स्मार्ट बॉर्डर मिशन: भारत-बांग्लादेश सीमा को पहले से ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र सरकार लगातार आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा रही है।
इसी दिशा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने तीन दिवसीय पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान सिलीगुड़ी कॉरिडोर में स्थित बीएसएफ (BSF) के झुमागाछ बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) का दौरा किया।
यहां उन्होंने सीमा सुरक्षा के लिए तैयार किए गए कई स्वदेशी हाईटेक सिस्टम का निरीक्षण किया, जवानों से बातचीत की और करीब 77.06 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।
सरकार का मकसद सीमा पर निगरानी को और मजबूत बनाना, घुसपैठ पर रोक लगाना और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को नई तकनीक के जरिए बेहतर करना है।
सीमा सुरक्षा में दिखीं नई स्वदेशी तकनीकें
झुमागाछ बॉर्डर आउटपोस्ट पर अमित शाह ने कई आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों का जायजा लिया। इनमें सबसे खास रेडियो बेस्ड फेंस ब्रीच डिटेक्शन सिस्टम है।
अगर सीमा पर लगी बाड़ के साथ कोई छेड़छाड़ होती है तो यह सिस्टम तुरंत पहले से रिकॉर्ड किया गया अलर्ट संदेश प्रसारित करता है,
जिससे सुरक्षा बलों को तुरंत जानकारी मिल जाती है और वे तुरंत कार्रवाई कर सकते हैं।
इसके अलावा सीमा के उन हिस्सों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है जहां नदी, नाले या फेंसिंग के बीच खाली जगह होने की वजह से सुरक्षा चुनौती बनी रहती है।
ऐसे इलाकों में इन्फ्रारेड अलार्म सिस्टम लगाया गया है। जैसे ही कोई व्यक्ति इन्फ्रारेड बीम को पार करता है, सिस्टम तुरंत चेतावनी जारी कर देता है।
किसानों और स्थानीय लोगों के लिए नई व्यवस्था
सीमा पर रहने वाले किसानों और स्थानीय लोगों की आवाजाही को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए तैयार किए गए गेट मैनेजमेंट सिस्टम की भी गृह मंत्री ने समीक्षा की।
इस तकनीक की मदद से सीमा क्षेत्र में आने-जाने वाले लोगों की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सकेगी और सुरक्षा से कोई समझौता भी नहीं होगा।
दौरे के दौरान अमित शाह ने बीएसएफ की तीन विकास परियोजनाओं का वर्चुअल उद्घाटन और शिलान्यास किया।
इसके साथ ही दो नई सीमा चौकियों के निर्माण और करीब चार किलोमीटर लंबी नई फेंसिंग परियोजना की आधारशिला भी रखी गई।
‘क्वाड्रैंगुलर सिक्योरिटी ग्रिड’ बना रही है सरकार
अमित शाह ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दौरे की जानकारी साझा करते हुए कहा कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर का वह इलाका,
जिसे पहले घुसपैठ का रास्ता माना जाता था, अब मजबूत और सुरक्षित सीमा की पहचान बन रहा है।
उन्होंने बताया कि उन्होंने बीएसएफ के नॉर्थ बंगाल फ्रंटियर की 18वीं बटालियन के झुमागाछ बॉर्डर आउटपोस्ट पर वॉच टावर से पूरी निगरानी व्यवस्था का निरीक्षण किया।
उनके मुताबिक मोदी सरकार ने सिर्फ वॉच टावरों की संख्या ही नहीं बढ़ाई है, बल्कि उन्हें अत्याधुनिक तकनीक से भी लैस किया है ताकि सीमा की सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो सके।
गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए ‘क्वाड्रैंगुलर सिक्योरिटी ग्रिड’ तैयार कर रही है।
इसके जरिए आधुनिक तकनीक, बेहतर निगरानी और तेज प्रतिक्रिया प्रणाली को एक साथ जोड़ा जाएगा।
‘स्मार्ट बॉर्डर’ पर काम कर रही है सरकार
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ‘स्मार्ट बॉर्डर’ की सोच को तेजी से आगे बढ़ा रही है।
इसका उद्देश्य देश की सीमाओं को तकनीक के जरिए पूरी तरह सुरक्षित बनाना है।
उन्होंने यह भी कहा कि सीमा पर दिन-रात ड्यूटी करने वाले बीएसएफ जवानों और उनके परिवारों का कल्याण सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है।
बेहतर सुविधाएं और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
बीएसएफ जवानों से मिले अमित शाह
दौरे के दौरान गृह मंत्री ने सीमा पर तैनात बीएसएफ जवानों से मुलाकात की और ‘प्रहरी सम्मेलन’ में हिस्सा लिया।
उन्होंने जवानों का हौसला बढ़ाया और वॉच टावर से पूरे सीमा क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया।
इसके बाद अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में लंबित फेंसिंग कार्य को जल्द पूरा करने,
आधुनिक मशीनों का ज्यादा इस्तेमाल करने और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए।
क्यों अहम है ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर?
सिलीगुड़ी कॉरिडोर को आम भाषा में ‘चिकन नेक’ कहा जाता है। यह भारत का बेहद संकरा भूभाग है, जो देश के मुख्य हिस्से को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है।
इसके आसपास नेपाल, बांग्लादेश और भूटान की सीमाएं हैं, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से यह इलाका बेहद संवेदनशील माना जाता है।
यही वजह है कि केंद्र सरकार इस पूरे क्षेत्र में आधुनिक तकनीक आधारित सुरक्षा ढांचा तैयार कर रही है।
सरकार का मानना है कि हाईटेक निगरानी प्रणाली, मजबूत फेंसिंग और स्मार्ट सुरक्षा नेटवर्क के जरिए इस रणनीतिक क्षेत्र को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सकता है।

