ऑफिस ने नहीं उठाया इलाज का खर्च: बीमारी या इलाज का खर्च किसी के लिए भी बड़ी परेशानी बन सकता है। खासकर जब अस्पताल का बिल आपकी जेब से देना पड़े और ऑफिस की तरफ से उसका पैसा वापस न मिले।
ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि क्या इलाज पर खुद किए गए खर्च पर भी इनकम टैक्स में कोई राहत मिल सकती है?
इसका जवाब है- कुछ मामलों में हां। इनकम टैक्स के नियमों के तहत वरिष्ठ नागरिकों के इलाज पर किए गए कुछ मेडिकल खर्च पर टैक्स में छूट मिल सकती है। इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं।
वरिष्ठ नागरिक के इलाज पर मिल सकती है राहत
अगर आपके माता-पिता या परिवार का कोई वरिष्ठ सदस्य 60 साल या उससे ज्यादा उम्र का है और उसके पास हेल्थ इंश्योरेंस नहीं है, तो उसके इलाज पर किए गए खर्च पर धारा 80D के तहत टैक्स में छूट का फायदा मिल सकता है।
इसका मतलब यह है कि अगर आपने अपने माता-पिता के अस्पताल, दवाइयों या इलाज से जुड़े जरूरी खर्च अपनी जेब से किए हैं, तो कुछ शर्तों के साथ आप उस खर्च को टैक्स में छूट के लिए दिखा सकते हैं।
माता-पिता के इलाज का खर्च भी कर सकते हैं शामिल
मान लीजिए आपके माता-पिता की उम्र 60 साल से ज्यादा है और उनके पास कोई हेल्थ इंश्योरेंस नहीं है। अगर उनके इलाज का खर्च आपने अपनी तरफ से उठाया है, तो आप धारा 80D के तहत निर्धारित सीमा तक इसका फायदा ले सकते हैं।
माता-पिता की अपनी पेंशन या कमाई है, तब भी कुछ परिस्थितियों में आप उनके इलाज का खर्च क्लेम कर सकते हैं। यानी सिर्फ इस वजह से कि माता-पिता की अपनी आय है, टैक्स लाभ का रास्ता बंद नहीं हो जाता।
कितनी रकम पर मिलती है छूट?
वरिष्ठ नागरिकों के मेडिकल खर्च के मामले में धारा 80D के तहत एक वित्तीय वर्ष में 50,000 रुपये तक की सीमा लागू होती है। हालांकि, इसका फायदा लेने के लिए बाकी जरूरी शर्तें भी पूरी करनी होती हैं।
इसलिए अगर आपने इलाज पर 70,000 रुपये खर्च किए हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि पूरी 70,000 रुपये की रकम पर टैक्स में छूट मिल जाएगी। निर्धारित सीमा और लागू नियमों को ध्यान में रखना जरूरी है।
अगर ऑफिस ने मेडिकल खर्च नहीं दिया तो?
कई कंपनियां कर्मचारियों को मेडिकल खर्च या इलाज से जुड़े कुछ खर्च वापस करती हैं,
लेकिन अगर आपका ऑफिस ऐसा कोई पैसा वापस नहीं करता और आपने खुद इलाज का खर्च उठाया है, तो भी कुछ मामलों में टैक्स नियमों के तहत राहत मिल सकती है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि हर मेडिकल बिल पर टैक्स छूट नहीं मिलती। खर्च किसके इलाज पर हुआ,
उनकी उम्र कितनी है, हेल्थ इंश्योरेंस है या नहीं और भुगतान किस तरह किया गया है, इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
भुगतान का तरीका भी है जरूरी
मेडिकल खर्च का भुगतान करते समय कोशिश करें कि पैसे UPI, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग जैसे डिजिटल माध्यम से किए जाएं। इससे आपके पास भुगतान का रिकॉर्ड भी रहता है।
कैश में किए गए भुगतान पर नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए मेडिकल खर्च का भुगतान डिजिटल तरीके से करना ज्यादा सुरक्षित रहता है।
मेडिकल बिल संभालकर रखें
अगर आप मेडिकल खर्च के आधार पर टैक्स में राहत लेना चाहते हैं, तो अस्पताल के बिल, दवाइयों की रसीद और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड जरूर संभालकर रखें।
बिल और पेमेंट का रिकॉर्ड बाद में यह साबित करने में मदद कर सकता है कि आपने वास्तव में इलाज पर पैसा खर्च किया था।
अगर आपके घर में 60 साल या उससे ज्यादा उम्र का कोई वरिष्ठ नागरिक है, उसके पास हेल्थ इंश्योरेंस नहीं है और उसके इलाज का खर्च आपने खुद उठाया है, तो धारा 80D के तहत टैक्स में राहत मिलने की संभावना हो सकती है।
लेकिन क्लेम करने से पहले अपनी स्थिति और मौजूदा इनकम टैक्स नियमों को जरूर जांच लें। नियमों के अनुसार ही टैक्स रिटर्न में मेडिकल खर्च को शामिल करें।

