महाकाल मंदिर में भगदड़: उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी की स्थिति बन गई,
जब ऊपरी तल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए कतार में खड़े श्रद्धालुओं के बीच करंट फैलने की अफवाह फैल गई।
हरसिद्धि मंदिर चौराहे के पास बैरिकेडिंग के अंदर डीपी के समीप करंट फैलने की बात सुनते ही लोगों में घबराहट फैल गई।
देखते ही देखते भीड़ में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस दौरान कई श्रद्धालु गिरकर घायल हो गए।
घटना के बाद घायल श्रद्धालुओं को इलाज के लिए चरक अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में घायलों का उपचार जारी है। घायलों में उज्जैन, ग्वालियर, गुजरात, बिहार और अन्य स्थानों से आए श्रद्धालु शामिल हैं।
बैरिकेड से टकराए श्रद्धालु
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही कतार में खड़े थे। इसी दौरान अचानक करंट फैलने की अफवाह सामने आई।
भीड़ में मौजूद लोगों ने खुद को सुरक्षित निकालने की कोशिश की, जिससे स्थिति बिगड़ गई। कई लोग एक-दूसरे से टकराकर नीचे गिर गए।
भगदड़ के दौरान बैरिकेड और टेंट भी गिर गए। इसी दौरान उज्जैन निवासी 19 वर्षीय सागर के पैर बैरिकेड के नीचे फंस गए।
काफी प्रयास के बाद वह एक पैर बाहर निकाल पाया, लेकिन दूसरे पैर में गंभीर चोट लग गई। परिजनों के अनुसार, चोट इतनी ज्यादा थी कि युवक को पैर की हड्डी में गंभीर नुकसान होने की आशंका है।
इसके अलावा हरिश्चंद्र नाम के श्रद्धालु के पैरों में भी गंभीर चोट आई है। घायलों में हिंदू बाई, लक्ष्मीबाई, अनसूया, ममता, सोनम, सुजीत कुमार, खुशी और तुलसी समेत कई श्रद्धालु शामिल हैं।
काफी देर तक नहीं मिली मदद
घायल सागर की मां मीनू ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए बताया कि उनका बेटा भगदड़ में दबकर घायल हो गया था।
उनका आरोप है कि काफी देर तक किसी ने उसकी मदद नहीं की। बाद में एक व्यक्ति ने उसे उठाया और हेल्थ कैंप तक पहुंचाया।
सागर के मुताबिक, वह रात करीब 1 बजे नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए कतार में लगा था। वह कई घंटे का सफर करके उज्जैन पहुंचा था।
कतार में काफी देर तक खड़े रहने के बाद आरती के समय श्रद्धालुओं को रोक दिया गया था। इसके बाद अचानक गेट खोले गए और भीड़ आगे बढ़ने लगी। इसी दौरान अफरा-तफरी मच गई।
युवक का कहना है कि भगदड़ के दौरान टेंट और बैरिकेड गिरने से उसके पैर फंस गए। वह काफी देर तक मदद के लिए आवाज लगाता रहा।
उसका दावा है कि करीब आधे घंटे तक वह सड़क पर पड़ा रहा, लेकिन समय पर सहायता नहीं मिल सकी।
बाद में एक बाहर से आए व्यक्ति ने उसकी मदद की और उसे हरसिद्धि माता मंदिर के पास बने स्वास्थ्य शिविर तक पहुंचाया। कुछ समय बाद एंबुलेंस से उसे अस्पताल ले जाया गया।
दर्शन व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद कुछ समय के लिए दर्शन व्यवस्था प्रभावित रही। मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को संभाला और भीड़ को नियंत्रित किया। बाद में दर्शन व्यवस्था को फिर से सुचारू कर दिया गया।
घायल श्रद्धालुओं और उनके परिजनों ने मंदिर में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई।
सागर की मां का कहना है कि श्रद्धालु लंबे समय से कतार में खड़े थे और भीड़ को संभालने के लिए पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आए।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि सामान्य श्रद्धालुओं को लंबे समय तक कतार में इंतजार करना पड़ रहा था,
जबकि कुछ लोगों को अलग व्यवस्था के जरिए दर्शन की सुविधा मिल रही थी। इसको लेकर भी श्रद्धालुओं में नाराजगी देखने को मिली।
पुलिस-प्रशासन ने संभाली स्थिति
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने भीड़ को नियंत्रित किया और घायलों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। फिलहाल मंदिर में दर्शन व्यवस्था सामान्य बताई जा रही है।
महाकाल मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
सोमवार की घटना के बाद श्रद्धालुओं की सुरक्षा और कतार व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अब प्रशासन की ओर से घटना की स्थिति और भगदड़ के कारणों को लेकर आगे की जानकारी का इंतजार है।

