UP: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट से सामने आया नकली नोटों का मामला लगातार पेचीदा होता जा रहा है।
शुरुआती जांच में करीब 7.40 करोड़ रुपये की नकली करेंसी मिलने की बात सामने आई थी, लेकिन अब यह आंकड़ा करीब 17 करोड़ रुपये तक पहुंचने की चर्चा है।
जांच अभी जारी है और आशंका है कि करेंसी की पड़ताल पूरी होने के बाद यह रकम और बढ़ सकती है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी मात्रा में असली नोटों की जगह नकली करेंसी आखिर पहुंची कैसे?
11.50 करोड़ रुपये की करेंसी भेजने पर खुला मामला
मामले की शुरुआत करेंसी चेस्ट से 11.50 करोड़ रुपये की नकदी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की जयपुर करेंसी चेस्ट भेजे जाने के बाद हुई।
वहां करेंसी की गिनती के दौरान करीब 4.30 लाख रुपये कम मिले। इसके बाद बैंक और संबंधित अधिकारियों के स्तर पर जांच शुरू हुई।
जांच आगे बढ़ी तो करेंसी चेस्ट में रखी रकम और नोटों की स्थिति को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आने लगे।
जांच में यह भी सामने आया कि करेंसी चेस्ट में मौजूद नकदी की निगरानी और उसके रखरखाव की प्रक्रिया की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
अब अधिकारियों की नजर इस बात पर है कि कब और किस स्तर पर रकम में गड़बड़ी हुई।
हाउसकीपर पर नोटों से रकम निकालने का आरोप
जांच के दौरान बैंक के पार्ट टाइम हाउसकीपर विशाल कुमार का नाम सामने आया। उस पर नोटों की गड्डियों से रुपये निकालने का आरोप है।
पुलिस ने उसके खिलाफ चोरी का मुकदमा दर्ज किया है। हालांकि मामले में उसकी भूमिका कितनी बड़ी थी और क्या वह अकेले इस गड़बड़ी को अंजाम दे सकता था, यह जांच का अहम हिस्सा है।
CCTV फुटेज को भी जांच में शामिल किया गया है। इसके जरिए करेंसी चेस्ट के भीतर और उसके आसपास हुई आवाजाही की जानकारी जुटाई जा रही है।
जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि किन लोगों को वहां पहुंच की अनुमति थी और संदिग्ध अवधि के दौरान कौन-कौन अंदर गया।
तीन बैंक प्रबंधक भी जांच के घेरे में
नकली करेंसी से जुड़े मामले में बैंक के तीन प्रबंधकों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है। बैंक की ओर से उनके निलंबन की जानकारी दी गई है।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी वास्तविक भूमिका क्या रही और नकली नोट करेंसी चेस्ट तक किस तरीके से पहुंचे।
यही वजह है कि जांच सिर्फ चोरी के आरोप तक सीमित नहीं है, बल्कि करेंसी चेस्ट की पूरी व्यवस्था, रिकॉर्ड और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
करोड़ों की करेंसी के बीच सुरक्षा पर सवाल
करेंसी चेस्ट कोई सामान्य कैश स्टोरेज नहीं होता। यहां बड़ी मात्रा में भारतीय मुद्रा रखी जाती है और जरूरत के अनुसार आसपास की बैंक शाखाओं को नकदी उपलब्ध कराई जाती है।
बैंकों से वापस आने वाली रकम भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत यहां रखी जाती है।
करेंसी चेस्ट में रखी रकम का रिकॉर्ड व्यवस्थित तरीके से तैयार किया जाता है।
रकम कब आई, किसने प्राप्त की, किसने गिनी, कहां रखी गई और कब बाहर भेजी गई—इन तमाम प्रक्रियाओं का हिसाब रखा जाता है।
सुरक्षा के लिए ड्यूल कस्टडी सिस्टम समेत कई स्तर की व्यवस्था होती है, ताकि किसी एक व्यक्ति के लिए अकेले महत्वपूर्ण कैश क्षेत्र तक पहुंच बनाना आसान न हो।
ऐसे में करोड़ों रुपये की असली करेंसी के बीच नकली नोटों का मिलना जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है।
अधिकारियों को यह पता लगाना होगा कि असली नोट कब और कैसे बाहर निकले, उनकी जगह नकली नोट किसने रखे और इस पूरी प्रक्रिया में कितने लोग शामिल थे। डीआईजी, डीएम और एसएसपी करेंसी चेस्ट का निरीक्षण कर चुके हैं।
पुलिस विशेष जांच टीम यानी SIT बनाने की तैयारी में है और CBI जांच की संभावना पर भी चर्चा हो रही है। फिलहाल जांच के जरिए इस पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने की कोशिश जारी है।

