हरियाली तीज पर बांके बिहारी के अलौकिक दर्शन: मथुरा-वृंदावन में शनिवार को हरियाली तीज के अवसर पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है।
वृंदावन की संकरी गलियों से लेकर बांके बिहारी मंदिर तक हर तरफ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ नजर आ रही है।
सुबह से ही देश के अलग-अलग हिस्सों से आए भक्त ठाकुरजी के विशेष स्वरूप के दर्शन के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं।
सुबह करीब 8 बजे मंदिर के पट खुले तो भक्तों को बांके बिहारी के उस दिव्य स्वरूप के दर्शन हुए, जिसका इंतजार पूरे साल किया जाता है।
ठाकुरजी हरे रंग की जड़ाऊ पोशाक और रत्नजड़ित स्वर्ण आभूषणों से सजे नजर आए। इस दौरान वे विशेष सोने-चांदी से तैयार हिंडोले पर विराजमान थे।
दर्शन होते ही भक्त भाव-विभोर हो उठे। किसी ने हाथ जोड़कर नमन किया तो किसी ने सिर झुकाकर आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा।
8 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान
हरियाली तीज पर बांके बिहारी के अलौकिक दर्शन: हरियाली तीज पर वृंदावन में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ गई है।
सुबह से ही बड़ी संख्या में भक्त बांके बिहारी के दर्शन कर चुके हैं और दिनभर में यह संख्या और बढ़ने की संभावना है।
प्रशासन ने अनुमान लगाया है कि करीब 8 लाख से अधिक श्रद्धालु मथुरा-वृंदावन पहुंच सकते हैं।
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर क्षेत्र के आसपास व्यापक ट्रैफिक व्यवस्था की गई है।
बांके बिहारी मंदिर से लगभग तीन किलोमीटर पहले ही बाहरी वाहनों को रोक दिया जा रहा है।
इसके लिए अलग-अलग इलाकों में 21 से अधिक पार्किंग स्थल बनाए गए हैं।
पार्किंग से आगे जाने के लिए ई-रिक्शा और ई-कार्ट की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। प्रति यात्री किराया 20 रुपये निर्धारित किया गया है।
हालांकि, भीड़ अधिक होने के कारण कई श्रद्धालुओं को वाहन नहीं मिल पा रहे हैं और उन्हें करीब तीन किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी पड़ रही है।
भीड़ बढ़ने की स्थिति में ई-रिक्शा और ई-कार्ट की आवाजाही पर भी रोक लगाने की तैयारी है।
4 जोन, 18 सेक्टर और एक हजार से ज्यादा जवान तैनात
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए वृंदावन को चार जोन और 18 सेक्टर में विभाजित किया गया है।
सुरक्षा और यातायात व्यवस्था संभालने के लिए एक हजार से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। अलग-अलग मार्गों पर 69 बैरियर लगाए गए हैं।
बांके बिहारी मंदिर के आसपास की गलियों में बैरिकेडिंग कर श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से मंदिर में प्रवेश कराया जा रहा है।
शहर में बाहरी वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने के साथ कई मार्गों का ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है।
साल में सिर्फ एक बार बदलता है बांके बिहारी का यह स्वरूप
हरियाली तीज का सबसे बड़ा आकर्षण बांके बिहारी का झूला दर्शन है।
इस दिन ठाकुरजी गर्भगृह से बाहर आकर मंदिर के आंगन में सजे विशेष हिंडोले पर विराजमान होते हैं।
बांके बिहारी मंदिर में यह विशेष झूला साल में केवल एक बार सजाया जाता है।
इस अवसर पर ठाकुरजी को हरे रंग की बेशकीमती जड़ाऊ पोशाक पहनाई गई है।
साथ ही सोने के रत्नजड़ित आभूषणों से उनका विशेष श्रृंगार किया गया।
भगवान को मावा, मलाई, मक्खन, मीठा और फीका घेवर, फैनी समेत कई पारंपरिक व्यंजनों का भोग लगाया जा रहा है।
12 घंटे से ज्यादा खुले रहेंगे मंदिर के पट
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए हरियाली तीज पर बांके बिहारी मंदिर के दर्शन का समय भी बढ़ाया गया है।
सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक और शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक भक्त दर्शन कर सकेंगे।
आम दिनों में मंदिर सुबह 7:45 बजे से दोपहर 12 बजे तक और शाम 5:30 बजे से रात 9:30 बजे तक खुलता है।
यानी सामान्य दिनों की तुलना में हरियाली तीज पर दर्शन के लिए काफी अतिरिक्त समय दिया गया है।
आरती के समय में भी बदलाव किया गया है। श्रृंगार आरती सुबह 7:55 बजे होगी, जबकि राजभोग आरती दोपहर 1:55 बजे और शयन आरती रात 10:55 बजे होगी।
ठाकुरजी के विश्राम के लिए सजाई गई ‘सुख सेज’
हरियाली तीज के अवसर पर मंदिर में ठाकुरजी के विश्राम के लिए विशेष शयन व्यवस्था भी की गई है।
सोने-चांदी से सजी इस शैया को ‘सुख सेज’ कहा जाता है।
ब्रज की धार्मिक मान्यता के अनुसार बांके बिहारी को बाल स्वरूप में माना जाता है।
झूला विहार के बाद उनके विश्राम के लिए यह विशेष सेज सजाई जाती है। इसके पास चांदी का दर्पण और श्रृंगार से जुड़ी सामग्री से सजी ‘सुहाग पिटारी’ भी रखी जाती है।
आज शाम रंगनाथ मंदिर में भी होगा विशेष झूला दर्शन
हरियाली तीज की शाम दक्षिण भारतीय स्थापत्य शैली के प्रसिद्ध रंगनाथ मंदिर में भी विशेष आयोजन होगा।
यहां भगवान गोदा रंगमन्नार चांदी के झूले पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे।
आजादी के दिन ठाकुरजी को समर्पित हुआ था ऐतिहासिक झूला
बांके बिहारी मंदिर का यह भव्य झूला अपने इतिहास और कारीगरी के लिए भी खास माना जाता है।
इसके निर्माण की शुरुआत भारत छोड़ो आंदोलन के दौर में हुई थी और इसे तैयार होने में करीब पांच वर्ष लगे।
इस भव्य हिंडोले के निर्माण में लगभग 1000 किलो चांदी और 10 किलो सोने का इस्तेमाल किया गया।
इसके अलावा शीशम, साल और सागवान जैसी मजबूत लकड़ियों का भी उपयोग हुआ।
झूले को करीब 125 अलग-अलग हिस्सों में तैयार किया गया है, जिसे जरूरत के अनुसार जोड़ा और अलग किया जा सकता है।
इस पर की गई बारीक नक्काशी इसकी खास पहचान है। झूले पर मयूर आकृतियां, घुमावदार संरचनाएं, अलंकृत खंभे, सीढ़ियां और ब्रज परंपरा से जुड़ी सखियों की प्रतिमाएं उकेरी गई हैं। बेल-बूटों की बारीक कारीगरी इसे बेहद आकर्षक बनाती है।
कहा जाता है कि करीब पांच साल की मेहनत के बाद तैयार हुआ यह झूला 15 अगस्त 1947 को ठाकुरजी की सेवा में समर्पित किया गया था।
इसके चार दिन बाद, 19 अगस्त 1947 को पहली बार बांके बिहारी को इस हिंडोले पर विराजमान कराया गया।
आज भी हरियाली तीज पर जब ठाकुरजी इस ऐतिहासिक झूले पर विराजमान होते हैं, तो वृंदावन का माहौल भक्ति, परंपरा और उत्सव के रंग में डूब जाता है। यही वजह है कि इस एक दिन के झूला दर्शन के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु वृंदावन पहुंचते हैं।

