Mumbai: दिल्ली में चलती बस में नाबालिग लड़की के साथ रेप का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब मुंबई से एक मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी का मामला सामने आया है।
नवी मुंबई में स्कूल वैन के ड्राइवर पर 3 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा है। इस घटना के सामने आने के बाद बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्कूल से घर लौट रही थी बच्ची
बताया जा रहा है कि बच्ची स्कूल से छुट्टी के बाद स्कूल वैन से अपने घर लौट रही थी। रास्ते में वह वैन से उतरने वाली आखिरी बच्ची थी।
आरोप है कि जब वैन में बच्ची अकेली रह गई, तो ड्राइवर ने इसी स्थिति का फायदा उठाया और उसके साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया।
मासूम के लिए यह सफर उसके रोज के स्कूल रूट जैसा ही था। परिवार को भी उम्मीद थी कि बच्ची हर दिन की तरह सुरक्षित घर लौटेगी, लेकिन घर पहुंचने के बाद जो बात सामने आई, उसने पूरे परिवार को हिलाकर रख दिया।
घर पहुंचकर बच्ची ने बताई पूरी बात
घर पहुंचने के बाद बच्ची ने परिवार को अपने साथ हुई घटना के बारे में बताया। उसने पेट में दर्द होने की शिकायत भी की।
बच्ची की बात सुनकर माता-पिता घबरा गए और तुरंत पुलिस थाने पहुंचे। परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी वैन ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया और मामले की जांच शुरू कर दी।
दिल्ली की घटना भी अभी ताजा
मुंबई की यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब दिल्ली में नाबालिग के साथ चलती बस में रेप का मामला अभी चर्चा में है।
बताया गया कि 16 वर्षीय छात्रा ग्रेटर नोएडा के परी चौक से नोएडा जाने के लिए बस में सवार हुई थी।
आरोप है कि बस में मौजूद ड्राइवर और कंडक्टर ने उसे जबरन रोक लिया और उसके साथ दुष्कर्म किया।
करीब 47 किलोमीटर तक सफर करने के बाद आरोपी छात्रा को दिल्ली के कश्मीरी गेट बस टर्मिनल के पास छोड़कर फरार हो गए।
इस मामले में पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
एक घटना की चर्चा अभी खत्म भी नहीं होती कि दूसरी घटना सामने आ जाती है। ऐसे मामलों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बच्चों की सुरक्षा को लेकर व्यवस्था कितनी गंभीर है?
माता-पिता भरोसा करके अपने बच्चों को स्कूल बस और वैन में भेजते हैं, लेकिन अगर इसी सफर में उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ जाए तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
सिर्फ घटना के बाद आरोपी की गिरफ्तारी से सवाल खत्म नहीं होते। जरूरत इस बात की है कि स्कूल परिवहन व्यवस्था में सुरक्षा के नियमों का सख्ती से पालन हो और बच्चों की सुरक्षा को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए।
आखिर कब तक मासूमों की सुरक्षा का सवाल किसी घटना के बाद उठता रहेगा? क्या प्रशासन और स्कूल व्यवस्था ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए
पहले से ठोस कदम उठाएगी, या फिर अगली घटना के बाद एक बार फिर वही सवाल दोहराया जाएगा?

