेज नियम को लेकर है। अगर आपकी सैलरी में बेसिक पे कम और अलग-अलग भत्तों का हिस्सा ज्यादा है,
तो नए नियम का असर आपके वेतन के ढांचे पर पड़ सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि 31 अगस्त के बाद हर कर्मचारी की इन-हैंड सैलरी अपने आप कम हो जाएगी।
इसका असर हर कर्मचारी की सैलरी संरचना और कंपनी की पेरोल व्यवस्था के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है।
क्या है 50% वेज का नियम?
नए लेबर कोड के तहत वेतन की गणना के लिए एक तय ढांचा बनाया गया है।
इसमें अगर किसी कर्मचारी की सैलरी में ऐसे भत्तों और अन्य हिस्सों का योगदान 50% से ज्यादा है, जिन्हें वेतन की गणना से अलग रखा गया है, तो 50% से ऊपर की रकम को वेतन में शामिल किया जा सकता है।
सरल भाषा में समझें तो कंपनियां सैलरी का बहुत बड़ा हिस्सा अलग-अलग भत्तों के रूप में दिखाकर बेसिक वेतन को बहुत कम नहीं रख सकतीं।
इस बदलाव का उद्देश्य वेतन की गणना को ज्यादा एक समान और पारदर्शी बनाना है।
आपकी इन-हैंड सैलरी पर कैसे पड़ेगा असर?
इस नियम का सबसे बड़ा असर उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है जिनके सैलरी पैकेज में बेसिक पे कम और भत्तों का हिस्सा ज्यादा है।
अगर वेतन की गणना के लिए बेसिक या संबंधित वेतन हिस्सा बढ़ता है, तो पीएफ में कर्मचारी का योगदान भी बढ़ सकता है।
ऐसी स्थिति में आपकी कुल CTC जरूरी नहीं कि कम हो, लेकिन हर महीने हाथ में आने वाली रकम कुछ घट सकती है।
इसका कारण यह होगा कि आपकी सैलरी का ज्यादा हिस्सा पीएफ जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभों में जा सकता है।
60 हजार रुपये की सैलरी का उदाहरण
मान लीजिए किसी कर्मचारी की कुल मासिक सैलरी 60,000 रुपये है। अभी उसके बेसिक पे और डीए को मिलाकर 20,000 रुपये हैं,
जबकि बाकी रकम अलग-अलग भत्तों के रूप में मिलती है।
50% नियम के हिसाब से वेतन की गणना में करीब 30,000 रुपये तक का हिस्सा शामिल हो सकता है। ऐसे में कंपनी को सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव करना पड़ सकता है।
अगर पीएफ की गणना भी बढ़ी हुई वेतन सीमा के आधार पर होती है, तो कर्मचारी का पीएफ योगदान पहले से ज्यादा हो सकता है।
इससे हर महीने मिलने वाली इन-हैंड सैलरी थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन कर्मचारी के पीएफ खाते में जमा होने वाली रकम बढ़ेगी।
लंबे समय में क्या फायदा होगा?
इन-हैंड सैलरी में संभावित कमी को केवल नुकसान के तौर पर नहीं देखना चाहिए। ज्यादा वेतन आधार होने से पीएफ और ग्रेच्युटी जैसे लाभों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
यानी आज हाथ में मिलने वाली रकम कुछ कम हो सकती है, लेकिन भविष्य के लिए रिटायरमेंट सेविंग और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ बढ़ सकते हैं।
क्या 31 अगस्त के बाद सभी की सैलरी घट जाएगी?
ऐसा कहना सही नहीं होगा। 31 अगस्त के बाद हर नौकरीपेशा व्यक्ति की इन-हैंड सैलरी कम हो जाएगी, यह जरूरी नहीं है।
वास्तविक असर आपकी मौजूदा सैलरी संरचना, बेसिक पे, भत्तों, पीएफ की गणना और कंपनी की पेरोल पॉलिसी पर निर्भर करेगा।
इसलिए अगर आप नौकरी करते हैं, तो अपनी कंपनी से नया सैलरी स्ट्रक्चर और पीएफ कैलकुलेशन जरूर समझ लें।
इससे आपको साफ पता चल सकेगा कि नए नियम का आपकी मासिक सैलरी और भविष्य के लाभों पर कितना असर पड़ेगा।

