Monday, September 7, 2026

Perfume: क्या महंगे होने वाले हैं परफ्यूम, डियो और बॉडी स्प्रे? जानिए क्या है वजह

Perfume: परफ्यूम, डियो और बॉडी स्प्रे हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन इनकी खुशबू सिर्फ फ्रैगरेंस ऑयल से नहीं बनती।

खुशबू को सही बेस देने और स्प्रे करते ही उसे हवा में फैलाने में अल्कोहल की बड़ी भूमिका होती है।

ऐसे में जब देश में गाड़ियों के लिए फ्यूल इथेनॉल की मांग लगातार चर्चा में रहती है, तो सवाल उठता है कि क्या इसका असर कॉस्मेटिक्स इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले अल्कोहल पर भी पड़ सकता है?

क्या आने वाले दिनों में परफ्यूम और डियो महंगे हो सकते हैं?

परफ्यूम में क्यों इस्तेमाल होता है अल्कोहल?

परफ्यूम, डियो और बॉडी स्प्रे में अल्कोहल एक अहम बेस के तौर पर काम करता है।

कॉस्मेटिक्स इंडस्ट्री में इसके लिए मुख्य रूप से ENA यानी Extra Neutral Alcohol या डिनेचर्ड स्पिरिट का इस्तेमाल किया जाता है।

अल्कोहल खुशबू को त्वचा या कपड़ों पर फैलाने में मदद करता है और स्प्रे के बाद तेजी से वाष्पित भी हो जाता है।

यही वजह है कि इसकी कीमतों में बदलाव होने पर कॉस्मेटिक्स कंपनियों की लागत पर कुछ असर पड़ सकता है।

फ्यूल इथेनॉल की बढ़ती मांग से कितना असर?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर इथेनॉल की मांग गाड़ियों के ईंधन के लिए बढ़ती है, तो क्या कॉस्मेटिक्स इंडस्ट्री को ENA की कमी का सामना करना पड़ेगा?

फिलहाल ऐसा सीधा असर दिखाई नहीं देता। इस सीजन में गन्ने का एक बड़ा हिस्सा फ्यूल इथेनॉल के बजाय चीनी उत्पादन की ओर गया है।

इससे शीरे और ENA की उपलब्धता का संतुलन कॉस्मेटिक्स इंडस्ट्री के लिए फिलहाल सामान्य बना हुआ है।

इसका मतलब यह है कि सिर्फ फ्यूल इथेनॉल की मांग को देखकर यह कहना जल्दबाजी होगी कि परफ्यूम और डियो की कीमतें बढ़ने वाली हैं।

परफ्यूम की कीमत सिर्फ अल्कोहल से तय नहीं होती

किसी परफ्यूम की एमआरपी में अल्कोहल की लागत अकेला बड़ा फैक्टर नहीं है। इसकी कीमत तय करने में फ्रैगरेंस ऑयल, बोतल, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और टैक्स जैसे कई खर्च शामिल होते हैं।

यही कारण है कि अल्कोहल या कच्चे माल की कीमत में मामूली बदलाव आने पर कंपनियां तुरंत अपने प्रोडक्ट की रिटेल कीमत नहीं बढ़ातीं।

कंपनियां अक्सर बढ़ी हुई लागत को कुछ समय तक अपने मार्जिन में एडजस्ट करने की कोशिश करती हैं।

सस्ते डियो पर पड़ सकता है ज्यादा असर

अगर भविष्य में ENA या दूसरे अल्कोहल की कीमत में बड़ी बढ़ोतरी होती है, तो उसका असर हर प्रोडक्ट पर समान नहीं होगा।

मास-मार्केट डियो और बॉडी स्प्रे में अल्कोहल की मात्रा और वॉल्यूम का महत्व ज्यादा होता है।

इन प्रोडक्ट्स में कीमत को लेकर ग्राहकों की संवेदनशीलता भी अधिक रहती है। ऐसे में लागत बढ़ने पर कंपनियों को कीमत, पैक साइज या मार्जिन में बदलाव पर विचार करना पड़ सकता है।

वहीं प्रीमियम और डिजाइनर परफ्यूम पर इसका असर अपेक्षाकृत कम हो सकता है।

इनकी कुल कीमत में फ्रैगरेंस, ब्रांड वैल्यू, पैकेजिंग और मार्केटिंग जैसे खर्चों की हिस्सेदारी काफी ज्यादा होती है।

असली नजर टैक्स पॉलिसी पर

कॉस्मेटिक्स इंडस्ट्री के लिए सिर्फ फ्यूल इथेनॉल की मांग ही देखने वाली बात नहीं है। राज्य सरकारों की टैक्स पॉलिसी भी अहम भूमिका निभा सकती है।

अगर किसी राज्य में ENA या रेक्टिफाइड स्पिरिट पर स्थानीय ड्यूटी या सेस बढ़ता है, तो कंपनियों की इनपुट कॉस्ट बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में कीमतों पर दबाव बढ़ने की संभावना ज्यादा होगी।

फिलहाल परफ्यूम, डियो और बॉडी स्प्रे की कीमतों में फ्यूल इथेनॉल की वजह से अचानक बढ़ोतरी का कोई स्पष्ट ट्रेंड नजर नहीं आता।

ENA की सप्लाई सामान्य रहने और टैक्स पॉलिसी में बड़ा बदलाव नहीं होने तक उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना कम है।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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