लद्दाख में सात नए जिलों के गठन पर कारगिल में असंतोष
कारगिल में बुधवार को लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के फैसले पर सवाल उठने लगे। उपराज्यपाल ने लद्दाख में पांच नए जिले बनाने का निर्णय लिया है। इन नए जिलों में केवल दो में मुस्लिम बहुसंख्यक आबादी है। इस फैसले को लेकर कारगिल में विरोध के स्वर मुखर हो रहे हैं।
गृह मंत्री की यात्रा से पहले बढ़ा विवाद
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की लेह यात्रा से एक दिन पहले यह आलोचना तेज हो गई। गृह मंत्री दो दिन के दौरे पर लेह पहुंचने वाले हैं। कारगिल के कई नेताओं ने इस कदम पर सार्वजनिक रूप से अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। स्थानीय नेतृत्व इस निर्णय से नाखुश नजर आ रहा है।
वकील ने जताई आपत्ति
मुस्तफा हाजी एक वकील हैं और लेह एपेक्स बॉडी के कानूनी सलाहकार भी हैं। उन्होंने कहा कि जिलों के गठन का तरीका कारगिल की मुस्लिम आबादी के साथ बड़े भेदभाव को दर्शाता है। उन्होंने जिलों के बंटवारे में असमानता की ओर इशारा किया। हाजी का कहना है कि यह प्रशासनिक निर्णय संतुलित नहीं है।
सांप्रदायिक संतुलन का मुद्दा
नए जिलों के गठन में मुस्लिम बहुसंख्यक क्षेत्रों को सीमित प्रतिनिधित्व मिला है। कुल सात जिलों में से केवल दो में मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक है। यह अनुपात कारगिल के नेताओं को स्वीकार्य नहीं है। स्थानीय समुदाय इसे प्रशासनिक न्याय की कमी मानता है।
प्रशासनिक पुनर्गठन पर सवाल
लद्दाख में जिलों का यह नया विभाजन प्रशासनिक सुधार के नाम पर किया गया है। लेकिन कारगिल के लोगों का मानना है कि इसमें जनसांख्यिकीय संतुलन का ध्यान नहीं रखा गया। पांच नए जिलों के निर्माण की प्रक्रिया में स्थानीय भावनाओं की अनदेखी की गई है। यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

