राहुल गांधी सीजन 2.0
राहुल गांधी को लेकर भाजपा ने अपनी रणनीति का दूसरा चरण तैयार किया है। इसमें नरेंद्र मोदी के सख्त निर्देश, अजीत डोभाल की भूमिका, राजनाथ सिंह की नाराजगी, देवेंद्र फडणवीस की टिप्पणी और राहुल गांधी को रात में मिले नोटिस के घटनाक्रम शामिल हैं।
पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में यह सवाल भी उभरा कि प्रधानमंत्री मोदी ने किससे कहा कि लक्ष्य जमीन, आसमान या कहीं भी हों, उन्हें खोजकर निकालो। इसके साथ राहुल गांधी पर राजनाथ सिंह के गुस्से और फडणवीस द्वारा उन्हें छिछोरा कहे जाने की चर्चा है।
भाजपा नेताओं की भूमिकाएं तय, योगी को खुलकर खेलने की छूट
भाजपा ने नेताओं की भूमिकाएं नए सिरे से तय की हैं। कुछ नेताओं को खुलकर बोलने और विपक्ष पर सीधा हमला करने की छूट दी गई है, जबकि कुछ चेहरों को सार्वजनिक बयानबाजी सीमित रखने और रणनीतिक चुप्पी बनाए रखने का निर्देश दिया गया है।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आक्रामक राजनीतिक भूमिका निभाने की पूरी छूट मिली है। पार्टी मान रही है कि आगामी विधानसभा चुनाव बेहद कठिन होगा और राष्ट्रीय राजनीति की दिशा पर भी इस चुनाव का गहरा असर पड़ सकता है।
उत्तर प्रदेश में पहली बार ऐसी स्थिति बनेगी, जब कोई मुख्यमंत्री लगातार लगभग दस वर्ष शासन करने के बाद तीसरी बार चुनावी मैदान में उतरेगा। भाजपा की रणनीति में योगी आदित्यनाथ को ही प्रमुख चेहरा बनाकर जनता के बीच जाने की तैयारी की गई है।
मोदी और पार्टी अध्यक्ष से मुलाकात के बाद बढ़ी योगी की ताकत
योगी आदित्यनाथ ने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और फिर पार्टी अध्यक्ष से चर्चा की। दिल्ली में हुई इन बैठकों के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश में संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर अधिक स्वतंत्रता तथा खुलकर राजनीतिक फैसले लेने का संकेत मिला है।
योगी आदित्यनाथ को लेकर विरोधाभासी खबरें चलती रही हैं और उनके नाम पर सुपारी लेकर खबरें चलाने के आरोप लगते रहे हैं। कभी अमित शाह, नरेंद्र मोदी या नितिन नवीन के नाम से मतभेद बताए गए, लेकिन तीनों योगी के साथ हैं।
जंतर मंतर के बाद दिल्ली और लखनऊ दोनों स्तरों पर उत्तर प्रदेश चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न मानकर तैयारी तेज हुई है। नरेंद्र मोदी, अमित शाह, योगी आदित्यनाथ, नितिन नवीन और संघ आगामी चुनाव में पूरी राजनीतिक और संगठनात्मक ताकत लगाने वाले हैं।
विधायकों की रिपोर्ट तैयार, अस्सी से सौ टिकटों पर संकट
टिकट वितरण को लेकर भी व्यापक समीक्षा शुरू हो चुकी है। एक एक विधायक की राजनीतिक स्थिति, स्थानीय प्रभाव, संगठन के साथ तालमेल और जनाधार का आकलन किया गया है। मुख्यमंत्री की राय टिकट काटने और नए प्रत्याशी तय करने में महत्वपूर्ण रहने वाली है।
प्रारंभिक आकलन में लगभग अस्सी से सौ मौजूदा विधायकों के टिकट कटने की संभावना है। अंतिम सूची अभी तय नहीं है, लेकिन संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी है और कमजोर प्रदर्शन वाले विधायकों को दोबारा मौका मिलना कठिन माना जा रहा है।
पंद्रह अगस्त की रात ऑपरेशन सिंदूर पर डॉक्यूमेंट्री
पंद्रह अगस्त की सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करेंगे। इसके बाद रात नौ बजे ऑपरेशन सिंदूर पर तैयार विस्तृत डॉक्यूमेंट्री जारी होगी, जिसमें अभियान से जुड़ी रणनीति, निर्णय प्रक्रिया और सैन्य कार्रवाई के महत्वपूर्ण विवरण शामिल किए गए हैं।
इस डॉक्यूमेंट्री का राजनीतिक संदर्भ स्पष्ट है। राहुल गांधी और कुछ विपक्षी नेता कहते रहे हैं कि नरेंद्र मोदी अमेरिकी दबाव के सामने झुक गए और डोनाल्ड ट्रंप के कहने पर संघर्ष विराम हुआ, जबकि सरकार इससे उलट घटनाक्रम सामने रखने की तैयारी में है।
ऑपरेशन सिंदूर के वर्णन में प्रधानमंत्री मोदी का अजीत डोभाल को दिया गया सख्त निर्देश प्रमुख बिंदु है। संदेश था कि लक्ष्य जमीन, आसमान या पाताल में कहीं भी हों, उन्हें खोजकर बाहर निकालना है। इसी निर्देश को फाइंड देम के रूप में रखा गया।
रात एक बजकर पांच मिनट पर शुरू हुआ अभियान
रात एक बजकर पांच मिनट पर सैन्य अभियान शुरू किए जाने का उल्लेख है। सेना को कार्रवाई के लिए पूरी छूट दिए जाने की बात विवरण में शामिल है। डॉक्यूमेंट्री में अभियान की समयरेखा और उससे जुड़े फैसलों को विस्तार से दिखाने की तैयारी है।
भाजपा का आंतरिक आकलन है कि जंतर मंतर का मुद्दा अब पुराना पड़ चुका है। कॉकरोच पार्टी कहे जा रहे समूह के तीन प्रमुख लड़के दोबारा दिल्ली पहुंचे, लेकिन डीडीए के छोटे से पार्क को भी अपेक्षित भीड़ से नहीं भर सके।
इसी आकलन के आधार पर पार्टी बीस जुलाई की राजनीति से आगे बढ़कर पंद्रह अगस्त के बाद की रणनीति पर ध्यान दे रही है। नेतृत्व का मानना है कि अगले चरण में बहस राहुल गांधी के बयानों और उनकी राजनीतिक भाषा पर केंद्रित की जाएगी।
राहुल गांधी की भाषा को ही भाजपा बनाएगी हथियार
राहुल गांधी की प्रधानमंत्री मोदी और जॉर्जिया मेलोनी पर टिप्पणी तथा मोदी और अमित शाह के लिए तू तड़ाक वाली भाषा भाजपा का नया मुद्दा है। पागल कर दूंगा, नींद उड़ा दूंगा और वह गिर जाएगा जैसे कथनों को निशाना बनाया जा रहा है।
भाजपा नेतृत्व का निष्कर्ष है कि ऐसी भाषा ने कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान पहुंचाया है। जवाबी रणनीति में राहुल गांधी को उनकी ही भाषा और आक्रामक शैली में घेरने की तैयारी है, जबकि आंदोलन से जुड़े दूसरे चेहरों को सीमित महत्व देने का फैसला है।
इस रणनीति को एक तीखे नारे में भी समेटा गया है, राहुल तेरी खैर नहीं, कॉकरोच से बैर नहीं। इसका संदेश यह है कि मुख्य राजनीतिक निशाना राहुल गांधी होंगे और बाकी विरोधी चेहरों को अनावश्यक महत्व देकर बड़ा नहीं किया जाएगा।
पंद्रह अगस्त के बाद भाजपा की नई टीम पर मुहर
पंद्रह अगस्त की देर शाम से भाजपा नेतृत्व नई संगठनात्मक टीम को अंतिम रूप देने में जुटेगा। संभावित सदस्यों की पृष्ठभूमि की जांच की गई है और चयन से पहले उनकी शैक्षणिक डिग्री तक की पड़ताल हुई है, ताकि नई टीम सावधानी से चुनी जाए।

