बिहार में मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़: बिहार में अपराधियों और अवैध हथियार तस्करों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका एक चौंकाने वाला उदाहरण पूर्णिया जिले से सामने आया है।
पूर्णिया के धमदाहा थाना क्षेत्र के अंतर्गत इटहरी पंचायत के हरिपुर गांव (वार्ड-1) में पुलिस ने एक ऐसे अवैध नेटवर्क को ध्वस्त किया है, जो हूबहू किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसा नजर आता है।
यहां एक घर के भीतर जमीन के ऊपर तो पत्तल (दोना-पत्तल) बनाने की मशीन चल रही थी, लेकिन उसी के ठीक बगल में बने एक गुप्त तहखाने के भीतर बड़े पैमाने पर अवैध ‘मिनी गन फैक्ट्री पूर्णिया’ का संचालन किया जा रहा था।
इस पूरे सनसनीखेज मामले का खुलासा तब हुआ जब बिहार और कोलकाता पुलिस की संयुक्त टीम ने पुख्ता खुफिया जानकारी के आधार पर छापेमारी की।
इस कार्रवाई में पुलिस ने अब तक कुल 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जिनमें इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड भी शामिल है।
कोलकाता से जुड़े तार और मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी
बिहार में मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़: इस बड़ी कार्रवाई की शुरुआत बिहार से नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से हुई।
कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने वहां हथियारों के साथ सूरज कुमार नाम के एक युवक को गिरफ्तार किया था।
जब एसटीएफ ने सूरज से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने उगल दिया कि उसने यह सारे घातक हथियार बिहार के पूर्णिया जिले के धमदाहा से खरीदे हैं।
सूरज कुमार मूल रूप से मुंगेर का रहने वाला है और वही इस पूरे अवैध कारोबार का मुख्य सूत्रधार व मास्टरमाइंड है।
वह पूर्णिया में तैयार होने वाले हथियारों को दूसरे राज्यों और जिलों में सप्लाई करने का जिम्मा संभालता था।
मास्टरमाइंड का सुराग मिलते ही कोलकाता एसटीएफ की टीम तुरंत पूर्णिया पहुंची और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर इस बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया।
ऊपर पत्तल उद्योग, नीचे बांस की सीढ़ी और हथियारों का सेटअप
बिहार में मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़: हरीपुर गांव के जिस मकान में यह धंधा फल-फूल रहा था, वह सुरेंद्र मंडल नाम के व्यक्ति का बताया जा रहा है।
ग्रामीणों और आसपास के लोगों को झांसा देने के लिए घर के मुख्य हिस्से में पत्तल बनाने की यूनिट लगाई गई थी।
दिनभर मशीन चलने की आवाज आती थी, जिससे लोगों को लगता था कि यहां सामान्य पत्तल निर्माण का काम हो रहा है।
यही वजह थी कि किसी भी स्थानीय निवासी को इस बात की भनक तक नहीं लगी और न ही किसी को कोई शक हुआ।
लेकिन जब बिहार एसटीएफ के डीएसपी अली साबरी, धमदाहा डीएसपी संदीप गोल्डी और थानाध्यक्ष रविशंकर कुमार की अगुवाई में भारी पुलिस बल ने वहां दस्तक दी, तो हकीकत कुछ और ही निकली।
पत्तल मशीन के पास ही एक बेहद चालाकी से छुपाया गया गुप्त रास्ता मिला, जो सीधे जमीन के नीचे बने तहखाने में जाता था।
पुलिस ने जब अंदर झांका, तो वहां नीचे जाने के लिए एक बांस की सीढ़ी लगी हुई थी।
तहखाने के भीतर पैर रखते ही पुलिस टीम के होश उड़ गए; नीचे अवैध हथियार बनाने का पूरा आधुनिक सेटअप तैयार था।
जब बुलानी पड़ी जेसीबी (JCB) मशीन
तहखाने में अवैध हथियार बनाने के लिए भारी-भरकम मशीनें लगाई गई थीं। इन्हें हाथों से उखाड़ना या बाहर निकालना मुमकिन नहीं था, इसलिए पुलिस ने तुरंत मौके पर एक जेसीबी मशीन मंगवाई। जेसीबी की मदद से जमीन को खोदा गया और हथियार बनाने वाली सभी मशीनों को उखाड़कर जब्त किया गया। पुलिस को मौके से ये सामान बरामद हुए:
1. 10 अर्द्धनिर्मित (Semi-finished) पिस्टल
2. 14 लोहे की मजबूत प्लेट्स
3. हथियार तराशने वाली बड़ी लेथ मशीन (Lathe Machine)
4. धातु काटने वाली कटर मशीन और अन्य उपकरण
6 महीने की तैयारी और मुंगेर के कारीगर
शुरुआती पुलिसिया जांच और पूछताछ में यह बात सामने आई है कि इस हरिपुर गांव में अवैध हथियार बनाने की ग्राउंडवर्क (तैयारी) पिछले करीब 6 महीनों से चल रही थी।
वहीं, पिछले 2 महीनों से यह मिनी गन फैक्ट्री पूर्णिया में पूरी तरह सक्रिय थी और यहां ताबड़तोड़ पिस्टल तैयार किए जा रहे थे।
इस फैक्ट्री को चलाने के लिए विशेष तौर पर मुंगेर से एक्सपर्ट कारीगरों को बुलाया गया था, क्योंकि मुंगेर को अवैध हथियारों के निर्माण का पुराना केंद्र माना जाता रहा है।
मौके से पुलिस ने जिन चार लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें मुंगेर के रहने वाले मोहम्मद आफताब आलम और मोहम्मद अनवर शामिल हैं, जो हथियार बनाने में माहिर हैं।
इनके अलावा धमदाहा के ही स्थानीय निवासी मिट्ठू कुमार और गब्बर मंडल को भी दबोचा गया है।
पुलिस के मुताबिक, मिट्ठू कुमार पहले दूसरे राज्यों में मजदूरी करता था और पिछले महीने ही गांव लौटा था।
आशंका जताई जा रही है कि तस्करों ने मिट्ठू को मोटी रकम का लालच देकर मोहरा बनाया था ताकि स्थानीय स्तर पर नेटवर्क को बिना किसी बाधा के संचालित किया जा सके।
जांच के दायरे में बड़ा सिंडिकेट
धमदाहा के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) संदीप गोल्डी और थानाध्यक्ष रविशंकर कुमार ने बताया कि इस संयुक्त कार्रवाई में बड़ी सफलता मिली है।
फिलहाल गिरफ्तार किए गए सभी पांचों आरोपियों (मास्टरमाइंड सूरज कुमार समेत) से अलग-अलग और आमने-सामने बिठाकर सघन पूछताछ की जा रही है।
पुलिस अब मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर जांच कर रही है: पहला यह कि पिछले दो महीनों में इस तहखाने से कुल कितने हथियार बनाकर बाहर भेजे जा चुके हैं, और दूसरा यह कि इस अवैध चेन में और कौन-कौन से सफेदपोश या स्थानीय लोग शामिल हैं।
पुलिस को पूरा अंदेशा है कि यह रैकेट एक बड़े अंतरराज्यीय हथियार तस्करी सिंडिकेट का हिस्सा है, जिसके तार कई अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं।
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