UP: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित एक मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब बुलडोजर कार्रवाई के बाद राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने विवादित मस्जिद के ढांचे को ध्वस्त कर दिया।
इस कार्रवाई के बाद जहां प्रशासन की ओर से इसे सरकारी जमीन से अनधिकृत कब्जा हटाने की कार्रवाई बताया जा रहा है, वहीं मस्जिद पक्ष और विपक्षी नेताओं ने इसे लेकर सवाल उठाए हैं।
2025 में शुरू हुआ विवाद
इस पूरे मामले की शुरुआत 2025 में हुई, जब बजरंग दल की शिकायत के बाद प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद मस्जिद और उससे जुड़ी जमीन की जांच शुरू की।
जांच का मुख्य मुद्दा जमीन के मालिकाना हक को लेकर था। प्रशासन के मुताबिक सरकारी रिकॉर्ड में संबंधित जमीन कलेक्ट्रेट की सरकारी जमीन के तौर पर दर्ज थी।
दूसरी ओर मस्जिद पक्ष का दावा रहा कि यह मस्जिद करीब 100 से 150 साल पुरानी है और जमीन वक्फ संपत्ति है।
पक्ष की ओर से यह भी कहा गया कि यहां लंबे समय से नमाज अदा की जाती रही है। इस दावे और सरकारी रिकॉर्ड के बीच ही विवाद लगातार बढ़ता गया।
सिटी मजिस्ट्रेट ने दिया था आदेश
मामले में 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से आदेश जारी किया गया। प्रशासन ने मस्जिद को सरकारी जमीन पर अनधिकृत कब्जा मानते हुए 30 दिन के भीतर जगह खाली करने का निर्देश दिया।
इसके साथ करीब 6 करोड़ 41 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति और वसूली का आदेश भी दिया गया।
सिटी मजिस्ट्रेट के इस फैसले को मस्जिद पक्ष ने जिला अदालत में चुनौती दी। पक्ष की ओर से अपने दावों और जमीन की स्थिति को लेकर अदालत का रुख किया गया।
हालांकि 2 सितंबर 2026 को जिला अदालत ने अपील खारिज कर दी और सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा।
5 सितंबर को चला बुलडोजर
अदालत के फैसले के बाद प्रशासन ने कार्रवाई को आगे बढ़ाया। 5 सितंबर को भारी पुलिस बल कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचा। सुरक्षा व्यवस्था के बीच बुलडोजर की मदद से विवादित मस्जिद के ढांचे को ध्वस्त कर दिया गया।
कार्रवाई के बाद मामला तेजी से राजनीतिक बहस में बदल गया। बसपा सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सहारनपुर की मस्जिद का जिक्र करते हुए सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में मस्जिदों को जल्दबाजी में अवैध बताकर ध्वस्त करने का अभियान उचित नहीं है। मायावती ने सरकार से ऐसे मामलों में दूसरे समाधान तलाशने की अपील की।
इकरा हसन के हाउस अरेस्ट का दावा
इसी बीच कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन के सहारनपुर जाने की खबर भी सामने आई।
दावा किया गया कि वह अधिकारियों से मुलाकात कर मामले को लेकर जनता की आवाज उठाने की तैयारी में थीं, लेकिन उन्हें उनके घर पर हाउस अरेस्ट कर दिया गया।
इकरा हसन ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया, फिर भी उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि इकरा हसन को अधिकारियों से मिलने के लिए सहारनपुर जाने से नहीं रोका जाना चाहिए।
कार्रवाई के बाद कई सवाल
अब यह मामला सिर्फ जमीन और एक निर्माण को लेकर विवाद नहीं रह गया है। इसके साथ सरकारी जमीन, वक्फ संपत्ति, धार्मिक स्थल, प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक विरोध जैसे कई सवाल जुड़ गए हैं।
प्रशासन और अदालत के फैसले का आधार सरकारी जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और कानूनी प्रक्रिया रही, ज
बकि मस्जिद पक्ष लंबे समय से इसे वक्फ संपत्ति और पुराना धार्मिक स्थल बताता रहा है।
बुलडोजर कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस विवाद का अगला राजनीतिक और कानूनी पड़ाव क्या होगा।
सहारनपुर की यह कार्रवाई आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की सियासत को और कितना गरमाती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

