Wednesday, May 20, 2026

तालिबान-TTP मॉड्यूल पर NIA की बड़ी कार्रवाई, हमराज शेख को 7 साल की सजा

तालिबान-TTP मॉड्यूल: राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने तालिबान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े आतंकी मॉड्यूल के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए हमराज वर्शिद शेख को 7 साल की सजा सुनाई है।

बेंगलुरु स्थित NIA कोर्ट ने दोषी पर 63 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

महाराष्ट्र के रहने वाले हमराज पर आरोप था कि वह भारत के खिलाफ जिहादी गतिविधियों को बढ़ावा देने और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने में शामिल था।

यह मामला केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके जरिए एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ,

जो सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर युवाओं को कट्टरपंथ की राह पर ले जाने की कोशिश कर रहा था।

ट्रायल के दौरान कबूला गुनाह

NIA की जांच के दौरान सामने आए सबूतों के आधार पर हमराज वर्शिद शेख के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

अप्रैल 2026 में शुरू हुए ट्रायल के दौरान उसने अदालत में अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद अदालत ने उसे दोषी मानते हुए सजा सुनाई।

इस मामले में उसका सहयोगी मोहम्मद आरिफ भी आरोपी है। NIA ने अक्टूबर 2023 में उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

फिलहाल मोहम्मद आरिफ के खिलाफ अदालत में सुनवाई जारी है।

जांच एजेंसी का कहना है कि दोनों आरोपी एक संगठित आतंकी नेटवर्क तैयार करने में लगे हुए थे,

जिसका उद्देश्य भारत में कट्टरपंथ फैलाना और युवाओं को आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार करना था।

सऊदी अरब में हुआ कट्टरपंथी प्रभाव

जांच में सामने आया कि हमराज शेख साल 2019 से 2022 के बीच सऊदी अरब में रह चुका था।

इसी दौरान वह तालिबान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के संपर्क में आया। धीरे-धीरे वह कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित होता गया।

NIA के अनुसार, विदेश में रहने के दौरान उसने ऐसे लोगों से संपर्क बनाए जो जिहादी सोच को बढ़ावा दे रहे थे।

बाद में उसने भारत लौटकर अपने नेटवर्क को विस्तार देने की कोशिश शुरू की।

एजेंसी का दावा है कि हमराज ने अपने सहयोगी मोहम्मद आरिफ के साथ मिलकर युवाओं को प्रभावित करने और उन्हें कट्टरपंथ की ओर ले जाने का काम किया।

सोशल मीडिया के जरिए भर्ती अभियान

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हुए एक ऑनलाइन जिहादी भर्ती नेटवर्क तैयार किया था।

गरीब और बेरोजगार मुस्लिम युवाओं को निशाना बनाकर उनका ब्रेनवॉश किया जाता था।

NIA के अनुसार, आरोपी युवाओं को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करते थे कि उन्हें कथित “जिहाद” का हिस्सा बनना चाहिए।

इसके लिए धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल किया जाता था और कट्टरपंथी सामग्री साझा की जाती थी।

जांच एजेंसियों ने पाया कि यह नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था और ऑनलाइन माध्यमों से युवाओं तक पहुंच बना रहा था।

‘कश्मीर पेजेस’ इंस्टाग्राम हैंडल की भूमिका

मामले की जांच के दौरान ‘हंजला’ नाम के एक ऑनलाइन हैंडलर का भी खुलासा हुआ।

बताया गया कि वह ‘कश्मीर पेजेस’ नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए कट्टरपंथी प्रचार फैलाने का काम करता था।

इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल तालिबान और TTP की विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा था।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, सोशल मीडिया पोस्ट और मैसेज के जरिए युवाओं को प्रभावित किया जाता था।

NIA का कहना है कि इस नेटवर्क का मकसद सिर्फ ऑनलाइन प्रचार तक सीमित नहीं था, बल्कि युवाओं को वास्तविक आतंकी गतिविधियों में शामिल करने की योजना भी बनाई गई थी।

अफगानिस्तान भेजने की थी साजिश

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी युवाओं को आतंकी ट्रेनिंग के लिए अफगानिस्तान भेजने की योजना बना रहे थे।

दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर TTP में शामिल होने के उद्देश्य से एक आतंकी गिरोह तैयार किया था।

इसके अलावा कट्टरपंथी गतिविधियों के लिए धन जुटाने और भारत के खिलाफ जिहाद छेड़ने की योजना भी बनाई गई थी।

NIA ने इसे देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ा संदेश

हमराज शेख को मिली सजा को सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

इस फैसले से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि भारत विरोधी गतिविधियों, आतंकी नेटवर्क और कट्टरपंथ फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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