Tanvi Heart Surgery Case: 13 साल से इलाज का इंतजार कर रही तन्वी की आखिरकार मौत हो गई। 16 साल की तन्वी राजस्थान के कोटा की रहने वाली थी और जन्म से ही दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रही थी।
परिवार का आरोप है कि दिल्ली AIIMS में इलाज के दौरान कई बार ऑपरेशन की तारीख तय हुई, लेकिन हर बार किसी न किसी वजह से मामला आगे बढ़ता गया। अब बच्ची की मौत के बाद परिवार जवाब मांग रहा है और AIIMS ने जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी बनाई है।
2012 में शुरू हुआ इलाज
AIIMS के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, तन्वी को पहली बार 10 अक्टूबर 2012 को कार्डियोलॉजी OPD में दिखाया गया था।
जांच में उसके दिल में छेद यानी VSD और पल्मोनरी एट्रेसिया की समस्या सामने आई। यह जन्मजात बीमारी है, जिसमें दिल से फेफड़ों तक खून पहुंचने में परेशानी होती है।
इसके बाद तन्वी के दिल की स्थिति और सर्जरी की संभावना जानने के लिए कई जांचें कराई गईं।
परिवार लगातार इलाज और ऑपरेशन की उम्मीद लगाए रहा।
पैसे जमा किए, फिर भी नहीं हुआ ऑपरेशन
परिवार के मुताबिक, डॉक्टर की सलाह के बाद 4 अप्रैल 2014 को इलाज के लिए पैसे भी जमा कर दिए गए थे।
इसके बाद ऑपरेशन की तारीख मिलने की उम्मीद बढ़ी। परिवार का दावा है कि कार्डियोथोरेसिक सर्जन की ओर से पहली तारीख 2 सितंबर 2015 दी गई थी।
लेकिन ऑपरेशन उस तारीख पर नहीं हुआ। इसके बाद परिवार को दिवाली के बाद की तारीख बताई गई।
अस्पताल में भर्ती हुई, लेकिन फिर टल गया ऑपरेशन
16 दिसंबर 2015 को तन्वी को अस्पताल में भर्ती भी कराया गया। परिवार को उम्मीद थी कि अब उसकी सर्जरी हो जाएगी।
लेकिन परिजनों के अनुसार, उस समय डॉक्टरों ने उसके दांत में समस्या बताई और पहले उसका इलाज कराने को कहा।
परिवार ने दांत का इलाज भी करवाया। इसके बावजूद तन्वी की हार्ट सर्जरी नहीं हो सकी।
इसके बाद भी परिवार इलाज के लिए AIIMS आता-जाता रहा और ऑपरेशन की उम्मीद बनी रही।
2017 में सर्जरी को बताया गया मुश्किल
AIIMS के मुताबिक, 2013 में CT एंजियोग्राफी, कन्वेंशनल एंजियोग्राफी और कार्डियक कैथीटेराइजेशन जैसी जांचों से तन्वी के दिल की बनावट और बीमारी की गंभीरता का आकलन किया गया था।
इसके बाद 2017 में डॉक्टरों ने बीमारी की जटिलता को देखते हुए सर्जरी संभव नहीं होने की बात कही। परिवार को नियमित जांच और दवाओं से इलाज जारी रखने की सलाह दी गई।
परिवार ने इसके बाद भी दूसरी विशेषज्ञ राय लेने की कोशिश की। पिछले साल कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी विभाग के प्रमुख से राय ली गई।
परिवार के अनुसार, वहां भी दवा से इलाज जारी रखने की सलाह मिली। एक अन्य वरिष्ठ कार्डियोथोरेसिक सर्जन से राय लेने पर भी यही सलाह दी गई।
अगस्त में फिर बिगड़ी तबीयत
अगस्त 2026 में तन्वी की हालत गंभीर होने लगी। 24 अगस्त को उसे AIIMS में भर्ती कराया गया।
डॉक्टरों ने उसकी स्थिति की विस्तृत जांच की और हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की संभावना पर भी विचार किया।
लेकिन इलाज के बीच 1 सितंबर की सुबह तन्वी की मौत हो गई।
अब जांच से खुलेगा सच
तन्वी की मौत के बाद मामला सामने आने पर AIIMS प्रशासन ने उच्चस्तरीय कमेटी गठित की है। संस्थान का कहना है कि मरीज की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को ध्यान में रखते हुए पूरे मामले की जांच की जाएगी।
पोस्टमार्टम और मेडिकल रिकॉर्ड से सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वहीं तन्वी के पिता मुकेश कुमार का कहना है कि उन्होंने बेटी के इलाज के लिए वर्षों तक दिल्ली के चक्कर लगाए और कई स्तरों पर शिकायत भी की।
अब उनकी मांग है कि सिर्फ औपचारिक जांच नहीं, बल्कि यह स्पष्ट किया जाए कि आखिर इतने लंबे समय तक इलाज और ऑपरेशन की प्रक्रिया क्यों आगे नहीं बढ़ पाई और उनकी बेटी को समय पर जरूरी इलाज क्यों नहीं मिल सका।

