Wednesday, May 20, 2026

पेट्रोल में बढ़ेगी इथेनॉल की मात्रा: BIS ने E22 से E30 फ्यूल के लिए जारी किए नए नियम, जानिए आपकी गाड़ी पर क्या होगा असर

पेट्रोल में बढ़ेगी इथेनॉल की मात्रा: भारत सरकार ने देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है।

अब देश में सामान्य पेट्रोल के मुकाबले ऐसा पेट्रोल मिलने का रास्ता साफ हो गया है, जिसमें इथेनॉल की मात्रा काफी ज्यादा होगी।

ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) ने पेट्रोल में 22% से लेकर 30% तक इथेनॉल मिलाने के नए मानकों को आधिकारिक मंजूरी दे दी है।

सरकार की तरफ से 15 मई 2026 को जारी किए गए इस नोटिफिकेशन के बाद अब देश में E22, E25, E27 और E30 ग्रेड के ईंधन का इस्तेमाल लीगल और सुरक्षित तरीके से किया जा सकेगा।

क्या है BIS का नया नियम?

पेट्रोल में बढ़ेगी इथेनॉल की मात्रा: ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) ने इस नई नीति के तहत ज्यादा इथेनॉल वाले पेट्रोल के लिए नए मानक (Standards) तय कर दिए हैं।

इसके आने से अब देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) और ऑटोमोबाइल कंपनियों के पास एक आधिकारिक और सुरक्षित गाइडलाइन होगी कि वो ज्यादा इथेनॉल वाले ईंधन को कैसे तैयार करें और गाड़ियों के इंजन को इसके हिसाब से कैसे ढालें।

अभी तक भारत में E20 यानी 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल वाले ईंधन को अनिवार्य किया जा चुका है और देश के लगभग सभी पेट्रोल पंपों पर यही तेल मिल रहा है।

लेकिन अब सरकार E20 से आगे बढ़कर E30 (30% इथेनॉल मिक्स) की तैयारी में जुट गई है।

क्यों पड़ी पेट्रोल में ज़्यादा इथेनॉल मिलाने की जरूरत?

पेट्रोल में बढ़ेगी इथेनॉल की मात्रा: भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% से 88% कच्चा तेल (Crude Oil) दूसरे देशों से इम्पोर्ट (आयात) करता है।

वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में ही भारत का तेल आयात बिल लगभग $134.7 अरब डॉलर रहा था।

ऐसे में मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की उठती-गिरती कीमतों से भारतीय अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए घरेलू स्तर पर ईंधन तैयार करना बेहद जरूरी हो गया है।

इथेनॉल भारत में ही गन्ने के रस, मक्के और खराब अनाज से तैयार होता है, जिससे हमारा पैसा दूसरे देशों में जाने से बचेगा।

चीनी मिलों और डिस्टिलरी उद्योग की चमकेगी किस्मत

इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा देश के किसानों और चीनी मिलों को होने वाला है। ‘ऑल इंडिया डिस्टिलरी एसोसिएशन’ (AIDA) ने सरकार के इस कदम का दिल से स्वागत किया है।

AIDA के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह के मुताबिक:

“यह सिर्फ एक तकनीकी फैसला नहीं है, बल्कि देश के सुरक्षित भविष्य के लिए उठाया गया बड़ा कदम है।

देश में मार्च 2026 तक इथेनॉल बनाने की क्षमता लगभग 20 अरब लीटर पहुंच चुकी है, जबकि वर्तमान में केवल 11 अरब लीटर की ही खपत हो पा रही थी।

ऐसे में E22 से E30 के आने से इस अतिरिक्त इथेनॉल का सही इस्तेमाल हो पाएगा।”

आपकी गाड़ी और माइलेज पर क्या असर होगा?

ज्यादा इथेनॉल मिक्स होने से गाड़ियों के इंजन पर क्या असर पड़ेगा, इसे लेकर सरकार बेहद सतर्क है।

मौजूदा समय में देश की ज्यादातर गाड़ियाँ E10 या E20 फ्यूल के हिसाब से बनाई गई हैं।

गाड़ियों की टेस्टिंग शुरू: पेट्रोलियम मंत्रालय ने ARAI (Automotive Research Association of India) को यह काम सौंपा है कि वो मौजूदा गाड़ियों पर E25 ईंधन के असर (माइलेज और इंजन लाइफ) की बारीकी से जांच करे।

इसके लिए गाड़ियों को 60,000 से 70,000 किलोमीटर तक चलाकर टेस्ट किया जाएगा।

ऑटो कंपनियों की तैयारी: देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया के चेयरमैन आर.सी. भार्गव ने साफ किया है कि उनकी कंपनी नए नियमों के मुताबिक इंजन अपग्रेड करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

भविष्य की राह: फ्लेक्स-फ्यूल और E100 का सपना

विशेषज्ञों का मानना है कि E30 तो बस एक शुरुआत है।

आने वाले समय में भारत को E85 (85% इथेनॉल) और E100 (100% इथेनॉल) की तरफ कदम बढ़ाना चाहिए।

इसके लिए देश में फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स (FFVs) को बढ़ावा दिया जा रहा है। ये ऐसी गाड़ियाँ होती हैं, जो शत-प्रतिशत इथेनॉल पर भी बिना किसी परेशानी के दौड़ सकती हैं।

इस फैसले से होने वाले 3 सबसे बड़े फायदे

सरकार के इस फैसले से देश को कई मोर्चों पर बड़ा फायदा होने वाला है, जिन्हें हम तीन मुख्य बिंदुओं में समझ सकते हैं:

1. प्रदूषण में भारी कमी: इथेनॉल एक बेहतरीन और साफ बायोफ्यूल है।

पेट्रोल में इसे मिलाने से गाड़ियों से निकलने वाले धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बहुत कम हो जाता है।

इससे बड़े शहरों में हवा की क्वालिटी सुधरेगी और पर्यावरण को भारी फायदा होगा।

2. किसानों की बढ़ेगी आमदनी: चूंकि इथेनॉल गन्ने, मक्के, चावल और अन्य खराब अनाज से तैयार किया जाता है, इसलिए इसकी मांग बढ़ने से सीधे देश के किसानों को लाभ होगा।

उन्हें अपनी फसलों का सही और बेहतर दाम समय पर मिल सकेगा।

3. देश के अरबों रुपयों की बचत: विदेशों से कच्चा तेल कम इम्पोर्ट करना पड़ेगा, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा।

भारत के अरबों डॉलर देश के भीतर ही रहेंगे, जिससे हमारी अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी और रुपया भी मजबूत होगा।

यह भी पढ़े: रूसी तेल की छूट हुई खत्म, होर्मुज में तेल संकट के बीच भारत में बढ़ सकती है कीमतें


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