PMRF Fellowship 2026: IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं के लिए रिसर्च के बढ़ते अवसरों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप (PMRF) की चर्चा की।
इस योजना के तहत योग्य रिसर्च स्कॉलर्स को हर महीने हजारों रुपये की फेलोशिप के साथ रिसर्च ग्रांट भी मिलता है। जानिए PMRF क्या है, कौन आवेदन कर सकता है और पांच साल में कितनी आर्थिक सहायता मिल सकती है।
आईआईटी दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिग्री हासिल करने वाले छात्रों को भविष्य की बदलती जरूरतों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया।
समारोह में 587 पीएचडी स्कॉलर्स समेत 3,000 से अधिक विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। शानदार शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल सहित विभिन्न सम्मानों से भी नवाजा गया।
छात्रों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने तेजी से बदलती तकनीक, नई चुनौतियों और रिसर्च की बढ़ती भूमिका का जिक्र किया।
इसी दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप यानी PMRF की चर्चा करते हुए बताया कि यह पहल देश के प्रतिभाशाली युवाओं को शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध करा रही है।
ऐसे में सवाल है कि आखिर PMRF Fellowship क्या है? इसके लिए कौन योग्य होता है और चयन होने के बाद एक रिसर्च स्कॉलर को कितनी आर्थिक सहायता मिलती है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
क्या है Prime Minister’s Research Fellowship?
pmrf fellowship: प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप (PMRF) केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली रिसर्च के लिए प्रोत्साहित करना है।
योजना की शुरुआत 2018-19 में की गई थी और इसके लिए 1,650 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान रखा गया था।
इस पहल का प्रमुख उद्देश्य देश के बेहतरीन विद्यार्थियों को प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में उन्नत स्तर की रिसर्च के लिए आकर्षित करना है।
इसके तहत चयनित रिसर्च स्कॉलर्स को मासिक फेलोशिप के साथ रिसर्च ग्रांट की सुविधा भी दी जाती है, जिससे आर्थिक दबाव कम हो और वे अपने शोध पर बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित कर सकें।
सरकारी जानकारी के अनुसार, अब तक 3,668 स्कॉलर्स इस योजना के तहत दाखिल हो चुके हैं।
PMRF Fellowship के लिए कौन कर सकता है आवेदन?
pmrf fellowship eligibility: PMRF का लाभ मुख्य रूप से ऐसे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए है, जो देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में उच्च गुणवत्ता वाले रिसर्च प्रोग्राम के जरिए आगे बढ़ना चाहते हैं। खास तौर पर पीएचडी और उन्नत शोध की दिशा में जाने वाले विद्यार्थियों के लिए यह महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है।
उम्मीदवार के चयन में उसकी शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ रिसर्च की क्षमता और संबंधित क्षेत्र में प्रदर्शन को महत्व दिया जाता है।
आवेदन और चयन संबंधित संस्थान तथा योजना के निर्धारित पात्रता नियमों के आधार पर किया जाता है। यानी केवल पीएचडी में प्रवेश लेना अपने आप PMRF मिलने की गारंटी नहीं है।
हर महीने ₹70,000 से ₹80,000 तक की फेलोशिप
pmrf fellowship amount: PMRF की सबसे खास बात इसके तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता है। चयनित रिसर्च स्कॉलर की मासिक फेलोशिप पीएचडी के वर्ष के अनुसार बढ़ती जाती है।
पीएचडी के पहले और दूसरे वर्ष में स्कॉलर को ₹70,000 प्रति माह दिए जाते हैं। तीसरे वर्ष यह राशि बढ़कर ₹75,000 प्रति माह हो जाती है। चौथे और पांचवें वर्ष में चयनित स्कॉलर को ₹80,000 प्रति माह तक की फेलोशिप मिलती है।
इस आर्थिक सहायता का उद्देश्य रिसर्च स्कॉलर्स को अपनी पढ़ाई और शोध पर पूरा ध्यान केंद्रित करने में मदद करना है।
सालाना ₹2 लाख का रिसर्च ग्रांट भी
how to apply for pmrf fellowship: मासिक फेलोशिप के अलावा PMRF स्कॉलर्स के लिए रिसर्च ग्रांट का भी प्रावधान है। चयनित स्कॉलर को शोध से जुड़ी जरूरतों के लिए हर साल ₹2 लाख तक का रिसर्च ग्रांट मिल सकता है।
यदि कोई स्कॉलर पांच वर्षों तक योजना के तहत पात्र रहता है, तो रिसर्च ग्रांट की कुल राशि ₹10 लाख तक पहुंच सकती है। यह राशि मासिक फेलोशिप से अलग होती है और शोध से संबंधित गतिविधियों में मदद के उद्देश्य से उपलब्ध कराई जाती है।
Lateral Entry से भी मिल सकता है PMRF का मौका
Pmrf fellowship amount per month: PMRF में लैटरल एंट्री का विकल्प भी उपलब्ध है। इसके लिए उम्मीदवार का PMRF प्रदान करने वाले पात्र संस्थानों में से किसी एक में पीएचडी प्रोग्राम में होना जरूरी है।
अगर उम्मीदवार ने मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद पीएचडी में प्रवेश लिया है, तो आवेदन के समय पीएचडी प्रोग्राम में उसके अधिकतम 12 महीने पूरे हुए होने चाहिए।
वहीं बैचलर डिग्री के बाद सीधे पीएचडी प्रोग्राम में दाखिला लेने वाले उम्मीदवार के मामले में यह अवधि अधिकतम 24 महीने हो सकती है।
इस व्यवस्था के कारण पहले से पीएचडी कर रहे योग्य रिसर्च स्कॉलर्स के लिए भी PMRF हासिल करने का रास्ता खुला रहता है।
PMRF का लाभ कैसे मिलता है?
PMRF fellowship institute list: PMRF फेलोशिप हर पीएचडी छात्र को स्वतः नहीं मिलती। इसके लिए उम्मीदवार को योजना के निर्धारित पात्रता मानदंड और चयन प्रक्रिया को पूरा करना होता है।
योग्य संस्थान में रिसर्च प्रोग्राम में दाखिला लेने के बाद उम्मीदवार निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार PMRF के लिए आगे बढ़ सकता है। चयन के दौरान उसकी अकादमिक उपलब्धियां, शोध करने की क्षमता और रिसर्च के क्षेत्र में अब तक के प्रदर्शन जैसे पहलुओं को महत्व दिया जाता है।
इसलिए PMRF का लक्ष्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि देश की सबसे बेहतर रिसर्च प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें उच्च स्तर के शोध के लिए प्रोत्साहित करना भी है।
रिसर्च में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए बड़ा अवसर
PMRF fellowship notification: भारत में तकनीक, विज्ञान और इनोवेशन का दायरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में उच्च स्तरीय रिसर्च करने वाले युवाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती जा रही है।
PMRF जैसी योजना उन विद्यार्थियों के लिए खास अवसर बन सकती है, जो आर्थिक सहायता के साथ देश के प्रमुख संस्थानों में रिसर्च करना चाहते हैं।
मासिक फेलोशिप, सालाना रिसर्च ग्रांट और प्रमुख संस्थानों में शोध का अवसर PMRF को देश की महत्वपूर्ण रिसर्च फेलोशिप योजनाओं में शामिल करता है।
हालांकि आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को अपनी पात्रता, संबंधित संस्थान के नियम और PMRF की मौजूदा गाइडलाइंस जरूर जांच लेनी चाहिए।
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