लद्दाख
दशकों पुरानी नोतोर भूमि व्यवस्था को मिलेगा कानूनी आधार
लद्दाख में सरकारी बंजर भूमि पर खेती और उपयोग कर रहे लोगों के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने करीब साठ हजार एकड़ नोतोर भूमि को नियमित करने और पात्र लोगों को मालिकाना अधिकार देने की मंजूरी दी है।
केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद नोतोर सरकारी बंजर भूमि नियमितीकरण नियम 2026 को स्वीकृति दी है। इस फैसले के बाद लंबे समय से कानूनी स्पष्टता के अभाव में अटकी भूमि व्यवस्था को औपचारिक स्वरूप देने का रास्ता खुल गया है।
लद्दाख में सरकार के स्वामित्व वाली साठ हजार एकड़ से अधिक बंजर भूमि खेती के उद्देश्य से स्थानीय लोगों को आवंटित की गई थी। स्पष्ट कानूनी व्यवस्था नहीं होने के कारण संबंधित भूमि धारक इन जमीनों का पूरा आर्थिक लाभ नहीं उठा पा रहे थे।
दस एकड़ तक जमीन पर मिल सकेगा मालिकाना अधिकार
नई व्यवस्था का उद्देश्य नोतोर भूमि के उपयोग और अधिकारों को लेकर पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करना है। स्पष्ट नियम बनने से जमीन पर वर्षों से निर्भर परिवारों को संपत्ति संबंधी अधिकार मिलेंगे और स्थानीय स्तर पर आर्थिक सशक्तीकरण को गति मिलने की उम्मीद है।
नए नियमों के तहत पात्र नोतोर भूमि धारकों को अधिकतम दस एकड़ तक जमीन पर मालिकाना अधिकार दिया जा सकेगा। इससे भूमि का दर्जा केवल उपयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पात्र लोगों को उस जमीन पर औपचारिक और कानूनी संपत्ति अधिकार भी प्राप्त होंगे।
दस एकड़ से अधिक भूमि पर मालिकाना अधिकार नहीं दिया जाएगा और ऐसी अतिरिक्त जमीन केवल लीज के आधार पर आवंटित की जा सकेगी। इस प्रावधान के जरिए प्रशासन बड़े भूभाग पर स्थायी स्वामित्व सीमित रखते हुए नियंत्रित उपयोग की व्यवस्था बनाए रखना चाहता है।
बैंक से कर्ज लेने का रास्ता भी होगा आसान
नियमित की गई नोतोर भूमि को अब बैंक ऋण के लिए कानूनी संपत्ति के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे भूमि धारकों को कृषि, आधारभूत ढांचे और अन्य विकास कार्यों के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने में आसानी होगी और जमीन की आर्थिक उपयोगिता बढ़ेगी।
नई नीति में नियमित नोतोर भूमि के भूमि उपयोग में परिवर्तन की अनुमति देने का प्रावधान शामिल है। इससे नियमों के अनुसार जमीन के उपयोग का स्वरूप बदला जा सकेगा, जिससे कृषि के साथ अन्य वैध विकास गतिविधियों के लिए भी नई संभावनाएं खुलेंगी।
27 अक्टूबर 2020 से पहले की भूमि के लिए विशेष व्यवस्था
प्रशासन ने 27 अक्टूबर 2020 से पहले कब्जे में रही नोतोर भूमि के लिए एक बार के नियमितीकरण का प्रावधान रखा है। इस अवधि के भीतर पात्रता साबित करने वाले धारकों को नियमों के अनुसार अपनी जमीन का कानूनी दर्जा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
लद्दाख के सभी सात जिलों में नोतोर भूमि के आवंटन का अधिकार अब संबंधित लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषदों के पास रहेगा। इससे स्थानीय निकायों की भूमिका मजबूत होगी और भूमि संबंधी निर्णय क्षेत्रीय परिस्थितियों तथा पात्रता के आधार पर तरीके से लिए जा सकेंगे।
अंतिम अधिसूचना से पहले दो सप्ताह का सार्वजनिक परामर्श
नियमों की अंतिम अधिसूचना जारी होने से पहले प्रस्तावित व्यवस्था को दो सप्ताह के लिए सार्वजनिक परामर्श में रखा जाएगा। इस अवधि के दौरान आम नागरिक, भूमि धारक और अन्य संबंधित हितधारक अपने सुझाव तथा आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे, जिन पर प्रशासन विचार करेगा।
उपराज्यपाल ने इस व्यवस्था को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईज ऑफ लिविंग दृष्टिकोण से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया है। इसे व्यापक नियामकीय सुधार और डीरेग्युलेशन की दिशा में अहम माना जा रहा है, ताकि पुरानी प्रशासनिक जटिलताओं को कम कर अधिकार स्पष्ट किए जा सकें।
जमीन बनेगी वास्तविक आर्थिक परिसंपत्ति
नई व्यवस्था लागू होने पर नोतोर भूमि धारकों को कानूनी निश्चितता मिलेगी और वर्षों से उपयोग में रही जमीनों को आर्थिक परिसंपत्ति में बदलने का अवसर बनेगा। फैसला समान, समावेशी और जमीनी विकास को गति देकर समृद्धि बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया है।

