राम मंदिर दान घोटाला: अयोध्या के राम मंदिर में दान के पैसों की हेराफेरी मामले में आज कोर्ट में एक बहुत बड़ा और दिलचस्प मोड़ देखने को मिला। अदालत ने मामले के सभी 8 आरोपियों को 14 दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी (न्यायिक हिरासत) में सीधे जेल भेज दिया है।
लेकिन इस पूरी अदालती कार्यवाही के दौरान जो सबसे हैरान करने वाली बात रही, वो था पुलिस का रवैया. इतने बड़े करोड़ों के घोटाले में पुलिस ने शुरुआत में आरोपियों की रिमांड नहीं मांगी।
आखिर पुलिस के इस ‘माइंड गेम’ के पीछे की इनसाइड स्टोरी क्या है? और 13 जुलाई को कोर्ट में क्या होने वाला है? आइए इसे डिटेल में समझते हैं.
वकीलों का इनकार, बिना किसी लीगल सपोर्ट के सीधे जेल
राम मंदिर दान घोटाला: आज इस हाई-प्रोफाइल केस की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ऑनलाइन की गई।
सुनवाई के दौरान एक अनोखा वाकया देखने को मिलाय़ आरोपियों की तरफ से पैरवी करने के लिए कोर्ट में कोई भी वकील खड़ा नहीं हुआ।
फैजाबाद बार एसोसिएशन ने आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले को देखते हुए आरोपियों का केस लड़ने से साफ इनकार कर दिया है।
नतीजा यह हुआ कि बिना किसी कानूनी प्रतिनिधित्व (Legal Representation) के आठों आरोपियों को सीधा जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा।
रिमांड न मांगकर पुलिस ने क्यों खेला ‘माइंड गेम’?
राम मंदिर दान घोटाला: करोड़ों के गबन के इस मामले में जब पुलिस ने शुरुआत में कस्टडी रिमांड की मांग नहीं की, तो कचेहरी से लेकर चौराहों तक चर्चाएं तेज हो गईं।
हर कोई हैरान था कि पुलिस इतनी ढील क्यों दे रही है? लेकिन कानूनी एक्सपर्ट्स और पुलिस सोर्सेज के मुताबिक, यह पुलिस की कोई चूक नहीं, बल्कि एक बेहद सोची-समझी और सधी हुई रणनीति है।
पुलिस जल्दबाजी में कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहती जिससे आरोपियों को बचने का कोई कानूनी ‘लूपहोल’ मिल जाए।
पुलिस का प्लान पहले अपना होमवर्क पूरी तरह मजबूत करने का है।
केवल जुबानी पूछताछ के बजाय पुलिस बैकग्राउंड में रहकर सारे पुख्ता सबूत (Evidence) एक टेबल पर इकट्ठा कर रही है, ताकि जब आरोपियों से सामना हो, तो वे मुकर न सकें.
बैकग्राउंड में पुलिस की बड़ी तैयारी: बैंकों पर दबिश
राम मंदिर दान घोटाला: जब आरोपी जेल में हैं, तब पुलिस की एक स्पेशल टीम उनके ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है।
छापेमारी में भारी मात्रा में कैश, ज्वैलरी और सोने-चांदी बरामद हो रहे हैं। इसके साथ ही पुलिस इन आरोपियों के:
- बैंक डिटेल्स और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस खंगाल रही है।
- हाल ही में किए गए इन्वेस्टमेंट और बेनामी संपत्तियों के कागजात जांच रही है।
- कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) और डिजिटल फुटप्रिंट्स निकाल रही है ताकि पता चले कि चोरी का पैसा कहां-कहां ट्रांसफर हुआ।
- इसी सिलसिले में आज पुलिस ने सीधे बैंकों का रुख किया और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की ब्रांच पर दबिश देकर सीसीटीवी फुटेज, सर्वर डेटा और डिपॉजिट से जुड़े बेहद अहम डॉक्यूमेंट्स अपने कब्जे में ले लिए। बैंक कर्मचारियों से भी इस वित्तीय लेन-देन को लेकर लंबी पूछताछ की गई है।
2 दिन की कस्टडी के लिए डाली अर्जी
राम मंदिर दान घोटाला: हालांकि, इस पूरे ड्रामे के बीच एक नया अपडेट यह आया है कि पुलिस ने सेशन कोर्ट का रुख करते हुए आरोपियों की 2 दिन की कस्टडी रिमांड के लिए कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है।
पुलिस का प्लान साफ है, जैसे ही सबूतों का संकलन (Evidence Collection) 100% पूरा हो जाएगा, वे कोर्ट से मिली रिमांड के दौरान इन कागजातों को आरोपियों के सामने रखकर पूछताछ करेंगे।
तब शातिर अपराधियों के पास पुलिस को घुमाने या झूठ बोलने का कोई रास्ता नहीं बचेगा।
13 जुलाई को क्या होने वाला है?
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 जुलाई की तारीख तय की है।
13 जुलाई को इन आरोपियों को फिर से कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा. माना जा रहा है कि तब तक पुलिस के हाथ कई बड़े डिजिटल और फाइनेंशियल सबूत लग चुके होंगे।
पुलिस की इस गहरी रणनीति से साफ है कि इस घोटाले के तार सिर्फ इन 8 लोगों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि जल्द ही कुछ और ‘बड़ी मछलियां’ भी खाकी के इस चक्रव्यूह में फंसने वाली हैं।
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